हार्दिक पांड्या- क्या पूरी हुई टीम इंडिया की तलाश?

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हार्दिक पांड्या- क्या पूरी हुई टीम इंडिया की तलाश?

जब एमएसके प्रसाद की अगुवाई वाली चयन समिति ने न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले एकदिवसीय मुकाबलों के लिए टीम इंडिया का ऐलान किया तब कुछ फैसलों ने हैरान किया, तो वहीं सिलेक्टर्स ने लंबे घरेलू सत्र को देखते हुए आर. अश्विन, रविन्द्र जडेजा और मोहम्मद शमी को आराम देकर अच्छा फैसला किया।

स्टुअर्ट बिन्नी के स्थान पर हार्दिक पांड्या को लेकर आना एक विचित्र फैसला था। वजह साफ थी पांड्या आखिरी आईपीएल सीजन में प्रभावी साबित नहीं हो पाए थे और हाल ही में हुए इंडिया ए टूर भी उनके आईपीएल के खराब प्रदर्शन को छिपा नहीं पाया।

मगर न्यूजीलैंड के खिलाफ हुए पहले एकदिवसीय मुकाबले में हार्दिक ने अपने चयन को सही साबित कर दिया, गौरतलब है कि ये हार्दिक का पदार्पण मैच था। इस मुकाबले में वो पहली बार मुकाबला खेलने आए खिलाड़ी के बजाए एक जिम्मेदार खिलाड़ी के किरदार में नजर आए, पूर्व में ऐसा रोल बहुत कम प्लेयर्स ही निभा पाए। अपने 7 ओवर के स्पेल में तीन विकेट झटक कर इस खिलाड़ी ने किवी टीम को शुरूआत से ही बिखेरना शुरू कर दिया था। मैदान पर ये उर्जावान और आत्मविश्वासी नजर आए और साथ ही ये समय-समय पर 135 और 140 किमी प्रति घंटे की रफ़तार से गेंदबाजी करते दिखे।

वड़ोदरा के इस खिलाड़ी ने अपना इंटरनेशनल डेब्यू टी-20 सीरीज़ में आॅस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ किया। आईपीएल और सैयद मुश्ताक अली ट्राॅफी में इस खिलाड़ी के प्रदर्शन ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। आईसीसी टी20 वल्र्ड कप को शामिल करें तो अब तक हार्दिक कुल 16 टी20 मुकाबलों का हिस्सा बनें और जहां वो तकरीबन आठ की औसत से 15 विकेट निकाल पाए। 

मगर आईपीएल 2016 में वो अपनी सही लाईन और लेंथ की तलाश में ही जूझते दिखे। क्रिकेट के सबसे छोटे फाॅर्मेट में बल्लेबाजों के लिए पुल और हुक के जरिए रन बनाना सबसे मजेदार काम है, वहां हार्दिक कुंठित नजर आए। बल्लेबाज उनकी गेंदों को ज्यादा से ज्यादा खेलना चाहते थे। हार्दिक का बल्ला भी शांत ही दिखा। यही वजह रही की एमएस धोनी की अगुवाई में जिंबाब्वे जा रही टीम में उसे जगह नहीं दी गई।

न्यूजीलैंड टीम के खिलाफ होने वाली एकदिवसीय सीरीज से पहले भुवनेश्वर कुमार का चोटिल होना और शमी को आराम देना हार्दिक के लिए एक सुनहरा मौका लेकर आया। प्रतिकुल माहौल में टीम में एंट्री पाने वाले हार्दिक ने शायद ही ये सोचा होगा की उन्हें जसप्रित बुमराह से पहले नई गेंद करने का मौका मिलेगा। धोनी ने हार्दिक पर अपना दांव खेला और उसका ईनाम पहले ही ओवर में मिल गया। 

एकदिवसीय क्रिकेट में अपने करियर की शुरूआत कर रहे हार्दिक के पहले ओवर की पांच गेंदों पर न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज मार्टिन गुप्टिल ने तीन चैके लगाए। ये काफी शानदार थे। मगर साथ ही पदार्पण करने वाले किसी भी खिलाड़ी के मनोबल को तोड़ने के लिए ये काफी था। जाहिर है, ऐसा हार्दिक के साथ नहीं हुआ। उसने ओवर की आखिरी गेंद हल्की आउट-स्विंगर के तौर पर डाली जो गुप्टिल के बल्ले के बाहरी किनारे से टकराई, सेकेंड स्लिप में खड़े रोहित शर्मा ने बड़ी ही आसानी से इसे लपक लिया। उस वक्त जो खुशी हार्दिक के चेहरे पर दिखी वो दर्शाती है कि ये विकेट उनके लिए कितना मायने रखता है। उसे अनुभव हुआ कि उसने एक नई शुरूआत की ओर कदम बढ़ाया है।

समय-समय पर 135 किमी प्रति घंटे की रफतार से गेंदबाजी करा रहे हार्दिक के सामने किवी बल्लेबाज, खासतौर से बाएं हाथ के खिलाड़ी असहाय नजर आए। केन विलियमसन को भी अपनी धारदार गेंदबाजी से रूबरू कराया। एक सिरे से उमेश यादव अस्वाभाविक गेंदबाजी करते दिखे तो वहीं दूसरे छोर पर हार्दिक पांड्या अपनी गेंदों पर बाउंड्री लगने के बावजूद धैर्य बनाए हुए थे। 11वां ओवर कराने आए हार्दिक की गेंद खेलने वाले कोरी एंडरसन का बेहतरीन कैच उमेश यादव ने पकड़ा। वहीं ल्यूक रोंची का विकेट लेकर हार्दिक ने अपना डेब्यू मुकाबला 3/31 के आंकड़े के साथ खत्म किया। वाकई, एकदिवसीय मुकाबलों में पदार्पण करने वाले खिलाड़ी के लिए ये एक अच्छी शुरूआत है। 

मुकाबले से पहले हुई प्रेस काॅन्फ्रेन्स में एमएस धोनी ने चैंपियंस ट्राॅफी 2017 के लिए बनाए अपने प्लान पर बात की और जाहिर किया की टीम में प्रयोग करके मैदान में एक बेहतर तालमेल पाने का ये सही समय है ताकि भारत अपने इस कैंपेन को कामयाबी के साथ पूरा कर सके। जसप्रीत बुमराह मध्य और आखिरी ओवरों में रन रोकने के लिए एक अच्छे विकल्प हैं। यही वजह है कि धोनी ने अपना मास्टर-स्ट्रोक खेलते हुए पांड्या को गेंदबाजी की शुरूआत करने के लिए कहा और उनका ये एक्सपेरिमेंट टीम के लिए सही साबित हुआ। धोनी आने वाले मुकाबलों के लिए भी चाहते हैं कि हार्दिक अपनी इस लय को बरकरार रखें।

मैच के बाद हुई काॅन्फ्रेन्स में धोनी ने पांड्या की तारीफ करते हुए कहा, ‘बस हमने यही सोचा था की उसे अपने तीन तेज गेंदबाजों के रूप में जगह देंगे और मौका देंगे नई बाॅल के साथ गेंदबाजी करने का। हमें एहसास हुआ की वो काफी चालाक है। वो तेज गेंदबाजी करता है और अपनी लय भी हासिल कर लेता है। वो उस तरह की विकटों पर भी गेंद को स्विंग कराने का हुनर जानता है, जहां कई बार दूसरे गेंदबाज स्विंग हासिल करने में नाकामयाब हो जाते हैं। वो विकेट निकालने में सक्षम है, यही वजह है कि हमने उसे नई गेंद के साथ भेजा।’

धोनी आगे कहते हैं कि ‘हम देखना चाहेंगे की अलग-अलग स्थिति और माहौल में वो खुद को कितनी जल्दी ढाल सकता है। अगर उदाहरण के तौर पर देखें की सीरीज में हम 2-2 की बराबरी पर हैं, तो हम पांचवें मुकाबले के लिए बेस्ट 11 खिलाड़ियों को चुनेंगे। अगर वो ऐसा ही प्रदर्शन करता रहा तो मुझे कोई वजह नहीं मिलती की हम उसे बाहर रखें। तीन तेज गेंदबाज खिलाड़ी में से एक के तौर पर उसे चुना जाएगा।

चैंपियंस ट्राफी से पहले अब सिर्फ सात एकदिवसीय मुकाबले खेलने हैं (न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज और इंग्लैंड के विरूद्ध 3 एकदिवसीय मैच), इस दौरान हार्दिक एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं। वो टीम में तेज गेंदबाजी आॅल-राउंडर की कमी को पूरा सकते हैं। अगर वो आने वाले वक्त में खुद को साबित कर पाता है तो चैंपियंस ट्राॅफी के बाद भी उनके लिए रास्ते खुले रहेंगे। पर उस ईनाम को पाने के लिए वडोदरा के इस आॅल-राउंडर को अपने सभी मौकों का बेहतरीन इस्तेमाल करना होगा।’ 

ये याद रखना होगा की हार्दिक ने अपना पहला मुकाबला धर्मशाला की तेज पिच पर खेला था। उनके धैर्य और हुनर की असली परीक्षा बल्लेबाजी के लिए मददगार पिचों पर होगी। अभी तक उसने डेथ और मध्य ओवरों में गेंदबाजी नहीं की है। अभी उसे उच्च तीव्रता और दबाव वाले मुकाबले खेलने है। अगर उसे आगे बढ़ना है तो इन पड़ावों से पार पाना होगा।

महान खिलाड़ी कपिल देव के संन्यास लेने के बाद से टीम इंडिया एक हुनरमंद तेज गेंदबाजी आॅल-राउंडर की तलाश में है। टीम को अजीत अगरकर और इरफान पठान जैसे खिलाड़ी भी मिले। लेकिन निरंतरता के अभाव और चोट की वजह से ये दोनों ही क्रिकेटर अपना सौ प्रतिशत नहीं दे पाए। पहले ही मुकाबले में खेल के प्रति अपना सकारात्मक नजरिया दिखाने वाले हार्दिक ने एक लंबे अंतराल के बाद जरूर एक उम्मीद की लौ रोशन की है।

लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए कि फिलहाल ये सिर्फ एक ट्रैलर है। भारतीय क्रिकेट फैन्स पूरी फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। 

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