साहा: मुझे आशा है कि निचले क्रम में मेरी और अश्विन की आपसी समझ भारत कि सहायता करेगी

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© Official FB - BCCI

साहा: मुझे आशा है कि निचले क्रम में मेरी और अश्विन की आपसी समझ भारत कि सहायता करेगी

वेस्ट इंडीज में लाभदायक साझेदारी के बाद वृद्धिमान साहा आशा करते हैं कि उनकी निचले क्रम अश्विन के साथ आपसी समझ भारतीय टीम के लिया लाभकारी सिद्ध होगी. विकेटकीपर-बल्लेबाज़ साहा ने ये भी बताया क्यों भारतीय टीम में विदेशी कोच के मुकाबले भारतीय कोच को तरजीह दी जाती है |

वृद्धिमान साहा को अपने करियर में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए देर से मौका मिला. लेकिन मौका मिलने पर साहा ने अपनापहला शतक बनाया 6वें विकेट के लिए अश्विन के साथ 213 रन की साझेदारी की.

“अश्विन मेरे मुकाबले अधिक समय से खेल रहे हैं.परन्तु पिछली कुछ श्रृंखलाओं में, जिनका मैं हिस्सा रहा हूँ, हमारी आपसी बेहतर हुई है है. मुझे आशा है कि इस से टीम को लाभ होगा.

“मैं उन्हें बताता हूँ किस बल्लेबाज़ को किस लाइन पर गेंद डालनी है, कौन सी जगह बेहतर है. मैं उस पारी के बात कर सकता हूँ जिसमे उन्होंने मुझे कहा कि अपना समय लें और ख़राब गेंद का इंतज़ार करें. हम वही कर रहे थे. विकेटकीपिंग के समय मेरी और अश्विन की आपसी समझ का फायदा हमारी विकेट के दौड़ पर भी हुआ है,”साहा ने कहा.

साहा ने ये भी कहा कि भारतीय स्पिन गेंदबाजों में अश्विन के लिए विकेटकीपिंग करना सबसे कठिन काम है.

“अश्विन की लम्बाई के कारण उन्हें घूमने वाली पिच पर तेज़ घुमाव और उछाल मिलता है. जडेजा हमेशा अधिक घुमाव नहीं देते हैं और अमित की गति और उछाल कम रहती है. तो अश्विन सबसे मुश्किल हैं.”

साथ ही साहा ने उमेश यादव कोभारतीय तेज़ गेंदबाजों में सबसे तेज़ बताया.”लगातार उमेश यादव ही सबसे तेज़ हैं. हलाकि ये स्पेल दर स्पेल बदलता रहता है. कभी कभी जब इशांत, जो उछाल उनको मिलता है, भी काफी तेज़ हो जाते हैं.”

बंगाल के इस खिलाडी अपना काम आसान करने का श्रेय कोच अनिल कुम्बले और कप्तान विराट कोहली को दिया है. ”उन्होंने मुझे हमेशा कहा है कि शतक ज्यादा दूर नहीं है. पूरीटीम खुश थी जब मैं उस मुकाम पर पंहुचा.”

“अनिल भाई को पता है खिलाडियों से कैसे जुड़ना है. वो हमे हमेशा बताते है कि हर मैच को किस तरीके से खेलना है. वो अधिक बदलाव नहीं करते हैं. उनका मानना है सबको अपना स्वाभाविक खेल खेलना चाहिए.” आईएएनएस के अनुसार साहा ने बताया.

साहा ये भी मानते हैं एक विदेशी कोच के मुकाबले एक भारतीय कोच अधिक आसानी से टीम को समझ सकते हैं. “अनिल भाई ने हमें काफी समय से हमें खेलते देखा है. यह किसी विदेशी कोच के लिए मुमकिन नहीं है.भारतीय हमें आईपीएल और घरेलू मैच में देखते हैं. इसलिए विदेशी कोच के मुकाबले भारतीय कोच होना बेहतर है.”

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