तीन साल तक बाहर रहने के नियम से कोई पूर्व क्रिकेटर बीसीसीआई से नहीं जुड़ेगा: रवि शास्त्री

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तीन साल तक बाहर रहने के नियम से कोई पूर्व क्रिकेटर बीसीसीआई से नहीं जुड़ेगा: रवि शास्त्री

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और निदेशक रह चुके रवि शास्त्री ने लोढ़ा समिति द्वारा प्रस्तावित तीन साल के ‘कूलिंग ऑफ’ के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पूर्व क्रिकेटर बीसीसीआई प्रशासन में जुड़ने से बचेंगे। शास्त्री ने कहा कि पैनल के सुझाव पूर्णत: मान लिये गये तो क्रिकेट का नुकसान होगा।

जनवरी में लोढ़ा समिति की रिपोर्ट आने के बाद से बीसीसीआइ इसका विरोध करते हुए कह रही है कि इससे क्रिकेट को नुकसान होगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को समिति की रिपोर्ट को हरी झंडी दिखाते हुए बीसीसीआइ और सभी राज्य के संघों को इसे लागू करने के लिए दो डेडलाइन तय कर दिये, जोकि क्रमश: 30 सितेबर और 30 दिसंबर है।

भारतीय टीम के पूर्व निदेशक रवि शास्त्री ने लोढ़ा समिति द्वारा प्रस्तावित तीन साल के ‘कूलिंग ऑफ’ (दो बार पद पर आसीन होने के लिए तीन साल का अंतर) के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पूर्व क्रिकेटर बीसीसीआई प्रशासन में जुड़ने से बचेंगे।

उन्होंने कहा, ‘मैं बीसीसीआइ से क्यों जुड़ूंगा? कोई भी खिलाड़ी क्यों इससे जुड़ना चाहेगा? यदि मेरे पास सकारात्मक सोच और रचनात्मक रवैया है। मैं तीन साल तक उस पर काम करूं और उसके बाद जो अगला प्रसाशक होगा, वह मेरे काम को उतनी ही निष्ठा और सकारात्मकता से करेगा। इसकी गारंटी कौन लेगा। यदि मैं अच्छा काम करूं, तो मेरे काम की कद्र की जानी चाहिए। छह साल बुरा नहीं है। छह साल के बाद यदि आपको तीन साल के लिए बाहर बैठना पड़े, तो भी ठीक है। आप उसके बाद वापसी कर सकते हैं।’ रवि शास्त्री ने ये बातें संजय मांजरेकर से इएसपीएन द्वारा भारत के 500वें मैच के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहीं।

शास्त्री ने लोढ़ा समिति के 70 साल में बीसीसीआइ के ऑफिशियल के रिटायरमेंट पर भी सवाल खड़ा किया।

शास्त्री ने कहा कि हमारे बोर्ड में दो लोग ऐसे हैं, जो 70 की उम्र सीमा पार कर चुके हैं। पर वे अच्छा काम कर रहे हैं। मैं किसी को टार्गेट नहीं कर रहा। लोग लानते हैं कि मैं किसकी बात कर रहा हूं।

शास्त्री ने पांच सदस्यीय चयनकर्ता के पैनल का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब मैं खेलता था तब शायद तीन व्यक्ति का पैनल सही होता, पर अब क्रिकेट आगे बढ़ चुका है। अब तीनों फॉर्मेट में भारत में जितने खिलाड़ी खेलते हैं, उतना क्रिकेट खेलनेवाले अन्य देशों की क्रिकेट खेलनेवाली जनता को एक साथ जोड़ने पर भी नहीं हो पायेगा।

यदि ऑस्ट्रेलिया के पास तीन लोगों का चयनकर्ताओं का पैनल है, तो यह ठीक है। वहां की जनसंख्या मात्र 20 मिलियन है। यहां के लिए पांच से कम में काम नहीं हो सकता। यहां कश्मीर से कन्याकुमारी तक और अहमदाबाद से गुवाहाटी तक चयनकर्ता यात्रा करते-करते ही थक जायेंगे। और फिर भी अपना का पूरी तरह से नहीं कर पायेंगे।

शास्त्री ने यह भी कहा कि पूरी तरह समिति की बातों पर अमल करने का मतलब खुद को पांच साल पीछे ले जाना होगा। जहां दूसरे देश इसे आगे ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, हम इसे पीछे की ओर जायेंगे। यह सही नहीं है।

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