BCCI को DRS के प्रयोग के लिए राज़ी करने में कुंबले का बड़ा योगदान, ICC ने किया खुलासा

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BCCI को DRS के प्रयोग के लिए राज़ी करने में कुंबले का बड़ा योगदान, ICC ने किया खुलासा

ICC के क्रिकेट मामलों के महाप्रबंधक ज्योफ्फ अल्लरडाइस ने खुलासा किया है कि इंग्लैंड के विरूद्ध आगामी शृंखला में BCCI को DRS के प्रयोग के लिए राज़ी करने में भारतीय कोच अनिल कुंबले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अल्लरडाइस DRS में हुए सुधारों पर भी जोर दिया जो BCCI के विरोध के बाद हुए हैं।

“ मैं जानता हूँ कि वो (अनिल कुंबले) प्री-कमेटी के मेरे ख्याल से 4 वर्ष से सदस्य रहें हैं और एक चीज़ जो वो, अध्यक्ष बनाए के बाद, करने के लिए उत्साहित थे वो था कि जो भी तकनीक DRS में प्रयोग की जा रही है उसका स्वतंत्र रूप से आंकलन हो और उन्होंने उस परियोजना को काफी हद तक खुद ही चलाया है और उसे इस स्तर तक पहुँचाने में काफी समय लग गया जहाँ पर हमें परीक्षण आदि के परिणाम मिले।”

“ परन्तु उन्होंने (कुंबले) इस परियोजना में काफी सहयोग किया है।वो पिछले वर्ष मई में हुई प्री-कमेटी की बैठक का भी हिस्सा थे जिसमें अधिकतर परीक्षणों के परिणाम प्रस्तुत किये गए थे। वो प्री-कमेटी की स्थिति से अवगत थे जो की यह चाहती थी कि तकनीक का अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में अधिक प्रयोग हो।”

“ तथ्य यह है कि बाद में उन्हें भारतीय टीम का कोच बना दिया गया; ज़ाहिर तौर पर उनके पास कोच बनाने के बाद भी वो पृष्ठभूमि है। उनकी भूमिका इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण जो हमने तकनीक के आंकलन के साथ अपनाई है, स्वीकृति की प्रक्रिया और नयी तकनीक आदि। उन्होंने इसके लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया है,” PTI के अनुसार अल्लरडाइस ने एक साक्षात्कार में कहा।

BCCI और महेंद्र सिंह धोनी ने खुले तौर पर DRS का विरोध किया जिनके अनुसार बॉल-ट्रैकिंग प्रणाली विश्वसनीय नहीं है। हालांकि, अल्लरडाइस ने इस बात का भरोसा दिलाया है DRS में उस समय के बाद से काफी सुधार हुआ है।

“ मेरे ख्याल से यह एक अच्छा मौका था BCCI से DRS में हुए सुधारो के बारे में बात करने का और कैसे इन सुधारों ने उनके कई प्रश्नों के उत्तर दे दिए जो तकनीक को लेकर उन्होंने उठाये थे , ख़ासकर बॉल-ट्रैकिंग के क्षेत्र में।”

“ दो चीज़ें आपने देखी होंगी, एक तो कैमरा में अधिक फ्रेम रेट का प्रयोग, जिससे कि ज़ाहिर तौर पर हमें और सूचना मिलेगी गेंद के पथ का अनुमान लगाने के लिए और सटीक परिणाम देने के लिए, और गेंद के टकराने के स्थान के लिए अल्ट्रा-एज का प्रयोग या ध्वनि-आधारित प्रणाली का उपयोग गेंद के टकराने के सही फ्रेम का अनुमान लगाने के लिए।”

“वो ही दो बदलाव हैं जिन में पिछले कुछ वर्षों काफी सुधार हुआ है जिस से निश्चित तौर पर बॉल-ट्रैकिंग में सुधार होगा जिस पर कुछ वर्ष पहले BCCI ने जिस पर आपत्ति उठाई थी,” उन्होंने कहा।

अल्लरडाइस ने सभी शृंखलाओं में तकनीक के अधिक प्रयोग पर जोर दिया है। उन्होंने कहा,” मेरे ख्याल से जब में  ‘तकनीक के अधिक प्रयोग’ के बारे में बोलता हूँ तो मेरा मानना है कि हर मुकाबले में एक ही तकनीक का प्रयोग हो न कि एक ही प्रदाता का। क्योंकि तकनीक की बहुत सी खूबियों से एक खूबी यह भी है कि इसमें हमेशा कुछ ना कुछ सुधार होता रहता है, जितने अधिक लोग इसमें शामिल होंगे उतने ही अधिक विचार आयेंगे जो तकनीक को बेहतर बनायेंगे।”

हालांकि, उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि DRS को लागू करवाना ICC के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

“ इसमें DRS प्रणाली में जोड़ने के लिए काफी कुछ है, परन्तु अभी भी हर मैच के लिए इसे उपलब्ध करवाने में कुछ चुनौतियाँ हैं। परन्तु यह वो चीज़ है जिस पर हम थोडा और सोचना चाहेंगे और प्रदाता से इस बारे में चर्चा करेंगे। बॉल-ट्रैकिंग DRS में अभी एक मानक है और उसमें हम अभी कोई बदलाव होता नहीं देख रहे हैं,” उन्होंने कहा।

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