यह तो एक अनकहा नियम है ... ऐसा सभी करते हैं: फाफ डू प्लेसिस

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यह तो एक अनकहा नियम है ... ऐसा सभी करते हैं: फाफ डू प्लेसिस

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल द्वारा, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट के दौरान, बॉल-टैम्परिंग के दोषी कहलाने के बावजूद फाफ डू प्लेसिस खुद को निर्दोष मानते हैं। डू प्लेसिस ने कहा कि वह गेंद को चमका रहे थे नाकि टैम्पर कर रहे थे और अब से वह मिंट का इस्तेमाल सिर्फ साँस की बदबू को दूर रखने के लिए करेंगे।

"कल सुनवाई थी और उसका निर्णय यह कि मैं दोषी हूँ। मैं इस बात को नहीं मानता। मुझे नहीं लगता मैंने ऐसा कुछ किया है," दक्षिण अफ़्रीकी कप्तान ने न्यूज़ कांफ्रेंस में कहा।

"इस घटना को देखने का दो नजरिया है, या तो ये बॉल-शाइनिंग का मामला है या बॉल-टैम्परिंग का। मेरे ख्याल से, अगर आप बॉल-टैम्परिंग की बात करते हैं, तो वह वाकई में गलत है। इसमें बॉल को नोचना या खरोचना शामिल हो सकता है। कोई भी क्रिकेटर यह बता सकता है कि गेंद को चमकाना इससे बिलकुल अलग है।

"यह एक ऐसा काम है जो सभी क्रिकेटर करते हैं और मुझे लगता है इस बात से आने वाले खेल पर काफी असर पड़ेगा, ICC इसके लिए क्या करने वाली है? मुझे नहीं लगता कि गेंद को चमकाना गलत है। ऐसा करके मैं कोई धोखेबाजी तो नहीं कर रहा था। मैं गेंद को इस लिए चमका रहा था ताकि इसे लेकर कोई समस्या न हो," ESPNcricinfo के अनुसार प्लेसिस ने कहा।

ICC ने 32 वर्षीय खिलाड़ी को होबार्ट टेस्ट में 'लोली' का इस्तेमाल कर गेंद में अतिरिक्त चमक देने के लिए, जुरमाना भरने का दण्ड दिया है, हालांकि गुरूवार (24 नवम्बर) से एडिलेड में शुरू होने वाले तीसरे और आखिरी फाइनल में खेलने की अनुमति दे दी गयी है।

डू प्लेसिस ने कहा कि उनके मुंह में मौजूद मिंट काफी बड़ा था लिहाज़ा उसे वो कैमरे से छिपाने की कोशिश नहीं कर रहे थे। मामले में पूर्व खिलाड़ियों के समर्थित इस दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ी ने यह स्पष्ट किया है कि किसी बाहरी वास्तु से खेल के दौरान गेंद को साफ़ करना काफी आम बात है, और अगर ऐसा करने के पीछे उनका कोई गलत मकसद होता, तो वह कैमरे पर बेख़ौफ़ होकर ये काम नहीं कर रहे होते।   

"मैं तो कुछ भी नहीं छिपा रहा था। मेरे मुंह में एक बड़ा सा मिंट था और मेरा मुंह भी खुला हुआ था। चाहे आप मुंह में रखी मीठी चीज़ से गेंद साफ़ करे या न करे या आपको मुंह में रखी मीठी चीज़ न दिखे, पर मीठी चीज़ को मुंह में है ही, उसे तो नहीं बदला जा सकता," उन्होंने कहा।

"पूर्व खिलाड़ियों ने इस पर चर्चा की है। यह हमारे खेल का एक हिस्सा है। यह एक अकथित नियम है। कुछ लोग तो सनब्लाक से गेंद को चमकाते हैं। मैं कुछ ऐसे लोगों को जानता हूँ जो अपनी जेब में लिप-आइस रखते हैं या चेविंग गम रखते हैं और उससे गेंद को साफ़ करते हैं। इतनी सारी चीज़ें हैं। यह कहना मुश्किल है कि क्या सही है और क्या गलत।

"यह बताना कि हम कब कुछ मीठा खा सकते हैं, गलत है लेकिन जब आपके मुंह में मीठी चीज़ है और कैमरा उसे कैद नहीं कर रहा, तो क्या बड़ी बात है। यह जो कुछ हुआ है बहुत गलत है। मैं बस इतना चाहता हूँ कि सभी को समान रूप से सम्मान मिले। ICC ने मुझे महज़ बलि का बकरा बनाया है। मुझे बस एक समान व्यवहार की मांग कर रहा हूँ।

"क्रिकेट खेलते हुए, ज़्यादातर वक़्त खिलाड़ियों के मुंह में चीनी युक्त थूक होती है। हम कभी पॉवरेड पीते हैं, कोक पीते हैं, गटोरेड पीते हैं, मिठाई खाते हैं, जेली चूसते हैं, तो हमारे मुंह में मीठा हमेशा रहता है। यह क्रिकेट के कानून में एक त्रुटी है जिसपर विचार करना चाहिए।

"हम क्रिकेटर होने के नाते ये सोचते हैं कि इससे फर्क पड़ता है लेकिन हम वैज्ञानिक तो नहीं है। हम इस बात को निश्चित होकर नहीं कह सकते कि वाकई कोई फर्क पड़ता है या नहीं। यह एक निरंतर चलने वाला चलन है, यह अब होता है, आगे भी होता रहेगा। इस बारे में थोड़ी जागरूकता लाने के लिए ऐसा कुछ करना ज़रूरी था," डू प्लेसिस ने कहा। दक्षिण अफ़्रीकी कप्तान इस बात को लेकर विश्वस्त हैं कि इस मुद्दे को ऑस्ट्रेलिया फाइनल टेस्ट के दौरान फिर से उजागर नहीं करेगा।

"इस मामले में फँसना कोई अच्छी बात नहीं होती क्योंकि बॉल-टैम्परिंग एक बहुत नकारात्मक धब्बा है जो आपको धोखाबाज़ों की श्रेणी में खड़ा कर देता और मैं इस बात को हलके में नहीं ले रहा हूँ" उन्होंने कहा।

"मैं किसी भी कीमत ऐसा अपने साथ इस वक़्त नहीं होने देना चाहता क्योंकि मैं जानता हूँ कि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। मैं तो बस गेंद को चमक दे रहा था। मैं तो अब तक अपने कार्यकाल में ऐसा करता आया हूँ, और अब तक मैंने जिस भी पक्ष के खिलाफ खेला है सभी ऐसा करते हैं और इससे किसी को आपत्ति नहीं हुई है, अंपायरों को भी नहीं। तो मुझे लगता है मामले को गंभीर बताने के लिए ऐसा कुछ किया गया है।

"अगर आप हाशिम अमला को जानते हैं, तो आप प्रेस के सामने जाकर उनके बात करने के अंदाज़ से समझ जायेंगे, वह उस बात को पूरे अस्वाशन के साथ कहते हैं। वह बहुत ही इमानदार व्यक्ति है इसीलिए उनके लिए यह बहुत माएने रखता है। यही हमारी परंपरा है और इसी तरह से हम किसी बाहरी अशांति को घरेलू अशांति का कारण नहीं बनने देते हैं।

"मेरे ख्याल से ऑस्ट्रेलिया की टीम भी इस बारे में बात नहीं करेंगे क्योंकि वे जानते हैं कि ऐसा वे भी करते हैं। यह क्रिकेटरों का किया हुआ कार्य नहीं है। आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि आप ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने जायेंगे तो उनकी तरफ से आपको मैदान में आने के लिए स्वगत किया जायेगा। यह ऑस्ट्रेलिया के खेलने का तरीका है, आप इसकी उम्मीद करते हैं और मैं इसे अच्छी तरह से जान गया हूँ। बस मैं इसी उम्मीद में हूँ, की क्रिकेट के खेल की भावना अब भी बरक़रार रहे। ऐसा होना ही चाहिए क्योंकि अगर आप एक क्रिकेटर हैं और आप क्रिकेट समझते हैं तो आपके लिए यह बड़ी बात नहीं होगी।  

कप्तान ने मजाकिया अंदाज़ में यह भी कहा कि आज के बाद वह मिंट का इस्तेमाल केवल साँसों की बदबू हटाने के लिए ही करेंगे।

"पिंक बॉल के साथ टाइमिंग की कोई दिक्कत नहीं है। ऐसा लगता है कि इस गेंद में स्विंग अधिक होता है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि इसे चमकाने के लिए क्या करना होगा। शायद मुझे थोड़ी थूक की मदद से यह काम करना होगा," उन्होंने कहा।

"शायद अब मैं मिंट का इस्तेमाल सिर्फ साँसों की बदबू को दूर रखने के लिए करूँगा नाकि गेंद को चमकाने के लिए। मुझे तो अब ऐसा ही लगता है। चाहे मैं दोषी हूँ या नहीं, या मैंने जो कहा वह कुछ अलग है या नहीं, मुझे तो अब ऐसा ही लगता है। शायद यह समय के साथ ठीक हो जाये, लेकिन खासकर इस खेल में, मैं खुद को मिंट से कोसों दूर रखूँगा।  

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