राहुल द्रविड़ ने युवा खिलाड़ी की सफलता का श्रेय अनिल कुंबले और विराट कोहली को दिया

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राहुल द्रविड़ ने युवा खिलाड़ी की सफलता का श्रेय अनिल कुंबले और विराट कोहली को दिया

पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने टेस्ट कप्तान विराट कोहली और कोच अनिल कुंबले को युवा खिलाड़ियों के घरेलू से अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बनने के परिवर्तन को आश्वस्त करने का श्रेय दिया। द्रविड़ ने करुण नायर की सफलता पर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की और उनके तिहरे शतक को ‘शानदार’ बताया।

सीनियर टीम के कोच का पद प्रस्तावित किये जाने के बावजूद, राहुल द्रविड़ इसे बार बार अस्वीकार करते रहे हैं, इसके बजाय उन्होंने भारत-A और अंडर-19 को प्रशिक्षित करने का कार्यभार अपनाया। उनके मार्गदर्शन में, भारत के युवा खिलाड़ी मज़बूत हुए हैं और घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के बीच का अंतर घटता रहा है।

लेकिन द्रविड़, अपनी नम्रता को बरक़रार रखते हुए इस कार्य का श्रेय कोच अनिल कुंबले और कप्तान विराट कोहली को दिया है।

bcci.tv को दिये गए इंटरव्यू में द्रविड़ ने कहा, “A टीम से बेहतरीन खिलाड़ियों को घरेलू प्रदर्शनों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करते हुए देखना बेहद ख़ास है। मेरे ख्याल से राष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह का माहौल बनाया गया है, उससे उन्हें प्रदर्शन करने में मदद मिल रही है। इसके लिए विराट और अनिल को श्रेय दिया जाना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर परिस्थितियों को अनुकूल बनाने का कार्य उनका है। इसीलिए नतीजे इतने अच्छे हो रहे हैं, और इन सबका हिस्सा बनना ख़ास है।”

द्रविड़ ने करुण नायर की सफलता पर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की। अपने कार्यकाल की तीसरी पारी में एक ज़ोरदार तिहरा शतक लगाने वाले नायर, राजस्थान रॉयल्स में रहते हुए ही राहुल द्रविड़ के प्रशिक्षण में रहे थे और उन्होंने A टीम और दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ रहते हुए भी राहुल के साथ काम किया है।

यह बहुत ही शानदार है। अपने कार्यकल का पहला (टेस्ट) शतक लगाना और फिर उसे तिहरे शतक में बदलना वाकई कमाल है। मेरे ख्याल से इससे ना सिर्फ उनकी सक्षमता का पता चलता है बल्कि यह उनकी महत्वाकांक्षाओं की भी परिभाषा है। यह बहुत अहम है। अच्छी बात है, मैं भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद खुश हूँ और टीम में युवा और अच्छे खिलाड़ियों को शामिल होते हुए देखना हमेशा ही ख़ास रहा है। उम्मीद है, इसके आगे भी सब अच्छा ही होगा। उनमें कुशलता है।

 “करुण, राहुल और जयंत जैसे युवा खिलाड़ियों को इस दौरे से उभरते हुए देखना अच्छा रहा। हार्दिक पंड्या को भी A दौरे में अवसर मिला था लेकिन चोटिल होने के कारण वह खेल नहीं सके,” दिग्गज खिलाड़ी ने कहा।

द्रविड़ ने कहा कि A अथवा U-19 के मुकाबलों पर नतीजों से अधिक तवज्जो प्रक्रिया को दी जाती है, और उनके भारतीय टीम के कप्तान होने के समय से यही तरीका चला आ रहा है।

“हम हमेशा राष्ट्रीय टीम से संपर्क करते रहते हैं, ताकि उनकी ज़रूरतों का पता लग सके। और हम खिलाड़ियों को अवसर देने की कोशिश करते रहते हैं। अगर वे हरफनमौला खिलाड़ियों को ढूंढ रहे होते हैं, तो हम जूनियर लेवल पर अधिक से अधिक हरफनमौला खिलाड़ियों को खिलाते हैं ताकि बेहतरीन खिलाड़ी उत्पन्न हो सके।”

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि U-19 या A टीम की अहमियत नतीजे होते हैं। हाँ, नतीजे अच्छे होने पर हमारी नज़र होती है, लेकिन ज्यादा तवज्जो सीखने को दी जाती है। कोचिंग में सिर्फ उन्हें खिलाड़ी बनाना नहीं शामिल होता है बल्कि उनके एक ऐसे खिलाड़ी बनाना शामिल होता है जो राष्ट्रीय टीम को अपना योगदान दे सके।”

 “शायद कोई, जो U-19 स्तर पर अच्छा नहीं है, वह भारत का प्रतिनिधित्व कर बेहतरीन खिलाड़ी बन जाए। सीधे शब्दों में, U-19 और A दौरे राष्ट्रीय टीम तक पहुँचने का एक जरिया है।”

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