BCCI द्वारा अंपायरों पर कप्तान की समीक्षा को बंद करने का निर्णय

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BCCI द्वारा अंपायरों पर कप्तान की समीक्षा को बंद करने का निर्णय

भारतीय अंपायरों की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए, BCCI ने हर मैच के बाद कप्तानों द्वारा अंपायर की रिपोर्ट को बंद करने का निर्णय लिया है। BCCI ने DRS समीक्षण के लिए निष्पक्ष अंपायरों के चलन की शुरुआत भी की है जिससे की भारतीय अंपायर मैचों में आने वाली जटिल परिस्थितयों के बारे में सीख सके।

पिछले कुछ सालों में, भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI), इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के सामने अंपायरों का सुझाव रखने और उनके कार्य की समीक्षण के लिए, हर मैच के बाद टीम के कप्तानों से अंपायरों की रिपोर्ट लेता था। लेकिन, अब तक यह फीडबैक प्रणाली बोर्ड के लिए उतना मददगार साबित नहीं हुआ, क्योंकि इससे कप्तान की रिपोर्ट पक्षधर होंती थी और अंपायरों के फैसलों को लेकर शिकायतें बन जाती थी। सोमवार को, BCCI ने कप्तान की रिपोर्ट लेने की प्रणाली को बंद कर मैच रेफ़री को यह कार्य सौंपने का फैसला किया है।   

"मैच रेफ़री तीसरे अंपायर के तौर पर भी काम करता है। अतः वह विडियो समीक्षण के साथ एक सही और निष्पक्ष रिपोर्ट देने में समर्थ रहेंगे। यह कदम रिपोर्ट में से भावुकता को अलग रखने के लिए उठाया गया है। कप्तानों की रिपोर्ट में पक्षपात होता था और अंपायर के खिलाफ उसमें उनका गुस्सा झलकता था। इस मामले में, रेफ़री बिलकुल निष्पक्ष होगा," BCCI के वरिष्ठ अधिकारी ने TOI से कहा।

"(लेकिन) कप्तान द्वारा दी गयी रिपोर्ट मददगार नहीं होती थी। वह बेहद गैर-जिम्मेदाराना तरीके से लिखे होते थे। कप्तान न तो सकारात्मकता पर बात करते थे और ना ही अंपायर की किसी ठोस गलती का उल्लेख करते थे इसीलिए वे कोई काम की नहीं होती थी। देखा तो यह भी गया है कि कभी कभी कप्तान के बजे, कोई और, जैसे की टीम प्रबंधक या कोई और स्टाफ इस रिपोर्ट को दर्ज करता था," अधिकारी ने कहा।

इंग्लैंड के साथ चल रही इस सीरीज में BCCI द्वारा डिसिशन रिव्यु सिस्टम को अमल करने के बाद, भारत में हुए बाकी के द्वादेशीय टेस्ट शृंखला से अलग, इस बार तीसरा अंपायर किसी निष्पक्ष व्यक्ति को बनाया जाएगा।

इस निर्णय पर बात करते हुए अधिकारी ने कहं "यह ICC का निर्देश है कि अगर DRS का इस्तेमाल किया जा रहे हैं तो कोई निष्पक्ष अंपायर को नियुक्त किया जाये। वैसे भी, घरेलू क्रिकेट से हमारे पास कुछ ही ऐसे कनिष्ट अंपायर बचेंगे जिन्हें चौथा अंपायर बनाया जा सके। उन्हें इस बात का अनुभव हो जायेगा की DRS के रहते हुए अंपायरों को मैदान में और मैदान से बाहर कैसे काम करना पड़ता है।"

BCCI इस बात के लिए बेसब्र है कि उसके अंपायर जल्द से जल्द प्रणाली के साथ काम करने में कुशल हो जाएँ क्यों ICC के इलीट पैनल में सिर्फ एक ही भारतीय अंपायर, एस. रवि, पहुँच पायें हैं। बोर्ड को उम्मीद है कि अनुभवी अधिकारीयों के साथ अंपायर मैचों में आये विभिन्न परिस्थितियों के बारे में जान पाएंगे।

"भारतीय अंपायरों को यह समझना होगा कि अगर DRS का इस्तेमाल हो रहा है तो वे असावधान नहीं हो सकते और इस प्रणाली का इस्तेमाल वे किस हद तक कर सकते हैं। उन्हें किसी ऐसे के संस्पर्श में आना होगा जो अभी इसका इस्तेमाल कर रहा है," सूत्रों ने कहा। 

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