तेज़ गेंदबाजों को रिवर्स स्विंग की बारीकियों को समझना होगा: जवगल श्रीनाथ

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तेज़ गेंदबाजों को रिवर्स स्विंग की बारीकियों को समझना होगा: जवगल श्रीनाथ

पूर्व भारतीय तेज़ गेंदबाज़ जवगल श्रीनाथ को लगता है कि घरेलू लम्बे सत्र से मौजूदा भारतीय तेज़ गेंदबाजों को लाभ मिलेगा क्योंकि भारत के बेजान पिचों पर उन्हें काफी दिक्कत होती है। श्रीनाथ ने यह भी कहा है कि किसी तेज़ गेंदबाज़ के लिए भारत के लिए निरंतर खेलने का मूल मंत्र सकारात्मक प्रवृत्ति है।

1990 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने वाले जवगल श्रीनाथ अब भी देश के बेहतरीन तेज़ गेंदबाजों में से एक माने जाते हैं। नई गेंद के मामले में सबसे भरोसेमंद गेंदबाजों में से एक, श्रीनाथ ने भारत के लिए 67 टेस्ट खेले जिनमें उन्होंने 236 विकेट हासिल किये।

अच्छे रिवर्स स्विंग डालने के तरीकों पर बुधवार को श्रीनाथ ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए गए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा, "अगर आप भारत में होने वाले टेस्ट मैच का अध्ययन करेंगे, तो आप देखेंगे कि सबसे अधिक विकेट रिवर्स स्विंग से ही मिलते हैं, ख़ासकर अगर दिसम्बर से जनवरी के बीच का महिना चल रहा हो। भोर तथा देर शाम की परिस्थितियां तेज़ गेंदबाजों के पक्ष में होती हैं। मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि हमारी परिस्थितियों में नार्मल स्विंग से कहीं ज्यादा फायेदेमंद रिवर्स स्विंग होती है। भारतीय विकेट हमेशा से ही रिवर्स स्विंग के लिए उपयुक्त है और यह गेंदबाजों पर है कि वे आने वाले अवसरों को कैसे हासिल करे।"

श्रीनाथ ने भारतीय तेज़ गेंदबाजों को यह सलाह दी है कि रिवर्स स्विंग डालने के लिए दिन के दौरान उन्हें अनुकूल परिस्थितियों की तलाश करनी होगी।

"तेज़ गेंदबाजों को रिवर्स स्विंग की बारीकियों को समझने के लिए तैयार रहना होगा; इसका पता लगाना ज़रूरी है कि कब परिस्थितियां उनके पक्ष में हैं। रिवर्स स्विंग आपको सपाट सतहों पर भी मदद कर सकती है।"

स्थायी रूप से भारतीय टीम का हिस्सा बनने वाले तेज़ गेंदबाजों के सामने हमेशा से ही दिक्कतें आती रही हैं क्योंकि वे कई बार टीम से अन्दर-बाहर होते रहे हैं। श्रीनाथ ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजों की तरफ से एक आशावादी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।  

"अगर वे टेस्ट मैच क्रिकेट को सपाट बेजान पिच पर मेहनत कराने वाले एक लम्बे और थकाने वाले खेल की तरह देखेंगे तो बिलकुल ऐसा ही होगा। नकारात्मक सोच से किसी का भला नहीं हुआ है। ऐसी सोच के साथ, कोई दो मैच खेल पायेगा और फिर कोई और उसे विस्थापित करेगा और आगे यही सिलसिला चलता रहेगा। हर गेंदबाज़ को हाथ खड़े करके टीम में शामिल होने की इच्छा को प्रकट करना चाहिए। आगे आने वाले 13 खेलों में शामिल होने की इच्छा उनमें होनी चाहिए," उन्होंने कहा।

श्रीनाथ फ़िलहाल आईसीसी में मैच रेफ़री के तौर पर कार्यरत हैं।

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