भारत को सिर्फ मैच जीतने के लिए "रैंक टर्नर" का सहारा नहीं लेना चाहिए : हरभजन

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© BCCI Media

भारत को सिर्फ मैच जीतने के लिए "रैंक टर्नर" का सहारा नहीं लेना चाहिए : हरभजन

ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि अगर घरेलू खेलों में 'रैंक टर्नर्स' की नीति का त्याग किया जाए तो विराट कोहली और अनिल कुंबले की सांझेदारी भारतीय क्रिकेट की छवि बदल सकती है। हरभजन का मानना है कि इससे भारतीय बल्लेबाज़ तथा तेज़ गेंदबाजों को घरेलू परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

अब तक, भारत में ऐसी नीति अपनाई गयी है जिसमें देश का दौरा करने वाली टीम पर दबाव बनाने के लिए उन पिचों का चयन किया जाता रहा है जिनमें टेस्ट के पहले दिन से ही परिस्थितियां स्पिनर्स के अनुकूल हो। वैसे तो इस नीति से भारत को कई बार जीत हासिल हुई है, लेकिन इसके कारण भारतीय बल्लेबाज़ और तेज़ गेंदबाजों को प्रदर्शन करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। पिछले साल हुए टेस्ट श्रृंखला में भारत के दक्षिण अफ्रीका को हारने के बाद, मीडिया के तर्कों में पिच एक अहम मुद्दा बन चुका था।

ऐसे में, हरभजन सिंह का मानना है कि भारत को रैंक टर्नर नीति को बदलना चाहिए ताकि बल्लेबाज़ एवं तेज़ गेंदबाजों को भी फायेदा मिल सके।

हरभजन ने पीटीआई से कहा, "पिछले चार-पांच सालों से, सभी टीम प्रबंधकों ने उन पिचों को अहमियत दी है जिनपर टेस्ट मैच तीन दिनों में ख़त्म हो जाए। लेकिन मेरे ख्याल से अनिल भाई और विराट, दोनों ही सकारात्मक सोच रखने वाले हैं, जो ऐसे पिचों पर टेस्ट मैच खेलना पसंद करेंगे, जिन पर खेलते हुए चौथे दिन की शाम या फिर पांचवे दिन के लंच के बाद के सेशन तक ही निर्णय तक पहुंचना संभव हो।"

टेस्ट मैचों में भारत के तीसरे सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी हरभजन ने कहा, "हमें अपनी सोच बड़ी रखनी चाहिए। ढाई अथवा तीन दिन में मैच जीतकर हम क्या हासिल कर रहे हैं? पिछले घरेलू श्रृंखलाओं में क्या हमने, हमारे उन बल्लेबाजों के साथ सही किया जो दक्षिण अफ़्रीकी स्पिनर के सामने मुश्किलों का सामना कर रहे थें?"

न्यू जीलैंड में इश सोडी और मिच सेंटनर जैसे खिलाड़ी हैं जो टर्निंग ट्रैक्स की नीति से चलने पर भारत के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।

भज्जी ने कहा, "कोटला में हुए आखिरी टेस्ट को लीजिये, भले ही अजिंक्य (रहाणे) और विराट (कोहली) ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन हमारे बाकी के बल्लेबाजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि अगर 'रैंक टर्नर' के तर्ज़ पर चलते रहे तो नागपुर में हुए विश्व कप टी20 के मैच की तरह यह आने वाले वक़्त में हमारे ऊपर ही भारी पड़ेगा, क्योंकि ऐसे परिस्थिति में मिच सेंटनर और इश सोडी सभी बल्लेबाजों को पस्त करने के लिए काफी होंगे।"

तेज़ गेंदबाजों की अहमियत को दर्शाते हुए उन्होंने कहा, "लोग इशांत की आलोचना करते हैं क्योंकि 70 टेस्ट मैच (69 टेस्ट) खेलकर भी वह महज़ 200 से अधिक (202) विकेट ही ले पाए हैं। लेकिन क्या किसी ने ये जानने की कोशिश की कि इशांत ने भारत में कितने ओवर गेंदबाजी की है? कितने ओवर उन्होंने नई गेंद से की है और कितने घुमने वाली पुरानी गेंदों से की है?"

"इशांत ने ज्यादा गेंदबाजी इसलिए नहीं की है क्योंकि हम अक्सर ऐसे पिच पर खेलते रहे हैं जिन पर पहले घंटे स्पिनर की आवश्यकता होती है। अगर उन्हें उस वक़्त एक नए बॉल के साथ गेंदबाजी नहीं दी जा रही जब सतह सख्त और नया है तो हम इशांत जैसे कर्मठ खिलाड़ी के साथ नाइंसाफी कर रहे हैं।"

हरभजन ने अमित मिश्रा का भी समर्थन किया, जो हाल ही में हुए दलीप ट्राफी में उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए थे।

भज्जी ने कहा, "अगर आप ध्यान से देखे, तो मिश्रा ने पहले दो दिन गेंदबाजी की थी जब पिच का सतह सबसे अधिक समान था और ऐसे में उन्होंने पुजारा और गंभीर जैसे बल्लेबाजों के खिलाफ गेंदबाजी की थी। माना की जडेजा ने बेहतर गेंदबाजी की थी लेकिन उन्होंने तीसरे, चौथे और पांचवे दिन पर गेंदबाजी की जब पिच की हालत काफी खराब हो चुकी थी।"

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