मैं स्वर्ण पदक जीतना चाहती थी, वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता हरिका द्रोनावाली ने कहा

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मैं स्वर्ण पदक जीतना चाहती थी, वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता हरिका द्रोनावाली ने कहा

पिछले महीने तेहरान में वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप में कांस्य पदक विजेता हरिका द्रोनावली ने कहा कि यह उनके कार्यकाल के बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक था लेकिन वह स्वर्ण पदक जीतना चाहती थी। द्रोनावली ने दिग्गज भारतीय खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद का भी शुर्कियादा किया जिन्होंने उन्हें ट्वीटर पर जीत की बधाई दी।

प्रतियोगिता से पहले, द्रोनावली ने खांती-मानसिस्क और सोची में हुए वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप में, क्रमशः, दो कांस्य पदक जीते थे।

"दो बार लगातार कांस्य पदक जीतने के बाद, इस बार मैं स्वर्ण पदक जीतना चाहती थी," द्रोनावली ने News18.com से एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा।

"मेरा यह प्रदर्शन पिछले दो प्रदर्शन से कई गुना अच्छा था। खिलाड़ी ग़लती करते हैं लेकिन जल्द ही उन गलतियों से सीख भी लेते हैं। मैंने भी ऐसा ही किया। पिछले दो चैंपियनशिप से मुझे काफी कुछ सीखने को मिला और मैंने उन्ही जानकारियों पर इस बार अमल किया। मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूँ।"

"स्वर्ण पदक जीतना ही मेरा लक्ष्य रहा है। मैंने 2012 में भी स्वर्ण पदक जीतने का प्रयास किया था लेकिन कांस्य पदक हाथ लगा। वह भी मेरे बेहतरीन प्रदर्शनों में शामिल है। सबसे अच्छा खिलाड़ी आखिर में जीतता है और स्वर्ण पदक ले जाता है। उम्मीद है कि अगर मैं ऐसे ही मेहनत करती रही तो एक दिन स्वर्ण पदक ज़रूर जीतूंगी।

हालांकि उनका यह सपना इस बार भी पूरा न हो पाया। सेमी फाइनल में चीनी ग्रैंडमास्टर टेन ज्होंगी से हारने के बाद, द्रोनावली के हाथ कांस्य पदक लगा। जब दोनों खिलाड़ी एक मोहरे से चार अंक हासिल करने में कामयाब हो गए, तब विजेता के चुनाव के लिए टाई-ब्रेकर की मदद ली गयी। अरमागेडन (टाई-ब्रेकर) में, सफ़ेद मोहरों से खेलने वाले खिलाड़ी को 5 मिनट दिया जाता है जबकि काले मोहरे वाले खिलाड़ी को चार मिनट। काले मोहरे से खेलने वाला खिलाड़ी अगले राउंड में जाने के लिए खेल को ड्रा कर सकता है।

"अरमागेडन एक अहम पड़ाव था। मैं टॉस जीत नहीं सकी और मेरे विरोधी ने काले मोहरे चुना। मुकाबले में कई उतार चढ़ाव आये। एक समय पर तो मैं जीत के बेहद करीब भी थी। इस बार मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं अपने कांस्य पदक को रजत या स्वर्ण में बदलने की पूरी कोशिश करुँगी," हरिका ने कहा।

"यह मुकाबला उतार चढाव से भरा हुआ था। मैंने सामना किया और जीत हासिल की। मैं पहला रैपिड-फायर गेम बहुत जल्दी जीत गयी और फिर मैं ड्रा के भी बेहद करीब थी। मेरे ख्याल से इसके बाद मेरा लय बिगड़ गया। मुकाबला ड्रा हो सकता था लेकिन मेरे पास समय बहुत कम था और मैं ग़लती कर बैठी और खेल हार गयी।"

भारतीय ग्रांडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने 26 वर्षीय खिलाड़ी की उनके प्रयासों के लिए प्रशंसा की और गुंटूर में जन्मी इस खिलाड़ी से बेहद खुश दिखे।

"वह एक वरिष्ठ खिलाड़ी है और हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। जब उन्होंने मेरे लिए ट्वीट कर मेरी प्रशंसा की तो बहुत ख़ुशी हुई। वह खेल को समझते हैं और किसी भी स्थिति को नियंत्रण में लेना जानते हैं। मैं उनसे मिलकर अपने प्रदर्शन की समीक्षा ज़रूर करुँगी," द्रोनावली ने कहा।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में तीन पदक जीतने के बाद, द्रोनावली ने कहा कि वह FIDE रैंकिंग में अपनी स्थिति मज़बूत करने का प्रयास कर रही है। फ़िलहाल, FIDE की रेटिंग में वह 2539 पर है जो उन्ही के द्वारा नवम्बर 2016 में हासिल किये गए 2543 के शीर्ष रेटिंग से चार अंक कम है।

"मेरा मुख्य लक्ष्य अपने खेल को बेहतर करना है। मैं आने वाली प्रतियोगिताओं में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हूँ," हरिका ने कहा।

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