बीसीसीआई ने लोढ़ा समिति और सुप्रीम कोर्ट की फिर अनदेखी की

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बीसीसीआई ने लोढ़ा समिति और सुप्रीम कोर्ट की फिर अनदेखी की

बीसीसीआई ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की अनदेखी करते हुए लोढ़ा कमिटी के बोर्ड में सुधार करने के फैसलों को दरकिनार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी के बाद भी बोर्ड ने कल कई फैसले सर्वसम्मति से लिये। हालांकि, बीसीसीआई ने लोढ़ा कमिटी के विवादित फैसलों को अभी पेंडिंग में ही रखा है।

लोढ़ा कमिटी द्वारा सुझाये गये सुधार के उपायों के बारे में बोर्ड के सदस्यों से बीसीसीआई को काफी विरोध का सामना करना पड़ा है क्योंकि लोढ़ा कमिटी के सुझाव मानने पर मौजूदा कमिटी के सदस्यों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा। कईयों को अपने पद से भी हाथ धोना होगा। हालांकि, बीसीसीआई ने क्रिकेट में एक बार फिर चौसर की चाल चली है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के मनमाना रवैया को देखते हुए पिछले सप्ताह कहा था कि बोर्ड भगवान नहीं है। वह या तो फैसला माने या फिर सजा भुगतने के लिए तैयार रहे। कोर्ट ने बोर्ड से यह भी कहा था कि उसे लोढ़ा कमिटी के हर सुझावों को वैसे ही मानना होगा, जैसा कि दिया गया है, बोर्ड को उसमें तोड़-मरोड़ करने की इजाजत नहीं होगी।

बीसीसीआई ने शुक्रवार को स्थगित की गयी खास आम सभा बैठक(एसजीएम) शनिवार को बुलायी। बैठक में अनुराग ठाकुर ने कहा कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों को मानने में कई तरह की कानूनी बाधाएं भी हैं। अनुराग ने कहा, ‘बोर्ड के सदस्यों को जहां-जहां लगा कि लोढ़ा कमिटी के फैसलों को मानने में कानूनी या फिर व्यावहारिक कठिनाईयां हो सकती हैं, उस पर उन्होंने अपने तर्क दिये और उसे मानने से इनकार भी कर दिया।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमारा और शिर्के (सचिव, बीसीसीआई) का काम सिर्फ बोर्ड की बैठक बुलाना और मीटिंग में हुई बातों को आम जन तक पहुंचाना होता है। असली फैसला बोर्ड के सदस्य ही करते हैं। हमने बोर्ड के सदस्यों को लोढ़ा कमिटी के सुझावों पर अपनी बात रखने के लिए बुलाया था और सदस्यों ने अपनी बात रखी।’

सदस्यों ने मुख्य रूप से कुछ बातों को मानने पर सहमति नहीं जतायी जो इस प्रकार हैं:

-70 साल में रिटायरमेंट

-नौ साल का कार्यकाल, जिसमें कूलिंग ऑफ पीरियड शामिल हो।

-एक राज्य एक वोट पॉलिसी

क्रिकइंफो कह रिपोर्ट के अनुसार, ठाकुर ने यह भी कहा कि बोर्ड के फैसलों की रिपोर्ट बीसीसीआई सुप्रीम कोर्ट और लोढ़ा कमिटी दोनों को उपलब्ध करा देगा। इसमें यह भी शामिल होगा कि सदस्यों का लोढ़ा समिति के सुझावों पर क्या मत रहा ? उन्होंने किन बातों पर सहमति जतायी और किन बातों को मानने से इनकार किया और उसके क्या कारण थे ?

हालांकि, लोढ़ा कमिटी की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है, पर एक सीनियर वकील जो बीसीसीआई से इस मामले को लेकर जुड़े रहे हैं का मानना है कि बीसीसीआई ने कहा है कि बोर्ड मेंबर ने कुछ बातें नहीं मानी। मैं कहना चाहूंगा कि बोर्ड मेंबर को कुछ बातें नहीं मानने का सवाल ही नहीं उठता। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि या तो सभी सुझाव पर अमल करें या सजा भुगतने को तैयार रहें।

लोढ़ा कमिटी की जिन सुझावों को मान लिया गया है उसकी भी लिस्ट बीसीसीआई ने जारी की है:

1. आइपीएल गवर्निंग काउंसिल और एपेक्स काउंसिल (सर्वोच्च परिषद) में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक रखे जायेंगे।

2.सर्वोच्च परिषद बनाया जायेगा।

3. लोढ़ा कमिटी द्वारा सुझाये गये खास समिति दिव्यांगो और महिलाओं के लिए।

4. खिलाड़ियों का संघ बनाना।

5. एसोसिएट सदस्यों को भी वोटिंग का हक, जो आसीसी के गाइडलाइन में मौजूद है।

6. पुडुचेरी(पोंडीचेरी) को एसोसिएट सदस्य की मान्यता।

7. खिलाड़ी और टीम अधिकारियों के लिए कोड ऑफ कंडक्ट, एंटी डोपिंग कोड, एंटी रेसिज्म कोर्ड, एंटी करप्शन कोड. इसके अलावा बोर्ड के राष्ट्रीय कैलेंडर और आइपीएल के बीच 15 दिन का गैप।

8. एजेंट रजिस्ट्रेशन से जुड़े नये नियमों को मंजूरी।

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