2007 में आज का दिन । जब युवराज सिंह ने एक ओवर में लगाये थे छः छक्के

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© Yuvraj Singh Facebook

2007 में आज का दिन । जब युवराज सिंह ने एक ओवर में लगाये थे छः छक्के

विश्व कप टी20 के सबसे पहले संस्करण में युवराज सिंह द्वारा खेले गए एक बेहतरीन टी20 पारी के नौ साल पूरे हो चुके हैं। मगर ऐसा लगता है जैसे ये कल की ही बात हो जब इस जोशीले भारतीय बल्लेबाज़ ने डर्बन के किंग्समेड में एक ओवर में लगातार छः छक्के मारकर इतिहास रचा था और देखने वालों के होश उड़ाए थे।

बात साल 2007 की है जिसकी शुरुआत, एक दिवसीय विश्व कप के ग्रुप स्टेजेस में बाहर होने के कारण, भारत के लिए निराशाजनक रही थी। विश्व कप में राष्ट्रीय टीम के ख़राब प्रदर्शन के कारण प्रशंसकों के बीच, टीम और खिलाड़ियों के प्रति, निराशा और आक्रोश का माहौल बना हुआ था। लेकिन उस वक़्त तक, शायद ही किसी को यह अंदाजा था कि इतनी ख़राब शुरुआत के बाद भी साल के अगले भाग में होने वाले पहले विश्व कप टी20 का खिताब भारत अपने नाम कर इतिहास रचेगा।

ओडीआई विश्व कप भारत के लिए बेहद अफसोसजनक रहा था। इस प्रदर्शन के बाद राहुल द्रविड़ ने कप्तानी से इस्तीफा दिया था तथा ग्रेग चैपल को भारतीय कोच के पद से हाथ धोना पड़ा था। बीसीसीआई उस साल सितम्बर में होने वाले टी20 विश्व कप में किसी प्रकार का खतरा नहीं लेना चाहता है जिसके फलस्वरूप टीम की कायापलट कर दी गयी। आखिरकार निर्णय लिया गया की टी20 विश्व कप में एक पूर्णतयः नई और नौजवान टीम भाग लेगी जिसका समर्थन सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों ने भी किया।

बाकी देशों की टीमों के अनुभवी एवं वरिष्ठ खिलाड़ियों का सामना करने लिए भारत के युवा और अनुभवहीन खिलाड़ियों को भेजने के इस निर्णय को भी, ज़्यादातर फैसलों की तरह, काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। अब सबसे अहम सवाल यह था कि जब तेंदुलकर और द्रविड़ दोनों ही टीम से बाहर हैं, तब टीम की कप्तानी किसे सौंपी जाए? यूँ तो विकल्प के तौर पर वीरेंदर सहवाग और युवराज सिंह का नाम प्रस्तावित किया गया। मगर इन सबको खारिज करते हुए दक्षिण अफ्रीका का दौरा करने वाली इस टीम की कप्तानी महेंद्र सिंह धोनी को सौंपी गयी।

यह बीसीसीआई द्वारा किये गए एक और प्रयोग की तरह लग रहा था जिसके नाकामयाब होने का अनुमान- प्रशंसक से लेकर समीक्षक तक - सभी लगाये बैठे थे। लेकिन इसके बाद जो हुआ वह देश के करोड़ों जनता के मन गौरवपूर्ण यादगार के तौर पर बस गया है। सभी आलोचनाओं को हराकर भारत ने टी20 विश्व कप की ट्राफी को हासिल किया और साथ ही जीत की एक ऐसी गाथा भी लिखी जो आज भी पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। इस गाथा के नायक युवराज सिंह थे जिनके द्वारा डर्बन के किंग्समेड में स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर के सभी गेंदों पर लगाये गए छः छक्के इस कहानी का अहम अंश है। 

वह इस टूर्नामेंट का 21वा मैच था। भारत इंग्लैंड के साथ सुपर 8 के स्टेज में एक ऐसा मैच खेल रहा था जिसमें दोनों देशों की स्थिति करो या मरो की थी। भारत और इंग्लैंड सुपर 8 के पड़ाव के अपने पहले मैच में, क्रमशः न्यू जीलैंड और दक्षिण अफ्रीका से हार चुके थे। जिसके फलस्वरूप, दोनों टीमों को टूर्नामेंट में बने रहने के लिए जीत की आवश्यकता थी। भारत ने टॉस जीतकर, पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया क्योंकि पिच की परिस्थिति बल्लेबाजों के अनुकूल थी। पहले विकेट पर सहवाग और गंभीर की सांझेदारी ने भारत को 136 रनों की एक बेहतरीन शुरुआत दी। पहली पारी के 15वे ओवर में क्रिस ट्रेमलेट ने सहवाग का विकेट लेकर इंग्लैंड को उसकी पहली सफलता प्रदान की। हालांकि तब तक 52 गेंदों में 68 रन बनाकर सहवाग इंग्लैंड का प्रयाप्त नुक्सान कर चुके थे। मगर, इसके बाद, गंभीर (58) और उथप्पा (6) के जल्द ही आउट होने के कारण भारत को भी नुक्सान का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड के गेंदबाजों के सुधरते प्रदर्शन के बीच भारत 17वे ओवर तक 155/3 के स्कोर पर पहुंचा था। यह वक़्त था, युवराज सिंह के क्रीज़ पर आने का, जिनका स्वागत दर्शकों बड़े ही जोश के साथ किया था। आखिर उन हालातों में भारत को सफलता दिलाने के लिए वह उम्मीद के एक किरण थे।

ट्रेमलेट के ओवर की दो गेंदें और बाकी थी जिनका सामना युवराज ने किया। इंग्लैंड के लम्बे और ताक़तवर दिखने वाले गेंदबाज़ ने युवराज के सामने ऑफ स्टंप पर अच्छी गति की शोर्ट पिच गेंदें डाली। ट्रेमलेट ने युवराज पर टिपण्णी की जिसका जवाब उन्होंने अपने बल्ले से दिया। अगली ही गेंद में एक बेहतरीन स्ट्रोक के साथ युवराज ने कवर पर से एक चौका लगाया। अगला ओवर एंड्रू फ़्लिंटॉफ़ को सौंपा गया जिसमें मैच में आगे आने वाले तूफ़ान की दस्तक युवराज ने दी थी। युवराज ने फ़्लिंटॉफ़ के ओवर के चौथे और पांचवे गेंद में लगातार दो चौके लगाये जिससे बौखलाकर वह युवराज के साथ बहस करने लगे। फ़्लिंटॉफ़ को इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि ऐसा करके उन्होंने युवराज के गुस्से की आग को सही दिशा में हवा दी है जिसका परिणाम टी20 क्रिकेट के अब तक की सबसे बेहतरीन पारी के रूप सामने आने वाला था।

भारत 171/3 के स्कोर पर था और क्रीज़ पर 14(6) रनों के साथ युवराज और 7(6) रन बनाकर धोनी मौजूद थे। मैच का 19वा ओवर था जिसमें गेंद करने आये स्टुअर्ट ब्रॉड। ओवर की पहली गेंद एक अच्छी लेंग्थ पर डाली गयी थी जिसे डीप मिड विकेट पर से के ज़बरदस्त चक्के में तब्दील कर दिया गया। जब दुसरे गेंद पर युवराज ने बैकवर्ड स्क्वायर लेग पर से चक्का लगाया, तब युवा खिलाड़ी ब्रॉड दबाव में आ गए। कप्तान कॉलिंगवुड के साथ बातचीत होने के बाद ब्रॉड ने तीसरा बॉल डाला। इस बार गेंद ऑफ स्टंप के बाहर थी जिसपर युवराज ने डीप एक्स्ट्रा कवर पर से एक और चक्का जड़ दिया। अगली गेंद डालने में ब्रॉड ने ज्यादा समय नहीं लिया। इस बार उन्होंने एक वाइड फुल टॉस डाला जिसे युवराज ने बड़े ही आसानी से छक्के में बदल दिया।

स्टेडियम में मौजूद सभी क्रिकेट का इतिहास रचता हुआ देखने के लिए तैयार हो गए। इस बीच फ़्लिंटॉफ़, कॉलिंगवुड, ब्रॉड समेत लगभग टीम के सभी खिलाड़ी मैदान युवराज के आक्रामक प्रदर्शन को रोकने के उपायों पर विचार करने लगे। दुर्भाग्यवश, किसी के पास कोई सुझाव नहीं था। ब्रॉड ने ओवर की पांचवी गेंद डाली और युवराज ने उसे भी मिड विकेट पर से उड़ाकर बाउंड्री के पार भेज दिया। बाउंड्री पर तैनात डिमिट्री मैस्कारेन्हास महज़ दर्शक बनकर रह गए। ऐसा लग रहा है था मानो इस मैच के ज़रिये युवराज नेटवेस्ट सीरीज के उस मैच का बदला ले रहे थे जिसमें मैस्कारेन्हास ने युवराज के लगातार पांच गेंदों पर चक्के मारे थे। और बदले लेने के इस प्रक्रिया में वह उनसे एक कदम आगे निकल गए।

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