रियो के बाद बदल गया जीवन : सिंधु

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रियो के बाद बदल गया जीवन : सिंधु

ओलिंपिक में सिल्वर मैडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला और भारत की बैडमिंटन चैंपियन पी वी सिंधु ने कहा है कि रियो ओलिंपिक के बाद उनका जीवन काफी बदल गया है। 21 साल की सिंधु ने कैरोलिना मरीन के खिलाफ खेले गए फाइनल मैच को याद किया और भरोसा जताया कि टोक्यो ओलिंपिक में वे गोल्ड जीतेंगी।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया से सिंधु ने कहा, "रियो के बाद जीवन वास्तव में बदल गया है। ओलिंपिक मैडल जीतना मेरा सपना था जो अब सच हो गया है। अब मुझे अधिक जिम्मेदारी का एहसास होता है। यह बहुत मुश्किल भी है। अब मुझे खेल पर पूरा ध्यान देने और वापस ट्रेनिंग पर लौटने की जरूरत है।"

नेशनल स्पोर्ट्स डे के मौके पर राजीव गाँधी खेल रत्न जैसा सर्वोच्च पुरस्कार जीतने के बाद सिंधु काफी खुश थी। उन्होंने कहा, "यह मेरे लिए विशेष दिन है, मैं अब काफी खुश हूँ। "

रियो से लौटने के बाद सिंधु का गृह नगर हैदराबाद में भव्य स्वागत हुआ। सिंधु की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए एक बड़ी रैली निकली गयी जिसमें सड़क पर उनके हज़ारों प्रशंसक मौजूद थे।

सिंधु ने कहा, "यह बहुत थकाऊ और मुश्किल दिन है, लेकिन मैं अपनी जीत को लोगों के साथ एन्जॉय कर रही हूँ।हैदराबाद पहुँचने के बाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सरकार के साथ लोगों ने भी मेरा भव्य स्वागत किया। मुझे अंदाज नहीं था कि मेरे स्वागत के लिए इतने लोग जुटेंगे और मुझ पर इतना प्यार लुटाएंगे।लोगों के हाथ में मेरे नाम के बैनर थे और वे सड़क किनारे मेरे स्वागत को खड़े थे। मेरे लिए यह एक अजूबे की तरह था। मैं उन सभी लोगों का धन्यवाद् करती हूँ जिन्होंने मेरे लिए इतनी मुश्किलें सही और मुझे गौरवान्वित किया।मुझे रियो में यह अंदाजा नहीं था कि भारत में मेरे स्वागत की इतनी तैयारी है। मेरे लौटने के बाद मुझे बहुत से लोगों ने कहा कि वे मेरी इस उपलब्धि से काफी खुश हैं। "

यह पूछे जाने पर कि क्या इसीलिये उन्होंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया, सिंधु ने हँसते हुए जवाब दिया, "नहीं, ऐसा नहीं है। जब मैंने खेलना शुरू किया तो मुझे पता नहीं था कि मैं एक महान खिलाड़ी बनूँगी।मेरी इसमें रूचि थी और यह मेरा जूनून था। मेरे माता-पिता ने मेरा साथ दिया। इस वजह से मैं खेलती रही।" बैडमिंटन स्टार ने कहा कि उसके परिवार में पहले से खिलाडी रहे हैं, इससे उन्हें खेल को करियर बनाने में मदद मिली।

सिंधु ने कहा, "हाँ, यह काफी मददगार रहा। मेरे माता-पिता वॉलीबाल प्लेयर रहे हैं और मेरे पिता को अर्जुन अवार्ड भी मिला है। मैं जब भी, जहाँ भी जाना चाहती थी, उनका साथ मिला है। उन्होंने मेरा साथ देने के लिए काफी मेहनत की है और इस वजह से उन्होंने काफी त्याग किया है। जब कभी मैं मैच हार जाती थी, वे दिलासा देते थे, कि कोई बात नहीं, ज्यादा चिंता मत करो।इससे मुझे काफी मदद मिली।"

रियो ओलिंपिक में मैडल जीतने के बाद भी उनके कोच पुलेला गोपीचंद को लगता है कि उनकी शिष्या सिंधु को अभी तराशना बाकी है। क्या इससे सिंधु को दिक्कत होती है, पूछने पर उन्होंने कहा, "मुझे यह बुरा नहीं लगता। एक टूर्नामेंट जीतने से आप परफेक्ट नहीं हो जाते। मैंने कई चीजें सीखी हैं और काफी कुछ सीखना बाकी है। हर रोज एक नयी शुरुआत होती है। मुझे पता है कि मैंने ओलिंपिक में एक मेडल जीता है, लेकिन अभी मुझे काफी कुछ सीखना है। "

21 साल की सिंधु ने कैरोलिना मरीन के खिलाफ खेले गए फाइनल मैच को याद किया और कहा, "फाइनल मुकाबले में मैं आश्वस्त थी, बल्कि गोपी सर भी समझ रहे थे कि मैं जीतूंगी।मैच ठीक शुरू हुआ। मैं पिछड़ गयी थी, फिर मैं जीती और पहला गेम मेरे नाम रहा। हाल मैं ही डेनमार्क में मैं कैरोलिना से जीत चुकी हूँ, लेकिन दूसरे टूर्नामेंट में हार गयी। कुल मिलकर यहाँ तीन गेम था, लेकिन यह मुश्किल था। पहला गेम जीतने के बाद मुझे लगा कि वह वापसी के लिए मेहनत करेगी। आखिर यह ओलिंपिक का फाइनल है।मैं पिछड़ रही थी, लेकिन फिर मैंने 10-आल स्कोर किया। उसके बाद मैंने लगातार 3-4 पॉइंट दे दिए। इसके बाद कैरोलिना ने बढ़त ले ली और जीत गयी। अगर मैं वे तीन पॉइंट ले लेती तो हो सकता था कि नतीजे कुछ अलग हों। "

साल 2020 में होने वाले टोक्यो ओलिंपिक में बेहतर करने का वादा करते हुए सिंधु ने कहा, "मैं निश्चित रूप से कोशिश करूंगी, लेकिन यह बहुत आसान नहीं होगा। मैं अपनी तरफ से गोल्ड जीतने की पूरी कोशिश करूंगी।"

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