क्या न्यूजीलैंड भारत के खिलाफ ‘इंग्लैंड 2012’ कर सकती है?

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क्या न्यूजीलैंड भारत के खिलाफ ‘इंग्लैंड 2012’ कर सकती है?

भारतीय टीम के बारे में ये बातें हुआ करती थी की इनको घरेलू मैदान पर हरा पाना असंभव है और भारतीय बल्लेबाजों से बेहतर स्पिन को कोई नहीं खेल सकता। मगर 2012 में एलियेस्टर कुक की अगुवाई में भारत आई इंग्लैंड टीम ने इस बात से पर्दा उठाया कि कोई तब तक ही अजेय है जब तक उसे हरा ना दिया जाए।

विपक्षी टीमों के मुकाबले भारत का पलड़ा उस वक्त हमेशा भारी दिखा जब उन्होंने घरेलू मैदान पर टेस्ट मुकाबले खेले, इन आंकड़ों में न्यूजीलैंड भी शामिल है। मगर इस बार न्यूजीलैंड की संतुलित टीम को देखकर लगता है कि वो भारत के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। उन्होंने खासतौर से टीम में दो युवा स्पिनरों को जगह दी है।

भारतीय टीम के पास हमेशा ये ताकत रही है कि वो घरेलू मैदान पर विपक्षी टीम का सामना कर पाए। पिछले कुछ सालों से टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम का दबदबा रहा है। हाल ही में कैरेबियाई टूर की यादें भी ताजा है। अब भारतीय टीम कीवी खिलाड़ियों के साथ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए तैयार है। आंकड़ों की बात करें तो भारतीय सरजमीं पर इंडिया और न्यूजीलैंड के बीच 31 टेस्ट मुकाबले हुए हैं जिनमें न्यूजीलैंड सिर्फ दो बार ही भारत को हराने में कामयाब हो पाया। ये मौका उन्हें 1988 में मिला था। न्यूजीलैंड ने भारत का आखिरी दौरा 2012 में किया था, उस वक्त भी उन्हें भारत के हाथों 2-0 से श्रृंखला गंवानी पड़ी थी। इसमें दो राय नहीं है कि कीवी टीम बल्लेबाजी और गेंदबाजी के डिपार्टमेंट में काफी अच्छी थी लेकिन भारतीय टीम ने उनसे कहीं बेहतर प्रदर्शन किया था।

बहरहाल उस वक्त न्यूजीलैंड की टीम ज्यादा अनुभवी नहीं थी। केन विलियमसन ने अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर की शुरूआत ही की थी। मौजूदा समय में मार्टिन गुप्टिल न्यूजीलैंड के तीनों क्रिकेट प्रारूपों का अहम हिस्सा हैं, 2012 के बाद से ही उनके बल्ले ने कई रिकाॅर्ड तोड़े हैं। ट्रेंट बोल्ट एक ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने की वजह से भारतीय माहौल का अच्छा अनुभव मिल चुका है। चार साल पहले तक लड़खड़ाते हुए मध्यक्रम को संभालने के लिए न्यूजीलैंड के पास फ्लिन और फ्रैंकलीन जैसे खिलाड़ी थे। एशिया दौरे के वक्त फिरकी गेंदबाज के तौर पर वो जीतन पटेल को टीम में शामिल करते थे। मगर भारत के खिलाफ उसके ही घर में उसे शिकस्त देने के लिए ये सभी योजना कमजोर और नाकाफी थी।

उन दिनों ये किस्से मशहूर थे की भारत को उसके ही मैदान पर हरा पाना नामुमकिन है और स्पिन गेंदबाजी को भारतीय बल्लेबाजों से बेहतर कोई नहीं खेल सकता। मगर 2012 में न्यूजीलैंड दौरे के बाद, एलियेस्टर कुक के नेतृत्व वाली इंग्लैंड की टीम ने पूरी दुनिया के सामने ये उजागर कर दिया की आप तब तक अजेय हैं जब तक आपको हरा ना दिया जाए। आप तब तक अच्छे हैं जब तक आपसे बेहतर किसी और ने नहीं किया हो। भारत में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई 4 टेस्ट मैचों की सीरीज भारतीय खिलाड़ियों को उनकी हकीकत से रूबरू कराने का जरिया बनी। इंग्लिश खिलाड़ियों ने बड़े ही आराम से भारतीय शेरों को उन्हीं की मिट्टी में मिला दिया। इस ऐतिहासिक जीत की इबारत लिखने में फिरकी गेंदबाज ग्रीम स्वान और मोंटी पानेसर की अहम भूमिका रही।

अहमदाबाद में खेले गए पहले मुकाबले में भारतीय टीम ने 9 विकेट से जीत हासिल की, वहीं इंग्लैंड टीम मैनेजमेंट ने ये फैसला कर लिया था की भारत को भी वो हार का कड़वा स्वाद जरूर चखाएंगे। दूसरे टेस्ट मुकाबले में मोंटी पानेसर को मौका देते हुए स्वान के साथ भेजा, जिन्होंने पहले मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों के विकेट निकाले थे। स्वान और पानेसर की जोड़ी ने भारतीय बल्लेबाजों को अपनी फिरकी में उलझा कर रख दिया। पहले टेस्ट मुकाबले में जंग लग चुकी तलवार की तरह नजर आने वाली इंग्लैंड की टीम को स्वान और पानेसर की गेंदबाजी ने तेज धार और चमक दी। इंग्लैंड टीम में नई जान डाल चुके इन दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने जेम्स एंडरसन जैसे दूसरे गेंदबाजों को भी प्रदर्शन सुधारने के लिए प्रेरित किया। भारतीय स्पिन गेंदबाजी विपक्षी टीम के सामने असहाय नजर आई। शानदार बल्लेबाजी करते हुए एलियेस्टर कुक ‘मैन आॅफ द सीरिज’ बनें। इंग्लैंड के जुझारू खिलाड़ियों ने पहला टेस्ट मुकाबला गंवाने के बावजूद दमदार वापसी करते हुए ये श्रृंखला 2-1 से अपने नाम की।

इस सीरीज से ये साबित हो गया की एक टीम अगर मैदान पर अपना सर्वस्व झोंकने के लिए तैयार है तो उसे किसी भी हालात में जीतने से नहीं रोका जा सकता है। मौजूदा कीवी दल एक बार फिर 2012 में भारत आई इंग्लैंड टीम की याद दिला रहा है। ईश सोढ़ी और मिचेल सेन्टनर के तौर पर न्यूजीलैंड के पास उम्दा स्पिन जोड़ी है जो भारतीय बल्लेबाजों के रनों पर लगाम लगा सकती है। आईसीसी वर्ल्ड टी20 में सेन्टनर और सोढ़ी की जोड़ी ने भारतीय टीम के साथ क्या किया था उसे कोई भूला नहीं है। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में भारत के खिलाफ धमाकेदार जीत सुनिश्चित करने के लिए इस जोड़ी ने मिलकर सात विकेट झटके। भारतीय परिवेश में गेंद के साथ अपने हुनर को दोबारा साबित करने के लिए ये एक अच्छा मौका है।

मार्टिन गुप्टिल, केन विलियमसन और राॅस टेलर जैसे अनुभवी खिलाड़ी न्यूजीलैंड के बल्लेबाजी शोबे को मजबूत बनाते हैं। टीम में इनकी मौजूदगी दूसरे बल्लेबाजों के लिए काफी अहम है। टीम के युवा खिलाड़ी हेनरी निकोलस ने बल्ले से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है और ये आने वाले समय में कीवी टीम का महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनने का माद्दा रखते हैं। बीजे वटलिंग की टीम में खास भूमिका है, वो बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग के जरिए टीम को मजबूती दे रहे हैं। 42 टेस्ट मुकाबलों में वो 6 शतक अपने नाम कर चुके हैं। टीम के पास ल्यूक राॅन्ची के तौर पर कीपिंग के लिए एक और विकल्प मौजूद है। युवा खिलाड़ी टाॅम लेथम और जेम्स नीशाम अपने इस दौरे को जरूर यादगार बनाना चाहेंगे।

हमेशा की तरह इस बार भी तेज गेंदबाजी का दारोमदार टीम साउदी और ट्रेंट बोल्ट के कंधों पर है। इन दोनों खिलाड़ियों ने गेंद के साथ अपनी क्षमता को कई मौकों पर साबित किया है। आईपीएल में खेलने का अनुभव इनके लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि ये भली-भांति जानते हैं कि इस परिवेश में भारतीय बल्लेबाजों के लिए किस लाईन और लेंथ में गेंदबाजी करनी है। नील वेग्नर कीवी टीम के लिए तीसरे पेसर की भूमिका निभा सकते हैं। गौरतलब है की नील ने 19 टेस्ट मैचों में 74 विकेट हासिल किए हैं। वैसे टीम में तीसरे तेज गेंदबाज की जगह के लिए नील के अलावा मार्क क्रैग और डग ब्रेसवेल के बीच जंग जारी है।

क्या न्यूजीलैंड की टीम एक बार फिर प्रेरणादायक प्रदर्शन करके टेस्ट क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ पाएगी या भारत अपनी श्रेष्ठता बरकरार रख पाएगी, ये सब निर्भर करेगा की कौन सी टीम अपनी रणनीति और हुनर को मैदान पर उतार पाती है। इस सीरीज में भारत की उच्चता दाव पर लगी है वहीं दूसरी और न्यूजीलैंड के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। इस वजह से भारतीय खेमे पर दबाव होगा जिसका फायदा युवा कीवी खिलाड़ी लेना चाहेंगे। ये सीरीज सोढ़ी, सेन्टनर और लेथम जैसे युवा खिलाड़ियों का करियर बना भी सकती हैं या उसे बिगाड़ सकती है। लेकिन, एक बात निश्चित है कि ये सीरीज क्रिकेट के दीवानों के साथ-साथ खेल पंडितों को भी हमेशा याद रहने वाली है।

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