लोढा समिति के सुझाव क्रिकेट के हित में नहीं: अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

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लोढा समिति के सुझाव क्रिकेट के हित में नहीं: अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट में जमा किये गए अपने हलफनामे में, BCCI के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने, लोढा समिति के सुझावों की जमकर निंदा की है। उन्होंने कहा है कि सुझाव के अनुसार अगर जनमत से चुने गए अधिकारियों को हटाये गए, तो "प्रशासन में बाधाएं आएँगी" और ऐसे सुझाव "क्रिकेट के हित में नहीं" लगते।

"जनमत से चुने गए अधिकारियों को हटाने से क्रिकेट के खेल को कोई लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि इससे तत्काल प्रभाव से प्रशासन में दिक्कतें शुरू हो जाएँगी। इससे खेल जगत की मुसीबतें और भी बढेंगी, बिना किसी दोष के अगर अधिकारीयों को यूँ ही उनके पद से हटा दिया जायेगा तो ICC जैसे अंतर्राष्ट्रीय निकायों में BCCI की छवि ख़राब होगी ... इन अधिकारीयों के अनुपस्थिति BCCI और राज्य संघ सही तरीके से कार्य नहीं कर पाएंगे और यह बिना किसी प्रमुख के संगठन बने रह जायेंगे," Cricbuzz वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार ठाकुर ने अपने हलफनामे में लिखा।

सुप्रीम कोर्ट में जमा किये गए अपने अपने हलफनामे नें, ठाकुर और BCCI के सचिव अजय शिर्के, दोनों ने लोढा समिति के सुझावों के खिलाफ अपनी आपत्ति जताई, खासकर उस सुझाव पर जिसमें BCCI के कार्यवाही के निरीक्षण का कार्यभार पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई को दी जाने की बात कही गयी थी।  

"BCCI की कार्यवाही के निरीक्षण की ज़िम्मेदारी लोढा समिति किसी अन्य ऐसे निकाय को नहीं दे सकता, जिसके पास ना भारतीय क्रिकेट को लेकर कोई अनुभव है और न ही इससे कोई संबंध है। समिति के द्वारा किये गए सुझाव क्रिकेट के हित में नहीं लगते। इससे देश भर का क्रिकेट प्रशासन काफी कमज़ोर हो जायेगा और BCCI भी एक कमज़ोर संगठन बन जायेगा, जिसकी छवि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ख़राब होगी," ठाकुर ने लिखा।    

BCCI प्रमुख ने यह भी कहा कि लोढा समिति के कारण बोर्ड के कई नियमित कार्यों में बाधाएं आ रही है - बोर्ड को इंग्लैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज के आयोजन में दिक्कत हुई और वहीं IPL में चार महीने बाकी होने के बावजूद, BCCI अब तक किसी भी विक्रेता के साथ सौदा नहीं कर पाया है।

"माननीय कोर्ट के आदेशों पर अमल करते हुए, समिति ने अब तक हमें किसी भी प्रकार का निर्देश नहीं दिया है। इससे BCCI के कई कार्यक्रम थम गए हैं, जिससे बोर्ड सही तरीके से काम नहीं कर पा रहा है। इस वजह से भारतीय क्रिकेट के साथ साथ भारतीय क्रिकेट बोर्ड की छवि को काफी नुक्सान हुआ है," ठाकुर ने लिखा।

ठाकुर ने राज्य क्रिकेट संघों को समिति के सुझावों पर अमल करने के लिए राज़ी करने में अपनी असमर्थता भी ज़ाहिर की है। "अध्यक्ष होने के नाते, मैं सदस्यों पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डाल सकता। वह 30 की संख्या में हैं और समिति के सुझावों पर अमल करने पर वह अपना मत रख सकते हैं," उन्होंने कहा।

ठाकुर और शिर्के के हलफनामे की जांच, सुप्रीम कोर्ट की समिति, शुक्रवार को करेगी। 

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