क्या हार्दिक का चयन टीम इंडिया के हित में है?

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© BCCI

क्या हार्दिक का चयन टीम इंडिया के हित में है?

पिछले गुरूवार को एमएसके प्रसाद के नेतृत्व में गठित नई कमेटी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली एकदिवसीय सीरीज के लिए भारतीय टीम की घोषणा की। इस घोषणा के कई बिंदु तो हैरत में डालने वाले हैं।

13 सितंबर 2016 को बीसीसीआई की चयन समिति के अध्यक्ष संदीप पाटिल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय खिलाड़ियों के नाम का ऐलान किया। अपनी इस आखिरी मीटिंग के बाद उन्होंने कहा कि ‘हमने भारतीय क्रिकेट के भविष्य को देखते हुए कुछ बड़े और सख्त निर्णय लिए हैं। हमें खुशी है की हमारी टीम तीनों प्रारूपों में अच्छा कर रही है और मैं आने वाली कमेटी को शुभकामनाएं देता हूं।’ मगर गुरूवार को हुई मीटिंग के बाद थोड़ी हिचकिचाहट के साथ ये कहना पड़ेगा की पाटिल द्वारा देखे गए सपने को नए सदस्य समझ नहीं पाए हैं।

पिछले गुरूवार को एमएसके प्रसाद के नेतृत्व में गठित नई कमेटी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली एकदिवसीय सीरीज के लिए भारतीय टीम की घोषणा की। इस घोषणा के कई बिंदु तो हैरत में डालने वाले हैं।

The selection committee has taken a wise decision by resting key players such as Ravindra Jadeja and Ravichandran Ashwin for the ODIs © ©BCCI

स्पिन जोड़ीदार रविन्द्र जडेजा और रविचन्द्रन अश्विन के साथ तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को आराम देना, पैनल का एक अच्छा निर्णय है। इससे भारत के प्रमुख गेंदबाजों को लंबे घरेलू सत्र के लिए तरोताजा और चुस्त रखने में मदद मिलेगी। केएल राहुल और शिखर धवन के चोटिल होने का मतलब है कि टीम में अजिंक्या रहाणे, रोहित शर्मा के साथ पारी की शुरूआत करते नजर आएंगे। कुछ अहम खिलाड़ियों को आराम देने के साथ ही कमेटी ने चार महीने पूर्व जिंबाब्वे टूर के लिए चयनित सात खिलाड़ियों को बरकरार रखा है।

मंदीप सिंह और मनीष पांडे को टीम में जगह देने के पीछे एक अच्छी सोच नजर आती है क्योंकि पिछले महीने ऑस्ट्रेलिया में हुए चतुर्भुजीय एकदीवसीय श्रृंखला में इंडिया ए टीम की ओर से इन दोनों बल्लेबाजों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। जडेजा और अश्विन की अनुपस्थिति में एमएस धोनी की पहली पसंद लेग स्पिनर अमित मिश्रा होंगे और दूसरा मौका अक्षर पटेल को मिल सकता है। लेकिन टीम में हार्दिक पांड्या को देखकर लगता है की कमेटी ने कोई लॉटरी खेलकर उनका चयन किया है।

Apart from the last over against Bangladesh in the World T20, Pandya has no other memorable performances playing for India © © BCCI

आईपीएल 2015 में जब कोलकाता नाईट राइडर्स के खिलाफ बड़ौदा के इस ऑल-राउंडर ने 31 गेंदों में 61 रन की मैच जीताने वाली पारी खेली तो सबको ये यकीन हो गया की ‘पलभर’ के लिए ही सही पर इनकी चमक देखने लायक है। मुंबई इंडियंस के लिए अपने प्रभावपूर्ण खेल की बदौलत उन्हें 2016 में एशिया कप और विश्व टी20 के लिए भारतीय टीम में जगह दी गई। देश के लिए खेलने का इतना बड़ा मौका मिलने के बावजूद वो कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए। उनका अब तक का अच्छा प्रदर्शन विश्व टी20 में बांग्लादेश के खिलाफ आखिरी ओवर में था, जिसमें भारत 1 रन से जीत हासिल करने में कामयाब रहा। उसके बाद से अब तक, इस 23 साल के खिलाड़ी के प्रदर्शन का स्तर गिरता ही जा रहा है।

संदीप पाटिल की अगुवाई वाले सिलेक्शन पैनल ने इस खिलाड़ी को जून में हुए जिंबाब्वे टूर से बाहर रखकर एक सही फैसला लिया। इस निर्णय के लिए पांड्या के आईपीएल 2016 के आंकड़े ही काफी थे। मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हुए वो 11 मुकाबलों में 44 रन और 3 विकेट ही निकाल पाए। ये साफतौर पर जाहिर करता है कि इस खिलाड़ी को भारतीय टीम में जगह देने से पहले इसे घरेलू मैदान पर खुद को साबित करना होगा।

वहीं बात करे वेस्ट इंडीज के खिलाफ भारत की टी20 श्रृंखला की तो पांड्या इसे याद नहीं रखना चाहेंगे। इंडिया ए का हिस्सा बनकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चतुर्भुजीय सीरीज में गए पांड्या 7 मैचों में 47 रन और 5 विकेट ही हासिल कर पाए। ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ टेस्ट की पहली इनिंग में 79 रनों की पारी के अलावा उनका ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं था जिसके दम पर उन्हें भारतीय टीम का हिस्सा बनाया जाए।

लेकिन बीसीसीआई के स्रोतों की मानें तो बड़ौदा के ऑल-राउंडर को टीम में इसलिए जगह दी गई ताकि इंग्लैंड में होने वाली चैपियंस ट्रॉफी के लिए उन्हें तेज गेंदबाजी ऑल-राउंडर के तौर पर शामिल किया जा सके। अब इसका ये मतलब समझा जाए की पांड्या को जगह देने के लिए केदार जाधव और मंदीप सिंह जैसे अच्छे खिलाड़ियों को दरकिनार कर दिया गया। लेकिन अगर पांड्या को दूसरा अनुचित मौका मिलता है तो टीम के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज ऑल-राउंडर स्टुअर्ट बिन्नी को भी अपने आप को साबित करने का एक और अवसर मिलना चाहिए। भले ही पिछली तीन सीरीज में बिन्नी ऐसा करने में नाकामयाब रहे हैं। मगर इसके बावजूद टीम में ऐसे खिलाड़ी को शामिल करना जो अपने निचले मुकाबलों में ही प्रदर्शन नहीं कर पाया हो, एक हैरान करने वाला फैसला है।

Jayant Yadav still remains uncapped despite being picked for three straight series © © BCCI

जयंत यादव का चयन कमेटी का एक और ऐसा निर्णय है जिसे समझ पाना मुश्किल है। लगातार तीन सीरीज में चुने जाने के बावजूद उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला है। ये उम्मीद की गई थी की हरियाणा के इस ऑफ स्पिनर को जिंबाब्वे के खिलाफ अपने पहले टूर में प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। लेकिन उस सीरीज में एमएस धोनी ने अमित मिश्रा और अक्षर पटेल की जोड़ी के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया। इंडिया ए में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद जयंत को क्रिकेट के लंबे प्रारूप में न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में चोटिल ईशांत शर्मा के बदले टीम इंडिया में लाया गया।

किवी के खिलाफ एकदिवसीय दल में उनका चयन उसी तरह था जिस तरह चयनकर्ताओं ने बंगाल के बल्लेबाज मनोज तिवारी को कई श्रृंखलाओं में टीम को मैच के दौरान पानी पिलाने के लिए रखा था। इसके साथ ही चयनकर्ता देवधर ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली टूर्नामेंट और विजय हजारे ट्रॉफी के प्रदर्शन को अनदेखा करते हुए चमक-दमक से भरपूर आईपीएल और सिंगल टूर जैसे इंडिया ए का ऑस्ट्रेलिया दौरा आदि को तरजीह दे रहे हैं। इससे कई प्रतिभावान और हुनरमंद खिलाड़ी भारतीय टीम में दस्तक नहीं दे पाते हैं।

इस बात की कोई गारंटी नहीं है की चयन कमेटी द्वारा लिया गया हर निर्णय सफल हो। कुछ नामों को लेकर असमंजस की स्थिति जरूर पैदा हो सकती है। केवल पहले 3 वनडे मुकाबलों के लिए टीम का चयन होने से खिलाड़ियों पर अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव होगा। अंतिम दो मैचों में जगह बनाए रखने के लिए खिलाड़ी अपने सीमित मौके का भरपूर फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।

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