लक्ष्मीपति बालाजी ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट से लिया संन्यास

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लक्ष्मीपति बालाजी ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट से लिया संन्यास

2004 में पाकिस्तान के खिलाफ अपनी पहचान बनानेवाले तेज गेंदबाज लक्ष्मीपति बालाजी ने बुधवार को प्रथम श्रेणी के क्रिकेट को अलविदा कह दिया। हालांकि, 34 वर्षीय बालाजी तमिलनाडु के लिए गेंदबाजी कोच की भूमिका निभाते रहेंगे। वे तमिलनाडु प्रीमियर लीग और इंडियन प्रीमियर लीग में अपना योगदान देते रहेंगे।

बालाजी ने इस अवसर पर कहा, ‘मैंने अपनी जिंदगी के 16 साल प्रथम श्रेणी क्रिकेट को दिये हैं। अब मुझे परिवार को भी थोड़ा समय देना होगा। हालांकि, मैं छोटे फॉर्मेट (टी-20) जैसे कि तमिलनाडु प्रीमियर लीग और इंडियन प्रीमियर लीग में अपना योगदान देता रहूंगा।’ बालाजी के इस लंबे क्रिकेटिंग कैरियर में इंजूरी(चोट) ने कई बार बाधा डाली।  इस कारण उनका अंतरराष्ट्रीय कैरियर बहुत बड़ा नहीं रहा। 

उन्होंने आठ टेस्ट मैचों की 15 पारियों में गेंदबाजी की। 1756 गेंदें फेंकीं और 1004 रन देकर 27 विकेट लिये। उनका बेस्ट बॉलिंग 5/76(पारी में) और 9/171(मैच में) रहा। वहीं, वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में उन्होंने 30 मैच खेलते हुए 1344 रन देकर 34 विकेट लिये। उनका बेस्ट प्रदर्शन 4/48 रहा।

प्रथम श्रेणी में उनका कैरियर काफी लंबा था। उन्होंने 106 मैच खेले। इसमें 3000 से ज्यादा ओवर गेंदबाजी की और 330 विकेट लिये। उनका बेस्ट परफॉर्मेंस 7/42 रहा। वहीं, टी-20 की बात की जाये, तो बालाजी ने 104 मैच खेले, करीब 360 ओवर गेंदबाजी की और 126 विकेट लिये। बेस्ट 5/24 रहा।

पाकिस्तान के खिलाफ यादगार लम्हा

बालाजी का अंतरराष्ट्रीय कैरियर ज्यादा लंबा नहीं रहा पर, 2004 में अपने आउट स्वींगर से पाकिस्तानी दीवार मानेजाने वाले इंजमाम-उल-हक को आउट करना और ‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ शोएब अख्तर की गेंद पर छक्का जड़ना आज भी क्रिकेट प्रेमियों को याद होगा।

बालाजी ने उस दिन को याद करते हुए कहा कि वह लेट स्विंगर गेंद थी, जिस पर इंजमाम आउट हुए। हमने वह मैच और टेस्ट सीरीज दोनों जीती थी। वह पहला मौका था, जब हमने पाकिस्तान को उसकी धरती पर हराया था। इसलिए मैं कभी उसे भुला नहीं सकता। बालाजी ने एक साल बाद मोहाली में भी चोट से वापसी करते हुए पाक के खिलाफ जबर्दस्त प्रदर्शन किया। बालाजी ने मुस्कुराते हुए कहा कि मैंने चोट से उबर कर वापसी की थी और अपने एक्शन में भी बदलाव किया था। उस मैच में यूनिस खान को आउट करना यादगार रहा।

चोट के कारण बालाजी का अंतरराष्ट्रीय कैरियर बहुत लंबा नहीं रहा। इस बारे में उन्होंने कहा कि मैं अनिल कुंबले से काफी कुछ सीखता था। उन्होंने जहीर खान की भी तारीफ करते हुए कहा कि वे बहुत अच्छे इनसान हैं। उन्होंने काफी समय मेरी तक मेरी मदद की। मैच के दौरान वे मुझे हमेशा समझाते और टिप्स देते रहे हैं।

जॉन राइट उस समय भारतीय टीम के कप्तान थे। उनके बारे में बालाजी ने कहा कि मैं तब सिर्फ 20 साल का था। जॉन राइट को मुझ पर पूरा विश्वास था। वे हमेशा मेरी हौसलाअफजाई करते थे। उन्होंने साथ ही कहा कि मैं उन सभी क्रिकेटर्स और कोच को शुक्रिया करना चाहता हूं, जिन्होंने मेरी  मदद की। 

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