BCCI अध्यक्ष ठाकुर ने राज्य परिषदों को दी गयी चिट्ठी में लोढा पैनल के पलटने पर निशाना साधा

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BCCI अध्यक्ष ठाकुर ने राज्य परिषदों को दी गयी चिट्ठी में लोढा पैनल के पलटने पर निशाना साधा

विश्व के सबसे धनि क्रिकेट निकाय और सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति के बीच लम्बी खीच रही इस घमासान में, अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने BCCI के सदस्य तथा राज्य परिषदों को एक चिट्ठी लिखी है। इस पत्र में उन्होंने लोढा समिति के आदेशों पर निशाना साधते हुए, समिति को फटकारा है।

फर्स्टपोस्ट वेबसाइट में प्रकाशित चिट्ठी का सम्पूर्ण संवाद:

"लोढा समिति के आदेशों पर बैंकों द्वारा BCCI के बैंक खातों के निष्क्रिय होने के बाद, विभिन्न अखबारों तथा चैनलों में यह खबर आ रही थी कि भारत-न्यू जीलैंड सीरीज को रद्द करने पर चर्चा की जा रही है। जब इस पर जनता की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई, तब जस्टिस लोढा लगभग हर टीवी चैनल पर आए और कहा कि BCCI जनता को गुमराह कर रही है और उन्होंने BCCI के खातों को कभी निष्क्रिय करने के आदेश दिए ही नहीं एवं टेस्ट सीरीज जारी राखी जा सकती है। आम जनता और बोर्ड सदस्यों के दिमाग में चल रही सीरीज को लेकर काफी असमंजस था। बोर्ड का अध्यक्ष होने के नाते, यह मेरा कर्त्तव्य है कि मैं घटनाओं के क्रम पर स्पष्टीकरण दूं जिस वजह से BCCI के खातें, अस्थायी रूप से ही सही, लेकिन अकस्मात ही ज़ब्त कर लिए गए थे। इसके अलावा, जस्टिस लोढा की समिति के, बोर्ड के लिए, विभिन्न ऐसे आदेश हैं जिनसे जुड़ी कुछ बिन्दुओं का मैं स्पष्टीकरण करना चाहूँगा।    

1. 3.10.16 को समिति ने BCCI को एक ईमेल भेजा और उसमें बैंकों को मार्क करते हुए लिखा, "चूंकि माननीय कोर्ट को गुरूवार, 16.10.2016 को, दिए गए आदेशों को लेकर स्थिति रिपोर्ट देना होगा, आपको यह आदेश दिया जाता है कि आप 31.8.2016 के बाद से किसी भी राशि अनुमोदन के आदेश पर आर्थिक रूप से अमल न करें।   

2. इसी वजह से बैंकों ने 4.10.16 को, इस आदेश के प्रभाव में एक पत्र लिखकर, BCCI के अंतरण रोक दिए। ऐसे हालात में BCCI किसी भी प्रकार के भुगतान करने में असमर्थ था अतः बड़ी संभावना थी कि न्यू जीलैंड के विरुद्ध चल रही टेस्ट श्रृंखला रद्द हो जाती।  

3. जब यह रिपोर्ट मीडिया में आई तो लोढा समिति ने 4.10.16 को यह आदेश दिए कि बैंक खाते सक्रिय हो जाने चाहिए। बिना किसी दिशा निर्देश के समिति ने केवल नित्य-क्रम के भुगतान करने की अनुमति दे दी। बैंक से समिति से इसके लिए दिशा निर्देश मांगे थे लेकिन उन्हें वह, अभी तक, नहीं मिला। अभी तक इस बात को लेकर अस्पष्टता है कि कौन से भुगतान किये जा सकते हैं, और सच तो यह है कि समिति ने राज्य परिषदों को किसी भी प्रकार का भुगतान देने से मन किया है और साथ ही यह निर्देश भी दिए हैं कि BCCI द्वारा दी गयी राशि का वे इस्तेमाल न करे। दुर्भाग्यवश, इससे भारत और BCCI के छवि ख़राब हुई है क्योंकि विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय अख़बारों ने BCCI के बैंक खातों के निष्क्रिय और सक्रिय होने की खबर छापी है।

4.लोढा समिति ने 9.8.16 को एक दिशा निर्देश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि IPL और चैंपियंस ट्राफी के बीच 15 दिनों का अंतराल होना चाहिए। जब यह संभावनाएं होने लगी कि इनमें से एक खेल रद्द करना पड़े, तब समिति ने कहा निर्णय पहले ही लिया गया था और बाद में आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण उस पर अमल नहीं किया जायेगा।  

5. हालांकि, समिति ने BCCI के अधिकारियों के कार्यकाल पर अपने निर्णय को पूर्व प्रभावी ढंग से अमल करने का फैसला किया। मैं यह समझ नहीं पाया कि इसका चुनाव वह किस आधार पर कर रहे हैं। अगर किसी रिपोर्ट पर अमल करना है, तो उस पर पूरी तरह से अमल होना चाहिए, ना की, इस तरह से किसी के फैसले पर निर्भर थोड़े थोड़े भागों में। रिपोर्ट यह भी कहती है कि खेल के मैदान बड़े और स्टेडियम छोटे होने चाहिए। संरचना को दूसरी वरीयता दी गयी है। तो क्या इसे भी पूरे देश में अमल किया जायेगा?

6. समिति की एक और त्रुटी है कि क्रिकेट के अलावा किसी भी क्षेत्र में भुगतान अनिवार्य नहीं माना गया है। राज्य परिषदों को भी भुगतान क्रिकेट के लिए ही दिया जाता है। समिति ने इस पर कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया है। राशि के अनुमोदन पर प्रतिबन्ध लगाने और राज्य परिषदों को BCCI के अनुमोदनों को स्वीकार न करने के आदेशों पर, आप में से कईयों ने मैचों को ससपेंड करने और क्रिकेट के कार्यक्रम को पीछे करने के लिए कहा था। मैं जानता हूँ कि आदेशों के कारण हुए आर्थिक तंगी में चल रहे क्रिकेट सत्र में कार्य करने में आप लोगों को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा होगा। पर इस बात का आश्वासन रखें कि BCCI के पास राज्य परिषदों के नाम से जितनी भी रकम है जह उन्हें मिल जाए। यह किसी को समझ नहीं आ रहा कि यह राशि BCCI की अपनी संपत्ति नहीं है बल्कि सच तो यह है कि यह राज्य परिषदों की संपत्ति है, इसपर BCCI अपने पास कैसे रख सकता है?  

7.समिति ने, BCCI को, उनके द्वारा दिए गए आदेशों पर अमल करने के लिए एक SGM का आयोजन करने को कहा है। लेकिन अब जब SGM हो चुकी है तो समिति उसे गैर-कानूनी मान रही है। जब BCCI ने चयनकर्ताओं की नियुक्ति करने की कोशिश की, तो प्रेस में लोढा समिति के सूत्रों के हवाले से कई खबरें आई जिनमें उन्होंने कहा कि अगर यह चयनकर्ता नियुक्त होते हैं तो उन्हें सख्त परिणाम भुगतने होंगे। इसी कारण से कई सदस्यों ने चयनकर्ता के पद के लिए आवेदन ही नहीं किया और फिर कई लोढा समिति के निर्देशों को मानने के कारण नहीं चुने जा सके।  

8. समिति अक्सर यह कहती रहती है कि वह भारतीय क्रिकेट को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए कार्य कर रही है क्योंकि उनके कई पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रशंसकों से इस बारे में जानकारी मिलती रही है। इन्ही जानकारियों के आधार पर फ्रीक्वेंट्ली आस्क्ड क्वेश्चन्स जारी किया गया है। ऐसे लोगों के नाम सामने नहीं आये और समिति के विमर्श इतने गोपनीय होते हैं कि कोई बाहर का उसमें शामिल ही नहीं हो सकता।

9. लेकिन ऐसी गोपनीयता क्यों होनी चाहिए जब BCCI भी RTI के अंतर्गत आता है? हर विमर्श सार्वजानिक होनी चाहिए और BCCI की अपेक्षा पर, सभी जानकारी तथा जानकारी के सोत्र सामने आने चाहिए।

10. मैं आप सबके साथ यह भी बात सांझा करना चाहता हूँ कि लग भाग रोज़ समिति ने नित्य क्रम के क्रिकेट से सम्बंधित मामलों को लेकर आदेश दिए हैं, तथा न मानने पर bcci को कोर्ट की कार्यवाही की अवहेलना करने का आरोप लगाने की धमकी दी है। समिति के सभी आदेश इसी धमकी पर ख़त्म होते हैं कि अगर इनपर अमल न किया गया तो कोर्ट की कार्यवाही की अवहेलना का आरोप लग जायेगा। BCCI ने, समिति की गरिमा को देखते हुए, सम्मानपूर्वक इन आदेशों का जवाब के रूप में अपने मत प्रकट किये हैं। लेकिन BCCI के इन स्पष्टीकरणों पर समिति का कोई भी जवाब नहीं आया है। इसके बदले में, समिति के सचिव ने मुझपर और बोर्ड के अन्य अधिकारीयों पर लोगों को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। अगर BCCI के कार्य विधि में इस प्रकार की रूकावट आएगी, तो यह निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट तथा 87 वर्षों पुराने प्रशासनीय निकाय का अंत है। हमें एकजुट होकर भारतीय क्रिकेट को नई उंचाईयों पर ले जाना होगा।"    

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