कैसे अश्विन जडेजा का जादू के कारण एक अनोखे कीर्तिमान से चूके!

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© BCCI Media

कैसे अश्विन जडेजा का जादू के कारण एक अनोखे कीर्तिमान से चूके!

रविचंद्रन अश्विन एक अनोखे कीर्तिमान को प्राप्त करने के बहुत ही करीब थे जो खेल के इतिहास में केवल दो खिलाड़ियों ने हासिल किया है - इअन बोथम और रिची बेनौ। परन्तु तभी रविन्द्र जडेजा ने चेन्नई में हुए पांचवें टेस्ट में अपना जादू दिखाया और इंग्लैंड की दूसरी पारी को अकेले ही सात विकेट लेकर समेट दिया।

रविचंद्रन अश्विन इंग्लैंड के विरुद्ध शृंखला में 30 विकेट पूरे करने के लिए केवल दो विकेट की आवश्यकता थी और टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में शृंखला में 30 विकेट लेने और 300 रन बनाने वाले वो केवl तीसरे खिलाड़ी बन जाते। इंग्लैंड के दिग्गज इअन बोथम और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई हरफनमौला खिलाड़ी रिची बेनौड ही ऐसे दो खिलाड़ी है जिन्होनें इस कितिमान को प्राप्त किया है।

परन्तु अश्विन के इस कीर्तिमान को प्राप्त करने की सभी आशाओं पर रविन्द्र जडेजा ने विराम लगा दिया।

वामहस्त गेंदबाज़ ने सात विकेट लेकर भारत को पांचवें टेस्ट के अंतिम दिन जीत दिला दी और अश्विन को 28 विकेट और 306 रन के साथ उस अनोखे कितिमान से वंचित रहना पड़ा। इस सब के बीच हैरानी कि बात यह है कि अश्विन, जो कि निसंदेह रूप से वर्तमान समय के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ हैं, को इस कीर्तिमान से भारतीय पिच पर अपने घरेलू मैदान पर वंचित रहना पड़ा वो भी एक साथी स्पिनर द्वारा।

हालांकि अश्विन बोथम के बाद ऐसे पहले खिलाड़ी ज़रूर बन गए जिसने एक शृंखला में 25 विकेट और 250 रन बनाये, बोथम ने 1985 की एशेज सीरीज में ऐसा किया था। बल्कि ऐसा कारनामा पांच मैचों कि शृंखला में करने वाले अश्विन, दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ी ट्रेवोर गोडर्ड के बाद जिन्होनें 1966-67 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध शृंखला में यह कीर्तिमान हासिल किया था, पहले खिलाड़ी बन गए।

ऐसा कारनामा करने अंतिम भारतीय खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि कपिल देव थे, जिन्होंने 1979-80 में पक्सितन के विरुद्ध घरेलू शृंखला में 32 विकेट लिए थे और 278 रन बनाये थे।

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