कप्तानी ने बनाया है मुझे और भी ज़िम्मेदार : विराट कोहली

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कप्तानी ने बनाया है मुझे और भी ज़िम्मेदार : विराट कोहली

विराट कोहली मानते हैं की कप्तानी के कारण वह अधिक ज़िम्मेदार बल्लेबाज़ बन गए हैं और वह अगले दो सालों तक इस ज़िम्मेदारी को उठाना चाहेंगे। पांच टेस्ट मुकाबलों की सीरीज के विशाखापत्तनम में हुए दूसरे टेस्ट में कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को 246 रनों से हराकर श्रृंखला में 1-0 की बढ़त हासिल की।

प्तान के तौर पर 19 टेस्ट खेलकर कोहली ने 59.76 के औसत से 1793 रन बनाये हैं जिनमें उनके कुल 14 टेस्ट शतकों में आधे शतक उन्होंने इसी दौरान लगाया है। 28 वर्षीय ने अब तक खेले गए कुल 50 टेस्ट में 48.03 के औसत से 3891 रन बनाये हैं।

"आप जब बल्लेबाजी करने जाते हैं तो यह भूल जाना आसान नहीं है, कि आप एक कप्तान भी हैं, खासकर तब जब आप टीम में मौजूद पांच बल्लेबाजों में से एक हैं," कोहली ने, सोमवार को दूसरे टेस्ट के समाप्त होने के बाद न्यूज़ कांफ्रेंस में कहा।

"आपकी ज़िम्मेदारी यकीनन बढ़ जाती है। लेकिन इसकी वजह से मुझे हवे में गेंद को उड़ाने का मौका नहीं मिलता, जो मैं आम तौर पर टेस्ट क्रिकेट में करना पसंद करता हूँ। क्योंकि अब मैं अधिक वक़्त विकेट पर टिके रहना चाहता हूँ, आप जितनी देर वहां टिके रहेंगे चीज़ें उतनी ही आसान होंगी। अब टेस्ट क्रिकेट में मेरा लक्ष्य क्रीज़ पर बने रहने का होता है," कोहली ने कहा, जो मर्यादित ओवरों के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय टीम के उपकप्तान भी हैं।

"दूसरे प्रारूपों में, दिम्मागी रूप से तैयार हो जाना आसान है, क्योंकि आप सिर्फ बल्लेबाजी के बारे में सोचते हैं। यकीनन आपको फील्ड पर रहते हुए अपना मत और राय भी देना होता हैं, लेकिन निर्णय लेने का भार आप पर नहीं होता, आप बस सुझाव देते हैं।

"हर चीज़ पर ध्यान बनाये रखने के साथ बल्लेबाजी करना, आसान नहीं होता लेकिन अब मुझे इसकी आदत पड़ने लगी है। शायद तीन-चार सालों में, मैं यह समझने लगूंगा की मुझपर कितना भार है लेकिन इस वक़्त सब ठीक ठाक है इसीलिए मैं भी स्थिति से संतुष्ट हूँ।"

विशाखापत्तनम का टेस्ट कोहली के कार्यकाल का 50 वा टेस्ट था और दिल्ली के बल्लेबाज़ ने 81 गेंदों पर 167 रन की शानदार पारी खेल इसे यादगार बना दिया। चौथी पारी में इंग्लैंड के द्वारा अपनाए गए बचाव के रवैय्ये से वह काफी हैरान नज़र आएं।

"अगर सिर्फ आपकी नियत है तो ही आप किसी गेंद पर अपने हिसाब से शॉट लगा पाएंगे, क्योंकि आप अपने बल्ले के साथ कुछ कमाल करना चाहेंगे। अगर आपकी इच्छा नहीं है और आप गेंद पर नियंत्रण पाना चाहते, और ऐसे में अगर ज़रा भी घुमावदार गेंद आये तो आप अपना नियंत्रण खो देंगे। ऐसे में आपके तैयार होने से पहले ही बल्ले के किनारे से गेंद लग कर हवा में उड़ जाती है।

"अगर आप रन बनाना चाहते हैं, तो आप अच्छे से बचाव करते हैं क्योंकि आपका दिमाग गेंद की तरफ भी लगा होता है। यही हमारी योजना थी, जब पिच बल्लेबाजी के अनुकूल हो जाए तो उद्देश्य निर्धारित कर रन बटोरते रहना, और इसे उस हद तक लेकर जाना जिससे विरोधी टीम को उन 30-40 रनों की अहमियत समझ आ जाये।

"मूल बात यह है कि इमानदार रहना पड़ता है और अगर चौथी पारी में आपका उद्देश्य कुछ करने का नहीं है, तो खेल पाना आसान नहीं होता।"

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