कोहली ने किया भारत में क्रिकेटर के जीवन का वर्णन; सचिन तेंदुलकर के साथ अपनी तुलना पर भी दिया बयान

no photo
 |

© Getty Images

कोहली ने किया भारत में क्रिकेटर के जीवन का वर्णन; सचिन तेंदुलकर के साथ अपनी तुलना पर भी दिया बयान

विराट कोहली ने यह माना है कि वह अब 'सुपरमैन' का खिताब से काफी संतुष्ट हैं हालांकि इसकी आदत पड़ने में उन्हें थोड़ा वक़्त लगा। माइकल वॉगन से हुई बात चीत में, कोहली ने सचिन तेंदुलकर से उनकी तुलना पर भी बात की है साथ ही और उनके कार्यकाल में तेंदुलकर के योगदान की व्याख्या भी की है।

"यह भारतीय क्रिकेट जगत का एक हिस्सा है। यह लोगों का अपना प्यार जताने का एक तरीका है। अगर आप इससे दूर भागेंगे तो यह आपके पीछे पड़ जायेगा, आप पर दबाव डालेगा और आपको पीछे खींचेगा," कोहली ने वॉगन को टेलीग्राफ के लिए दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान, भारत में क्रिकेट की जुनूनियत के बारे में कहा।

"मैंने इसकी आदत डाल ली है। कुछ वक़्त के बाद मैंने सोचा यह लोग मुझे पसंद करते हैं, वे चाहते हैं कि मैं अच्छा खेलूँ। बात सिर्फ यही है कि इनका यह जताने का तरीका अलग है। मुझे इस बार को अपने दिमाग में डालना होगा। यह ज़रूरी है कि आप कुछ ही लोगों के साथ नियमित रूप संपर्क में रहे और सभी से दोस्ती और सभी से खुलकर न बात करें।

"मैं समझता हूँ कि 10-12 साल के बाद यह सब चला जायेगा। और मेरी जगह किसी और खिलाड़ी को इन सब से गुज़ारना होगा। तो वह कैसे इन सारी चीज़ों से गुजरेगा और मैं 12 साल आगे देखना पसंद करता हूँ नाकि मौजूदा स्थिति की वजह से बहकना," उन्होंने कहा।

सडकों पर प्रशंसकों से घिर जाना भारतीय क्रिकेटरों के लिए आम बात है, खासकर उनके लिए जिन्हें क्रिकेट का भगवान माना जाता है और एक आम इंसान के लिए ये सारी चीज़ें आसान नहीं होंगी। कहीं जाकर खाना भी एक मेहनत का काम लगने लगता है, कोहली ने बयां किया।

"बहुत योजना बनानी पड़ती है। डिनर के लिए भी जाओ तो आपको गाड़ी में पुलिस सुरक्षा कर्मी को साथ लेकर चलना पड़ता है और फिर रेस्टोरेंट वालों से कहना पड़ता है कि वे आपका टेबल एक कोने में लगाये जिसके आस पास ज्यादा लोग न हो। इस देश में प्रशंसक आपको पकड़ना चाहते हैं, छूना चाहते हैं महसूस करना चाहते हैं ताकि वह यह यकीन कर सके कि आप सच में उनके सामने खड़े हैं। मैं सच कह रहा हूँ।

 © Getty Images

"मुझे याद है इस साल मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुए वर्ल्ड टी20 मैच के बाद की बात है। मुझे अहसास हुआ कि कुछ लोग मेरे प्रति एक अलग किस्म का व्यवहार कर रहे थे, वो मेरी तरफ ऐसे देख रहे थे जैसे मैंने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो।

"मैं एअरपोर्ट में सुरक्षा जांच से बाहर निकला और एक लड़का मेरे पास आया। मैंने सुरक्षा कर्मियों से शांत रहने को कहा। वह लड़का मेरे बगल में खड़ा हुआ और उसने कहा 'मुझे अपने हाथ दिखाइए'। मैंने ऐसा ही किया और फिर उसने उन्हें छूआ और ऐसा बरताव किया जैसे उसकी बदन में बिजली दौड़ गयी हो। मुझे कुछ समझ नहीं आया। मुझे बहुत अजीब सा लगा। मैंने सोचा कि क्या मैंने कोई सुपरहीरो हूँ?" कोहली ने इंटरव्यू के दौरान कहा।

भारतीय टेस्ट कप्तान के लिए हमेशा ही सफ़र आसान नहीं रहा है। अपने कार्यकाल के शुरुआत में, उन्हें इनकंसिस्टेंसी और कुछ बुरे विदेशी दौरों से जूझना पड़ा है जिसने उन्हें फिर से शुरुआत में खड़ा कर दिया था। 2014 के इंग्लैंड दौरे पर कोहली का औसत सिर्फ 13.40 का था और वापस आने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण लेना शुरू किया और सही तकनीक सीखने के लिए तेंदुलकर की सहायता ली।

"मैं वापस आया (इंग्लैंड से) और 10 दिन के लिए मुंबई चला गया। मैंने उनसे (सचिन से) बात की। उन्होंने मेरे साथ वक़्त बिताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने इंग्लैंड में मेरा प्रदर्शन देखा है और फिर कुछ तकनीकों पर उन्होंने मेरी मदद की जो इस स्तर पर आकर एक अच्छे प्रदर्शन के लिए अहमियत रखती थी। इनमें गेंद को मारने के पीछे एक उद्देश्य तय करने और क्रीज़ पर रहते हुए अनिश्चित न रहने जैसी सलाह शामिल थी।

"मैंने कभी फॉरवर्ड प्रेस नहीं किया था लेकिन उन्होंने मुझे बताया कि जैसे स्पिनर के सामने बचाव करना पड़ता है वैसे ही तेज़ गेंदबाज़ हो तो फॉरवर्ड करना ज़रूरी होता है। उसी विश्वास के साथ ऐसा करना चाहिए और इसी तरह से एक तेज़ गेंद पर नियंत्रण पाकर उसे मारा जा सकता है या छोड़ा जा सकता है।

"हमने उस दौरान काफी बातचीत की। वह वक़्त मेरे लिए काफी अहमियत रखता है। फिर मैंने उनसे तैय्यारियों के बारे में पूछा। मैंने कहा टेस्ट क्रिकेट में मैं कईयों को नेट्स पर प्रैक्टिस करते हुए देखता हूँ, वे मैच से पहले 200-300 मारने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि यह ज़रूरी है कि आप मानसिक रूप से शांत रहें। अगर आप गेंद को मारना नहीं चाहते तो मत मारिए। दूसरों को लम्बे लम्बे नेट सेशन करते हुए देखने की ज़रुरत नहीं है, आप अलग हो जाईये, और अपने दिमाग को आराम दीजिये। इससे आपको काफी मदद मिलेगी," कोहली ने अपने बल्लेबाजी पर सचिन के प्रभाव के बारे में कहा।

कोहली की माने तो अब उन्हें सुकून सिर्फ तभी मिलता है जब वह विदेश का दौरा करने जाते हैं क्योंकि वहां वह अपनी ज़िन्दगी का आनंद उठा पाते हैं। "जब मैं भारत से बाहर आता हूँ, तो मैं अकेले एक घंटे के लिए टहलने चला जाता हूँ। आप क्रिकेट खेलने वाले देशों में पहचाने तो जाते हैं लेकिन लोग आपको पहचानकर भी सिर्फ हाथ हिलाएंगे। यह अच्छा लगता है। अच्छा लगता है जब कोई आपको बेवजह परेशान नहीं करता।

"भारत में इस बात पर कोई नियंत्रण नहीं होता। इसीलिए जब आप ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण अफ्रीका में खेलने जाते हैं, तो मैं आम तौर पर किसी को साथ लेकर नहीं जाता। मैं बस आस पास घूमता हूँ और सडकों पर टहलता रहता हूँ। बहुत अच्छा लगता है। इसका मज़ा ही कुछ और है। मैं गाने सुनता हूँ, टहलता हूँ लेकिन कहीं रुकता नहीं। इस दुनिया में सबसे अच्छी बात है अपने साथ समय बिताना," उन्होंने वॉगन को टेलीग्राफ के लिए दिए गए इंटरव्यू में कहा।

 © Getty Images

‘मास्टर ब्लास्टर’ को खेलते देखकर बड़े हुए हैं, अब उनकी तुलना उस खिलाड़ी से होती है, जो इस खेल का दिग्गज है। कोहली ने कहा अब वो खुद ही अपने लिए बेंचमार्क स्थापित कर लेते हैं और इसकी वजह से उन्हें करियर में शानदार सफलता मिल रही है। 

‘‘मैंने लड़ने की कोशिश की है। इस देश में तुलना पसंद की जाती है। जब भी मैं अच्छा प्रदर्शन करना शुरू कर देता हूं, उनके साथ मेरी तुलना शुरू हो चुकी होती है। लोग आते हैं और इस बात पर चर्चा करते हैं कि मैं उनके रिकाॅर्ड तोड़ सकता हूं। आपको उस पल खुद से लड़ना पड़ता है। आपको मैं ही क्यों नजर आता हूं? टीम में 10 खिलाड़ी और हैं लेकिन मुझे ही ये सब क्यों झेलना पड़ता है।’’

विराट ने कहा, ‘‘बहुत कुछ ऐसा है जो फैन्स आपसे करवाना चाहते हैं। मैं बाउंड्री पर खड़ा होता हूं तो वो सब मुझे कहते हैं कि मैं शतक बनाउं। लेकिन तब मुझे एहसास होता है कि कुछ समय पहले आपने अपने लिए बेंचमार्क और स्टैंडर्ड तय किए थे।’’

जब ये खिलाड़ी भारतीय टीम में शामिल हुआ था तब इसमें वो आक्रमकता थी लेकिन दूसरे खिलाड़ियों में उसकी कमी थी। जैसे-जैसे वक्त बिता वो शांत होता गया और अब उसे एहसास हो गया है कि मील का पत्थर हासिल करने के बाद उसे ऐसा व्यवहार करने की जरूरत नहीं है। 

भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान ने कहा, ‘‘मैं भावनाओं को व्यक्त करने वाला व्यक्ति हूं। जब चीजें नियंत्रण में नहीं होती है तब मैं बौखला जाता हूं। ये एक ऐसी चीज है जिस पर मैं काम करना चाहता हूं।’’

टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘‘मैंने शतक या अर्धशतक बनाने के बाद जश्न मनाना कम कर दिया है। मुझे लगता है कि मुझसे यही करने की उम्मीद तो की गई थी फिर इतना उत्साह क्यों? इसी लिए तो मुझे टीम में रखा गया है।’’

इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज में 1-0 से मिली बढ़त के बाद उन्होंने कहा, ‘‘राजकोट का मुकाबला टीम के लिए अच्छा था। हमें चुनौती मिली। हम जानते हैं कि इंग्लैंड की टीम अपना फाॅर्म दिखाएगी और पहला टेस्ट हमें सावधान करने के लिए था। ये अच्छा है कि सीरीज के शुरूआत में ही हमें इसका अंदाजा हो गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम इंग्लैंड के खिलाफ किसी भी स्तर पर हल्का क्रिकेट नहीं खेल सकते हैं और मौका मिलने पर हम चीजों को मजबूत भी करेंगे। हमने दूसरे मुकाबले में ऐसा ही किया। हमने उसका फायदा उठाया और वो नतीजा मिला जो हम चाहते थे।’’

तीसरा टेस्ट मोहाली में 26 नवंबर से शुरू होगा।

Ravi Rampaul or Shane Shillingford? Who will take more wickets?

Presenting Nostragamus, the first ever prediction game that covers all sports, including Cricket. Play the CPL T20 challenge and win cash prizes daily!!

Download the app for FREE and get Rs.20 joining BONUS. Join 30,000 other users who win cash by playing NostraGamus. Click here to download the app for FREE on android!

SHOW COMMENTS
!-- advertising -->