किसी निर्णय को बदलने के लिए तीसरे अंपायर को देना चाहिए दखल: तेंदुलकर

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किसी निर्णय को बदलने के लिए तीसरे अंपायर को देना चाहिए दखल: तेंदुलकर

क्रिकेट जगत के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने BCCI के, एक लम्बे वक़्त तक विरोध करने के बाद, डिसिशन रिव्यु सिस्टम (DRS) को अपनाने के कदम की सराहना की है। हालांकि, तेंदुलकर ने सुझाव दिया है कि किसी खिलाड़ी के बजाय, मैदान में मौजूद अंपायर के निर्णय को बदलने को कहने का अधिकार तीसरे अंपायर को मिलना चाहिए।

क लम्बे वक़्त तक विरोध करने के बाद, BCCI ने आखिरकार DRS के प्रति अपना रवैय्या नरम किया है और इंग्लैंड के विरुद्ध चल रही सीरीज में, इसे अमल भी कर लिया है। यह कदम कोच अनिल कुंबले और टेस्ट कप्तान विराट कोहली द्वारा एक लम्बे वक़्त से किये गए समीक्षण और सुझावों के बाद लिया गया है।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, सचिन तेंदुलकर ने बोर्ड के इस कदम की सराहना की है और कहा है, "अगर BCCI ने ठीक से अध्ययन किया है और वे इससे (DRS में लाये गए बदलावों से) सहमत है, तो क्यों नहीं, मेरे ख्याल से यह एक सकारात्मक कदम है।"

उन्होंने कहा, "ज़रुरत है कि विश्व में हर जगह एक समानता आये ... क्योंकि मैंने देखा है कि - विश्व के एक हिस्से में जहाँ स्नीकोमीटर का इस्तेमाल होता है वहीं दूसरे हिस्से में हॉटस्पॉट है।

"कोई समानता नहीं है। जब आप टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं, तो कुछ चीज़ें हैं जिन्हें विश्व में हर जगह मानक बनाना होगा और चूंकि अब DRS वाकई क्रिकेट के नियम का इतना अहम हिस्सा बन चुका है, तो इसे विश्व में सभी जगह इस्तेमाल किया जाना चाहिए।"

"अतः आप जो भी मैच खेल रहे हैं, आपको यह नहीं पूछना होगा कि यहाँ क्या उपलब्ध है, स्नीकोमीटर या हॉट स्पॉट? इस मामले में समानता आनी चाहिए।"

क्रिकेट को और दिलचस्प बनाने के लिए 14-सदस्यों का स्कूल क्रिकेट, दो पारियों वाले एक दिवसीय मैच जैसे और भी कई सुझाव देने वाले तेंदुलकर ने अपने नए सुझाव में, मैदान में मौजूद अंपायर के निर्णय को पलटने का अधिकार तीसरे अंपायर के हाथ में देने के लिए कहा है।

राजकोट में हुए पहले टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा के आउट का उदहारण देते हुए सचिन ने कहा, "देखिये, राजकोट टेस्ट में (चेतेश्वर) पुजारा के आउट के निर्णय पर सवाल उठाये गए ... अलग बल्लेबाज़ अंपायर के आउट देने के बाद कुछ न भी बोले, तो मेरे ख्याल से यह सही रहेगा अगर तीसरा अंपायर इस निर्णय में दखल देकर सही बात बताये क्योंकि DRS इस्तेमाल करने का असली मकसद निर्णयों को सही बनाना है। पुजारा ने आउट होने के बाद रिव्यु की मांग नहीं की थी, जबकि रीप्ले में यह देखा गया कि गेंद लेग-स्टंप्स के बाहर थी।

"और (जितना हो सके) इनको सही निर्णय लेने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। जब निर्णयों को सही करने के उपाय हैं तो सभी तीनों अंपायरों को - मैदान में मौजूद अंपायर और तीसरे अंपायर - इन्हें टीम की तरह काम करना चाहिए। इस सिस्टम को फैसलों में समानता लाने के लिए लाया गया था और अगर हमें वो मिल सके तो हमारा मकसद पूरा हो जायेगा," उन्होंने कहा।

चूंकि कुंबले, गांगुली और तेंदुलकर जैसे खिलाड़ियों ने DRS का समर्थन किया है, तो अब BCCI को इसे स्थायी रूप से अमल करने में देर नहीं करनी चाहिए।

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