धौनी को कप्तानी से हटाने पर हुई थी चर्चा : संदीप पाटिल

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धौनी को कप्तानी से हटाने पर हुई थी चर्चा : संदीप पाटिल

भारतीय क्रिकेट के चयन समिति के पूर्व अध्यक्ष संदीप पाटिल ने खुलासा किया है कि धौनी ने जब 2014 में टेस्ट टीम से संन्यास लिया था, तब उनके वनडे कप्तान बने रहने पर काफी बहस हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि सचिन तेंदुलकर के बाद और कई खिलाड़ी वैसे ही फेयरवेल के बारे में सोचने लगे थे, पर ऐसा संभव नहीं है ।

मएस धौनी 2014 में प्रदर्शन को लेकर काफर दबाव में थे, लेकिन उनके टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के कदम ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। धौनी ने दिसंबर, 2014 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सीरीज के बीच में संन्यास लेने की घोषणा की थी। भारत उस समय सीरीज में 0-2 से पीछे चल रहा था। विराट कोहली, जो उस समय भारतीय टीम के उपकप्तान थे को बीच सीरीज में कप्तानी सौंपी गयी। चयनकर्ता भी धौनी के इस फैसले से हतप्रभ थे। 

पाटिल ने एबीपी न्यूज से कहा, ‘बेशक हमने इस पर (धौनी को कप्तानी से हटाने पर) चर्चा की थी, लेकिन हमने सोचा कि इसके लिए समय सही नहीं है, क्योंकि विश्वकप (2015) पास में है।’उन्होंने कहा, ‘हमें महसूस हुआ कि नये कप्तान को कुछ समय दिया जाना चाहिए। विश्वकप को ध्यान में रखते हुए हमने धौनी को कप्तान बनाये रखा। मेरा मानना है कि विराट को सही समय पर कप्तानी मिली। विराट छोटे प्रारूपों में भी टीम की अगुवाई कर सकता है, लेकिन अब इसका फैसला नयी चयनसमिति को करना होगा।’

संदीप पाटिल ने महेंद्र सिंह धौनी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले को हैरान करनेवाला बताया, क्योंकि टीम तब ऑस्ट्रेलिया में जूझ रही थी। उन्होंने कहा, ‘वह कड़ी सीरीज थी। मैं यह नहीं कहूंगा कि धौनी एक डूबते जहाज के कप्तान थे, लेकिन चीजें हमारे अनुकूल नहीं हो रही थीं। ऐसे में हमारा एक सीनियर खिलाड़ी संन्यास लेने का फैसला करता है। यह हैरान करने वाला था, लेकिन आखिर में यह उनका (धौनी का) निजी फैसला था।’

संदीप पाटिल ने कहा कि धौनी का निर्णय टीम के पक्ष में था। हमने उनसे पूछा कि आप सीरीज के बीच में ऐसा क्यों कर रहे हैं, तो धौनी ने बड़े ही शालीनता से कहा, ‘मेरे और टीम की ओर से एक सेट लेवल के ऊपर प्रदर्शन करना होता है। अगर ऐसा नहीं हो पा रहा है, तो फिर बदलाव की जरूरत है और इस बदलाव के लिए ही मैं यह कर रहा हूं।’

पाटिल ने कहा कि बहुत कम खिलाड़ी ऐसा करने की हिम्मत रखते हैं। सामान्यत: खिलाड़ी यही सोचता है कि उसे एक सीरीज या एक और साल अधिक खेलने को मिल जाये।

पाटिल ने सचिन तेंडुलकर के संन्यास वाले क्षण को भी याद किया। 

उन्होंने कहा, ‘दिसंबर, 2012 में नागपुर टेस्ट में सचिन जल्दी आउट हो गये थे। चयनकर्ताओं का सोचना था कि हमें सचिन के पास जाकर बात करनी चाहिए कि वे इस बारे में क्या सोच रहे हैं। ये काम मुझे मिला क्योंकि मैं उस समय चेयरमैन था। हंस पाजी भी मेरे साथ थे। हमने उनसे बात की और उनकी राय जाननी चाही।’

उन्होंने कहा कि हालांकि, सचिन को उन्होंने अपवाद माना और वे संन्यास कब लेंगे ये उन पर छोड़ा गया था। लेकिन बाद में हमने फीलिंग्स से ज्यादा नियम पर ध्यान देना शुरू कर दिया।

वीरेंद्र सेहवाग ने रिटायरमेंट के बाद आरोप लगाया था कि उन्हें वैसा फेयरवेल नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। इस बारे में पाटिल ने कहा कि सबको सचिन जैसा फेयरवेल देना संभव नहीं है। मैं भी एक समय में इस दौर से गुजरा हूं। हालांकि यह मुख्य रूप बीसीसीआइ पर निर्भर करता है, न कि खिलाड़ी पर। वीरेंद्र सेहवाग और सौरभ गांगुली को भी सचिन जैसा फेयरवेल नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि सचिन के बाद कई खिलाड़ी ऐसा सोचने लगे थे कि उन्हें भी वैसा ही फेयरवेल मिलेगा। पर यह संभव नहीं और इसलिए होता भी नहीं है। फिर खिलाड़ी बुरा मान जाते हैं और वैसी बाते भी बोल जाते हैं जो उन्हें नहीं बोलनी चाहिए।

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