गावस्कर ने धोनी की पारी की तुलना 2011 के WC फाइनल के प्रदर्शन से की

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गावस्कर ने धोनी की पारी की तुलना 2011 के WC फाइनल के प्रदर्शन से की

भारत के दिग्गज बल्लेबाज़, सुनील गावस्कर ने भारतीय कप्तान एम.एस धोनी के न्यू जीलैंड के खिलाफ 80 रनों के स्कोर की तुलना विश्व कप में उनकी उस पारी से की जिसने भारत को टूर्नामेंट में जीत दिलाई थी। गावस्कर ने मैन ऑफ़ द मैच बने विराट कोहली की भी तारीफ करते हुए कहा कि 'उनका दिमाग कंप्यूटर जैसा चलता है'।

मैच के बाद NDTV से हुई बात चीत में, गावस्कर ने दोनों पारियों के बीच तुलना करते हुए कहा कि दोनों में कुछ विकेट्स जल्दी गिरने के बाद कप्तान ने आर्डर में ऊपर आकर ज़िम्मेदारी संभाली और एक जीतने वाली पारी खेली।

"हाँ। उद्देश्य ठीक वैसा ही था जैसा फाइनल में था। चूंकि, मुरली गेंदबाजी कर रहे थे और उस वक़्त एक ही IPL फ्रैंचाइज़ी में होने के कारण वह (धोनी) उनकी गेंदबाजी की शैली से वाकिफ थे। उन्होंने ज़िम्मेदारी ली और खुद को सही साबित किया," 67 वर्षीय खिलाड़ी ने NDTV से कहा।

"आज भी उन्हें यह अहसास हुआ कि भारत का न्यू जीलैंड के खिलाफ हारना भारी पड़ सकता है क्योंकि इसके बाद उनके लिए वापसी करना मुश्किल हो जाता। उन्होंने यह समझ लिया था कि टीम को मिडिल आर्डर में ही उनके अनुभव की ज़रुरत है।"

"मनीष पाण्डेय, निस्संदेह ही, एक अच्छे खिलाड़ी हैं। मेरे ख्याल से वह और केदार जाधव भारत के कुछ बेहतरीन युवा खिलाड़ी हैं। लेकिन उन्हें ऐसा लगा कि शायद उस परिस्थिति में, मनीष अपना धैर्य खो देते और अगर एक और विकेट गिरता तो हालात बदतर हो जाते।"

भारत के 'ओरिजिनल लिटिल मास्टर' ने विराट कोहली की योग्यता की भी तारीफ की जिन्होंने नाबाद 154 (134) रनों की पारी खेली। उन्होंने कहा कि 27 वर्षीय इस खिलाड़ी का दिमाग कंप्यूटर की तरह चलता है और उन्हें इस चीज़ का ज्ञान बखूबी रहता है कि किस समय पर क्या करना चाहिए।

गावस्कर ने कोहली के खेलने की शैली की तारीफ करते हुए कहा कि वह कभी 'कच्चे' शॉट नहीं मारते और इसीलिए जानकार उन्हें पसंद करते हैं।

"उनका दिमाग कंप्यूटर की तरह है। उन्हें पता होता है कि फील्डर कहा पर है और वह फील्डर से दूर कहाँ पर गेंद को मार सकते हैं," गावस्कर ने कहा।

"सभी को और मुझे भी, जो बात सबसे अधिक खुश करती है वह यह है कि वह रन बनाने के लिए कभी 'कच्चे' शॉट्स का इस्तेमाल नहीं करते। आप उन्हें पेशेवर क्रिकेट के शॉट मारते हुए देखेंगे। वह बेवजह गेंद को नहीं मारते, कोई ऐसा शॉट नहीं मारते जो जानकारों के गले ना उतरे। मेरे ख्याल से यही उनकी बल्लेबाजी की खूबसूरती है।"

श्रृंखला की शुरुआत से पहले धोनी में मैच के अभ्यास की कमी का दावा करने वाले गावस्कर ने कहा कि उन्हें बुरा लगा जब भारतीय कप्तान शतक पूरा नहीं कर सके लेकिन दोनों के बीच के 151 रनों की सांझेदारी की तारीफ़ भी की।

"उनकी सांझेदारी इतनी अच्छी थी। उनका 'रनिंग बिटवीन द विकेट्स' भी अच्छा था। पारी तो ख़त्म हो गयी लेकिन मुझे दुःख इस बात की थी कि 80 स्कोर करने के बाद भी वह 100 तक नहीं पहुँच सके, क्योंकि वह उसके हक़दार थे," गावस्कर ने कहा।

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