डेविड वार्नरः आक्रामक खिलाड़ी से संयमित कप्तान तक

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डेविड वार्नरः आक्रामक खिलाड़ी से संयमित कप्तान तक

कोई भी व्यक्ति अपने अंदर छिपी क्षमता को तब तक नहीं पहचान पाता जब तक की वह उसे खुद आजमा ना ले। कुछ ऐसा ही हुआ ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर के साथ।

कोई भी व्यक्ति अपने अंदर छिपी क्षमता को तब तक नहीं पहचान पाता जब तक की वह उसे आजमा ना ले। बहुत से लोग अपनी जिंदगी में सिर्फ ये मानकर किसी काम को नहीं करते कि उनके पास वो हुनर ही नहीं है जो उस काम के लिए आवश्यक है। लेकिन ये कौन जानता है! कई दफा वो खुद भी इस बात से अचंभित हो जाते हैं कि वो कैसे दूसरों से बेहतर इस काम को कर रहे हैं। किसी व्यक्ति के छुपे हुए हुनर को, जो उसके व्यक्तित्व में दिखाई भी ना देता हो, उसे बाहर निकालना वैसा ही है जैसे कोयले की खदान से हीरे को ढूंढ निकालना।

कुछ ऐसा ही हुआ ऑस्ट्रेलिया के आक्रामक, विस्फोटक और धुआंधार सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर के साथ। अपने शुरूआती अंतराष्ट्रीय करियर में लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रवैया रखने के बावजूद, वार्नर की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी ने विपक्षी टीमों को खौफजदा कर दिया। उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी थी लेकिन हाल के वर्षों में उन्होंने अपने खेल में बेहतरीन सुधार किया है।

उनके बल्लेबाजी औसत में अच्छी तब्दीली आई है और उन्होंने अपने आप को ऑस्ट्रेलिया का एक प्रमुख बल्लेबाज बनाया है। 2016 के शुरू होने से पूर्व, अगर किसी को ये कहा जाता है कि आने वाले सालों में वार्नर बल्लेबाजी के कई रिकॉर्ड ध्वस्त करने वाले हैं तो वो बिल्कुल भी हैरान नहीं होता। लेकिन उसी शख्स को ये कहा जाए कि आने वाले 6 महीनों में वार्नर एक प्रतिभाशाली और जिम्मेदार कप्तान के रूप में उभरेंगे तो वो इस बात पर यकीन नहीं कर पाता।

ऐसा इसलिए क्योंकि शायद ही कोई असंयमित और आक्रामक खिलाड़ी क्रिकेट के इतिहास में एक सफल कप्तान बना हो। बहरहाल यहां भी अपवाद है, इसका सबसे अच्छा उदाहरण भारत के सीमित ओवरों के कप्तान एम.एस. धोनी हैं। अपने अंतराष्ट्रीय करियर के शुरूआती दौर में सबको हैरान करने वाले धोनी आई.सी.सी. विश्व कप, आई.सी.सी. विश्व टी-20 और आई.सी.सी. चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम करके भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे सफल कप्तान बने हैं। और अब डेविड वॉर्नर है जो धोनी की ही तरह अपनी कप्तानी के कौशल दिखा रहे हैं।

2016 में कप्तान बने डेविड वार्नर के लिए ये एक सुनहरा समय है। आईपीएल टूर्नामेंट के मध्य तक उन्होंने अपनी टीम सनराइजर्स हैदराबाद का कुशल नेतृत्व किया। इस टीम ने आगे चलकर खिताब अपने नाम किया और अब उन्होंने ऑस्टेलियाई टीम को अपनी अगुवाई में लगातार एकदिवसीय और टी-20 सीरीज में श्रीलंका के खिलाफ जीत दिलाई।

कप्तानी कभी भी आसान नहीं रही है, खासकर किसी ऑस्ट्रेलियाई के लिए जो एशिया में खेल रहा हो। गत दस सालों में ऑस्ट्रेलिया का बुरा दौर रहा जब उन्हें एशियाई दौरे पर एशिया की टीमों के साथ ही मुकाबला करना पड़ा। ऐसा ही कुछ दोबारा देखने को मिला जब कंगारू टीम स्टीव स्मिथ की अगुवाई में श्रीलंका के दौरे पर आई। गौरतलब है कि स्टीव स्मिथ की कप्तानी में यह टीम पिछले 14 मैच जीतती आई है।

ये बुरा दौर जारी रहा जब युवा श्रीलंकाई टीम ने ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप कर दिया। एकदिवसीय श्रृंखला शुरू हुई और 5 मैचों की इस सीरीज में ऑस्ट्रेलिया ने पहली जीत हासिल की। लेकिन अगले मैच में मजबूती के साथ वापसी करते हुए श्रीलंका की टीम ने ऑस्ट्रेलिया पर शानदार जीत हासिल की। तनाव एक बार फिर ऑस्ट्रेलियाई खेमे में लौट आया और आश्चर्यजनक रूप से कप्तान स्टीव स्मिथ को ऑस्ट्रेलिया वापस भेज दिया गया। इसके पीछे टीम प्रबंधन का ये कहना था कि दक्षिण अफ्रीका के महत्वपूर्ण दौरे से पहले स्मिथ को आराम की जरूरत है।

भले ही चयनकर्ता और टीम प्रबंधक ये कहते रहे कि ये फैसला टीम के हित में लिया गया है, लेकिन उन्हें क्रिकेट पंडितों और फैन्स की काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कप्तानी का भार डेविड वार्नर पर डाला गया और उन्होंने सभी की सोच को बदल कर रख दिया। ऑस्ट्रेलिया ने अंतिम तीनों एकदिवसीय मैच जीतते हुए, सीरीज पर 4-1 से कब्जा किया और इसके बाद टी-20 सीरीज में 2-0 से श्रीलंकाई टीम को क्लीन स्वीप किया।

डेविड वार्नर ने श्रीलंका की टीम के खिलाफ अपने 5वें एकदिवसीय मैच और बतौर कप्तान अपने तीसरे वनडे मुकाबले में एक शतक भी अपने नाम किया। उन्होंने कई दफा अपने खेल से साथी खिलाडि़यों को प्रेरित किया है। यद्यपि ग्लेन मैक्सवेल टी-20 सीरीज के असली सितारे रहे, लेकिन वार्नर ने अपनी सेना को अतुल्य तरीके से तैयार किया। दूसरे टी-20 मैच में उनके क्षेत्ररक्षण के कौशल ने कमाल दिखाया। जिसकी बदौलत कई मौकों को कैच में बदल कर टीम को जीत से हमकिनार किया। ये कुछ ऐसे प्रेरित करने वाले लम्हे होते हैं जो हर एक खिलाड़ी में एक नई उर्जा और नए जोश का संचार करते हैं, साथ ही उनमें आत्मविश्वास को बढ़ावा देते हैं जो उन्हें कठिन परिस्थितियों से उभारती है।

यहां तक कि इस साल आईपीएल में वार्नर ने अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए टीम को फाइनल तक पहुंचाया और व्यक्तिगत बल्लेबाजी कौशल के दम पर आईपीएल में 848 रन तथा 60.57 के बल्लेबाजी औसत के साथ टूर्नामेंट में दूसरे सर्वाधिक रन स्कोरर बने। वो पिछले 3 सालों से आईपीएल में कई मायनों में टीम के लिए अहम रहे, इसके साथ ही पिछले तीनों सत्रों में 500 रनों का आंकड़ा छूने में भी कामयाब रहे।

वार्नर की कप्तानी की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने कप्तान के रूप में एक अग्र-सक्रिय भूमिका निभाई है। वो हमेशा ही खेल में बने रहना चाहते हैं और कभी भी हार नहीं मानते, भले ही उनकी विपक्षी टीम का पलड़ा भारी हो। उनके लिए हर स्थिति जीत की स्थिति होती है। अगर उनसे कोई भूल हो जाए तो वो ये सुनिश्चित करते हैं कि ऐसी गलती दोबारा ना हो और सबसे मजेदार बात यह है कि वो अपनी कप्तानी का भरपूर आनंद लेते हैं और अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा रखते हैं।

एक आक्रामक और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से एक जिम्मेदार क्रिकेटर बनने के लिए वार्नर ने आक्रामकता के साथ संयम को अपनाया और उनके फॉर्म में आई बड़ी तब्दीली काबिलेतारीफ है। अपने निरंतर अच्छे खेल से वार्नर ने अपनी टीम के साथियों के लिए भी खेल का उच्च स्तर निर्धारित किया है, साथ ही ये सुनिश्चित किया है कि उनकी टीम में भी वैसा ही विश्वास बना रहे जैसा उनमें है। कप्तान के तौर पर अपने इस शानदार प्रदर्शन से उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं को एक नया सिरदर्द दे दिया है। एक तरफ स्टीव स्मिथ हैं जिन्होंने श्रीलंकाई दौरे से पहले बखूबी अपना काम किया तथा दूसरी ओर वार्नर हैं जिन्होंने कप्तान के तौर पर अपने अंदर छिपी असीमित क्षमता को दिखाया और अपने वादे को निभाया। वैसे ऐसे सिरदर्द चयनकर्ताओं के लिए अच्छे हैं।

जहां तक स्मिथ की बात की जाए तो उन्होंने 14 में से 7 टेस्ट मैच और 24 में से 15 एकदिवसीय मैचों में जीत दिलाई है जो कि बहुत अच्छा रहा है। यद्यपि, ज्यादातर जीते उन्हें अपने देश के मैदानों में मिली है। इस बीच इस बात पर ध्यान जाता है कि आखिर विदेशी सरजमीं पर कितने मुकाबलों में जीत हासिल हुई है। हाल ही में वार्नर ने दो सीरीज अपने देश से दूर एशियाई सरजमीं पर अपने नाम की। इसलिए अब चयनकर्ताओं के पास उनका नाम बतौर कप्तान के विकल्प के रूप में रहेगा। अगर भविष्य में स्मिथ अपने रिकॉर्ड को बेहतर ना कर पाएं तो हो सकता है कि वार्नर को जिम्मेदारियां सौंप दी जाए। आने वाले क्रिकेट शेड्यूल की बात करें तो वो स्मिथ के पक्ष में नजर आता है। आगामी फरवरी तक ऑस्ट्रेलिया अपने घरेलू मैदान में साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान और श्रीलंका से भिड़ेगी। आने वाले समय में स्मिथ को कप्तानी से हटाना असंभव-सा लगता है। लेकिन वहीं स्मिथ अगर विदेशी सरजमीं पर अपना ऐसा ही प्रदर्शन जारी रखते हैं तो ऑस्ट्रेलियाई सिलेक्टर वॉर्नर की कप्तानी क्षमता को मौका दे सकते हैं।

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