इरफ़ान पठान करना चाहते हैं भारतीय टीम में 'वापसी'

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इरफ़ान पठान करना चाहते हैं भारतीय टीम में 'वापसी'

इरफ़ान पठान ने यह खुलासा किया है कि वह भारत के राष्ट्रीय टीम में वापसी करने को लेकर अब भी सकारात्मक सोच रखते हैं और उनका मानना है कि कुछ चोटों की वजह से उनका सफ़र ख़त्म नहीं हो सकता। टीम में वापसी करने की उम्मीद जताते हुए भारत के तेज़ गेंदबाज़ ने कहा कि उनकी लिए उम्र महज़ एक संख्या है।

2000 के दशक के शुरुआती दौर में, जब भारत एक सटीक तेज़ गेंदबाज़ और हरफनमौला खिलाड़ी की तलाश में था, तब एक हैरतंगेज़ खिलाड़ी के तौर पर इरफ़ान पठान सामने आए और अपने सटीक स्विंग के साथ भारतीय प्रसंशकों की मंत्रमुग्ध कर दिया। अपनी कुशलता को बढ़ाते हुए, वह एक ऐसे बल्लेबाज़ बनकर उभरे जो अधिकतर समय में, टीम को मुश्किल हालातों से सुरक्षित स्थिति में लाने का काम करता था। हालांकि पठान का कार्यकाल तब धीमा हो गया जब चोटों में उलझे इस खिलाड़ी को नेट्स के बजाय चिकित्सा में ज्यादा वक़्त बिताना पड़ा।    

इतना सब कुछ होने के बाद, इरफ़ान अब भी अपने जीवन में धीरज के साथ आगे बढ़ रहे हैं। द हिन्दू के साथ हुई एक एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने कहा,"मैं अपने सफ़र के उस पड़ाव पर हूँ जहाँ मैं क्रिकेट का आनंद लेना चाहता हूँ। मैं इस खेल में अपना ज्यादा योगदान देना चाहता हूँ, अपने ज्ञान युवा खिलाड़ियों में बांटना चाहता हूँ। मैं एक आज़ाद मस्तिष्क के साथ खेलना चाहता हूँ जो आपको तभी मिलता जब आप खुद पर कोई दबाव नहीं देते।"

वायरल फीवर से पीड़ित होने के कारण, इरफ़ान को तमिल नाडू के खिलाफ बरोदा के रणजी ट्राफी मुकाबले से नदारद रहना पड़ा। लेकिन, उन्होंने कहा कि वह फिट रहने के लिए, अब पहले से अधिक प्रशिक्षण कर रहे हैं।  

"पहले मैं वज़न उठाया करता था। अब मैं अधिक दौड़ रहा हूँ। मैं लगातार 2 किमी दौड़ता हूँ और उन दौड़ों का हिसाब रखता हूँ। मैं खुद को हल्का महसूस करता हूँ और मुझे अच्छा लगता है," भारत के पूर्व हरफनमौला खिलाड़ी ने कहा।

उन्होंने कहा,"मैं सेकर सर के साथ लगातार संपर्क में हूँ। हम शरीर के करीब से गेंद को उठाने पर ध्यान दे रहे हैं। इस तरह से एक सरल रिलीज़ के साथ मैं गेंद को स्विंग करवा पाउँगा।"

ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाजों का उदाहरण देते हुए, इरफ़ान ने कहा कि किसी गेंदबाज़ को चोटों के कारण खेल से हटाया नहीं जाना चाहिए।"

"चोट तो लगती ही हैं, खासकर जब आप तेज़ गेंदबाज़ होते हैं। लेकिन, संवेदनशीलता के साथ, आपका ध्यान रखना ज़रूरी होता है। आपको भुलाया नहीं जाना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया को देखिए। उनके तेज़ गेंदबाज़ चोटिल होते हैं लेकिन वे वापसी करते रहते हैं।"

भारतीय टीम में अपनी वापसी को लेकर बात करते हुए इरफ़ान ने कहा कि उन्होंने अब भी उम्मीद नहीं छोड़ी है। "उम्र तो महज़ एक संख्या है।"

इस खेल से मिली सीख के बारे में बात करते हुए, बरोदा के 31 साल के हरफनमौला ने कहा,"क्रिकेट ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। मैं दुनिया भर में घूमा हूँ, कई संकृतियाँ देखि हैं और अंगेजी बोलना सीखा है जिससे मुझे बात करने में आसानी होती है। इन सबसे अधिक, इस खेल में आगे बढ़ते हुए मुझे कई भावनाएं देखने को मिली हैं, आपको इन सबके बावजूद दृढ़ रहना पड़ता है।" 

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