एन श्रीनिवासन: शशांक मनोहर ने बीसीसीआई का फायेदा उठाया

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एन श्रीनिवासन: शशांक मनोहर ने बीसीसीआई का फायेदा उठाया

पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने आईसीसी के अध्यक्ष, शशांक मनोहर को, बोर्ड को उस वक़्त छोड़ने के लिए फटकार लगाया, जब सुप्रीम कोर्ट ने उस पर लोढा समिति के नियम लागू करने के आदेश दिए थे। उन्होंने बीसीसीआई द्वारा लोढा मामले पर लिए जाने वाले सभी कदमों का समर्थन करने की बात भी कही।

बीसीसीआई के लिए मौजूदा वक़्त कुछ आसान नहीं चल रहा। जहाँ एक तरफ लोढा समिति के सुझाव उस पर थोपे जा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ आईसीसी के अध्यक्ष शशांक मनोहर ने, अंतर्राष्ट्रीय बोर्ड में, भारतीय बोर्ड के लाभों के विरोध में कार्य करने का निर्णय लिया है। ऐसे मुश्किल के वक़्त में, भारतीय बोर्ड और उसके वे सदस्य, जिन्होंने 2015 में एन श्रीनिवासन की जगह मनोहर की अध्यक्ष बनाने की बात सामने रखी थी, अब अपने बचाव के लिए, तमिल नाडू क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष का शरण ले रहे हैं। जब उनसे लोढा समिति के सुझावों के लागू होने का आदेश जारी करने के बाद, बीसीसीआई अध्यक्ष के पद से मनोहर के इस्तीफे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "अधिकारिक पद पर मौजूद लोगों समेत बीसीसीआई के सदस्यों ने शशांक के बारे में अपनी राय रखी है। हाँ, मैं भी मानता हूँ कि उन्होंने बीसीसीआई का फायेदा उठाया है।"     

"यह सच है कि अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के जब चेन्नई में थे तब अलग अलग मौकों पर मुझसे मिले थे और हमने क्रिकेट से जुड़े विभिन्न मसलों पर बात की थी। चर्चा के समय, मैंने कहा था कि जहाँ तक बात टीएनसीए की है तो वह बीसीसीआई का हर तरह से समर्थन करेगा। यह इतिहास है कि चाहे कितने भी चुनाव हों, लेकिन मुश्किल की घड़ी सब एकजुट हो ही जाते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, टीएनसीए हमेशा समर्थित करता रहेगा," श्रीनिवासन ने टीओआई को एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा।   

कई रिपोर्ट्स यह बताती हैं कि बीसीसीआई का वरिष्ठ समूह यह चाहता है कि श्रीनिवासन एक बार फिर आईसीसी में बीसीसीआई के प्रतिनिधि बने। हालांकि श्रीनिवासन ने इन ख़बरों की पुष्टि करने से इनकार किया है। उन्होंने कहा, "मैं इसका जवाब नहीं दे सकता क्योंकि ऐसे किसी भी संवाद का मैं हिस्सा नहीं रहा हूँ ... मैंने यही कहा है कि एक समय पर बीसीसीआई का प्रमुख पद संभालने के कारण, मैं आगे भी समर्थन के लिए हमेशा तैयार रहूँगा - मैं क्रिकेट में विश्वास करता हूँ और बीसीसीआई एक अच्छा संगठन है।   

जब उनसे यह पूछा गया कि क्या बीसीसीआई दुर्गम समयों में, उनपर भरोसा कर सकता है, तो उन्होंने कहा, "बीसीसीआई के मौजूदा पदाधिकारी - अध्यक्ष और सचिव- अनुभवी लोग हैं और मैं मानता हूँ कि उन्हें एक स्थान मिलना चाहिए। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्षों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने उत्तराधिकारियों पर हावी ना हो जाए।"

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