ICC साल भर में होने वाले टेस्ट मुकाबलों की संख्या को कम करने की फ़िराक में

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ICC साल भर में होने वाले टेस्ट मुकाबलों की संख्या को कम करने की फ़िराक में

ICC के प्रमुख अधिकारी डेविड रिचार्डसन ने कहा है कि वे साल भर में हो रहे मुकाबलों की संख्या को कम कर उन्हें और दिलचस्प बनाना चाहते हैं। रिचार्डसन ने कहा है कि अधिकतर लोगों का मानना है कि क्रिकेट को बेहतर संरचना की आवश्यकता है, हालांकि, यह संरचना कैसी होगी इसपर कुछ तय नहीं हो पाया है।

ICC ने इससे पहले टीमों को निर्वासन और उन्नति के आधार पर दो भागों में बांटने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उस प्रस्ताव को भारत, बांग्लादेश और श्री लंका से विरोध का सामना करना पड़ा था। हालांकि, रिचार्डसन का मानना है कि खेल की संरचना को बदलना ज़रूरी है।

"मुझे लगता है कि आने वाले फरवरी तक प्रमुख अधिकारीयों के बीच, ख़ासकर ODI और टी 20 में, लागू करने के लिए एक नया ढांचा तय हो जायेगा। टेस्ट को लेकर ऐसी सहमती बन नहीं पायी है, लेकिन यकीनन, इस बात से सभी इत्तेफाक रखते हैं कि क्रिकेट में बेहतर संदर्भ और लीग स्ट्रक्चर की आवश्यकता है, बस यह स्ट्रक्चर कैसा होगा इसपर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।

"हम इस बात पर जोर डाल रहे हैं कि हम अत्यधिक टेस्ट क्रिकेट का आयोजन न करे। कुछ देशों कि आर्थिक स्थिति  को ध्यान में रखते हुए हम उन देशों पर अतिरिक्त जोर डालकर गैर ज़रुरत टेस्ट क्रिकेट नहीं आयोजित करना चाहते हैं। मौजूदा स्थिति में एक साल में औसतन 45-50 टेस्ट मुकाबले आयोजित होते हैं।  

"हम अचानक से ऐसे किसी ढाँचे पर अमल नहीं कर सकते जिसमें हर साल 70 टेस्ट मैच खेलने पड़ जाएँ, इसीलिए हम चाहते हैं कि यह मुकाबले 35-40 की संख्या में रहे, क्योंकि हमें ODI और टी20 मुकाबलों के लिए आयोजन करना होता है और इस तरह से हम कुछ ज्यादा ही क्रिकेट मुकाबले तय कर देते हैं। हम चाहते हैं कि मुकाबले कम ही खेले जाएँ, लेकिन अच्छा क्रिकेट खेला जाए, और उन मुकाबलों का कोई अर्थ रहे," ESPNcricinfo के अनुसार रिचार्डसन ने एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच चल रहे डे-नाईट मैच के दौरान कहा।

सदस्यों ने अब तक किसी एक ढाँचे को तय नहीं किया है, हालांकि, ICC को यकीन है कि अगले साल जून में लन्दन में ICC के एनुअल कांफ्रेंस से पहले यह निर्णय ले लिया जायेगा।लीग के स्ट्रक्चर के साथ, सदस्य द्वादेशिया सीरीज की आय के बटवारे की संभावना पर भी चर्चा करेंगे, जिसका BCCI पहले विरोध कर चूका है।

"इस वक़्त द्वादेशीय क्रिकेट के आर्थिक अधिकार सदस्यों के पास है, नाकि ICC के पास। अतः, अगर वह उस अधिकार का त्याग करने को तैयार होने या सीरीज से होने वाले आय के बंटवारे पर निर्णय वही लोग ले सकते हैं। हम सदस्यों से चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन कमान उनके हाथ में है।"

"कार्यकारी समूह के पास न सिर्फ सलाह देने का अधिकार है, बल्कि वे लोग आखिरी फैसला भी ले सकते हैं। जो भी प्रस्ताव बनाया जाता है उसपर भारत के साथ के साथ चर्चा करना ज़रूरी होगा। मुझे विश्वास है कि हम सभी सदस्यों की सहमती जुटा पाएंगे, जबकि किसी संशोधन के लिए सात सम्पूर्ण सदस्यों के मतों के पक्ष में होना ज़रूरी होता है," रिचार्डसन ने कहा।

प्रशासनीय निकाय क्रिकेट लीग के बढ़ती संख्या के नियंत्रण के लिए और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कार्य सूची में शामिल करने के लिए भी रास्ता ढूंढ रही है। रिचार्डसन ने कहा,"काश इसके लिए कोई आसान सा हल होता, लेकिन सच तो यह है कि अधिक से अधिक देश अपना घरेलू टी20 लीग की शुरुआत करना चाहते हैं ताकि वह उनके लिए फायेदे का सौदा हो। अगर सभी सदस्य यह सोच ले कि वे अपना घरेलू टी20 प्रतियोगिता उसी समय पर करेंगे जब वे बाहर के खिलाड़ियों को आकर्षित कर सके, तो शायद ही हमारे पास किसी और चीज़ के आयोजन के लिए समय बचेगा।

"घरेलू टी20 क्रिकेट के लिए जगह रखकर अंतर्राष्ट्रीय को भी समय दे पाना आसान नहीं है। वे IPL के साथ या एक दूसरे के साथ मुकाबला नहीं करना चाहते, उन्हें अपनी अलग जगह चाहिए होती है। ऐसा करना आसान नहीं होगा. FICA ने एक वाजिब बिंदु पर प्रकाश डाला है. लेकिन जहाँ तक इसके हल का सवाल है तो हमारे और FICA, दोनों के हाथ में फ़िलहाल कुछ नहीं है।"   

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