ICC की बैठक | प्रशासनीय और संवैधानिक बदलाव तथा राजस्व नीति को लेकर हुए मतदान में BCCI की हार

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ICC की बैठक | प्रशासनीय और संवैधानिक बदलाव तथा राजस्व नीति को लेकर हुए मतदान में BCCI की हार

ICC की जनरल बॉडी मीटिंग में BCCI प्रशासनीय एवं संवैधानिक बदलाव तथा राजस्व नीति को लेकर हुए मतदान में, क्रमशः, 9-1 और 8-2 से हारा है। फलस्वरूप, भारतीय बोर्ड ने यह अंदेशा दिया है कि वह जून में इंग्लैंड और वेल्स में होने वाले ICC चैंपियंस ट्रॉफी में हिस्सा न लेने पर विचार कर सकता है।

नए आर्थिक ढांचे के अनुसार, BCCI की हिस्सेदारी $570 मिलियन से घटकर $290 हो जाएगी। ख़बरों के अनुसार, ICC ने इस हिस्सेदारी को बढाकर $400 मिलियन करने की बात कही थी लेकिन BCCI इस पर राज़ी नहीं हुआ ।

"हाँ, मतदान हो चुके हैं। पुनर्गठित राजस्व ढाँचे के लिए 8-2 का नतीजा आया है जबकि 9-1 संवैधानिक बदलाव के पक्ष में हैं," BCCI के एक अधिकारी ने PTI से कहा। "BCCI ने दोनों के खिलाफ वोट किये था, क्योंकि हम इन बदलाव से सहमत नहीं हैं। इस समय, हम यही कह सकते हैं कि हमारे सामने सभी विकल्प उपलब्ध हैं। हम SGM में वापस जाकर समर्थन जुटा सकते हैं," इन्होने कहा।

यह माना गया था कि ज़िम्बाब्वे और बांग्लादेश के प्रतिनिधि भारत के पक्ष में हैं लेकिन श्री लंका के अलावा किसी ने भी भारत को अपना मत नहीं दिया।

"ICC ने ज़िम्बाब्वे को USD 19 मिलियन देने का वादा किया है। किस आधार पर मनोहर ने ऐसे वादे किये हैं? लेकिन हैरानी की बात यह है कि बांग्लादेश ने भी दूसरा रास्ता चुना। आज बैठक में, मनोहर ने, कहा कि USD 290 मिलियन हमारा आखिरी प्रस्ताव है," अधिकारी ने कहा।

"अब SGM में दो बातें घोषित हुई हैं। हमारे प्रतिनिधियों के पास दो अधिकार थे। निर्णय पर अमल करने को लेकर विलंप करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। दूसरा विकल्प था फ्लोर टेस्ट के दौरान विरोध में मत देना। हमारा लक्ष्य भारत के हित में है। बैठक में हमने पूरी विनम्रता दिखाई। लेकिन श्री. मनोहर का रवैया काफी हैरान करने वाला था।"

इसके बाद चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की भागीदारी पर भी आशंका है। BCCI भी ICC द्वारा टीम के ऐलान के लिए, निर्धारित किये गए 25 अप्रैल की समय सीमा को पार कर चुका है।

जब पूछा गया कि इस टूर्नामेंट से भारत की हिस्सादारी को हटाने की बात चल रही है या नहीं, तो अधिकारी ने कहा, "सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने मेम्बेर्स पार्टिसिपेशन अग्रीमेंट का उलंघन किया है। अब, संयुक्त सचिव वापस जायेंगे तो एक SGM आयोजित किया जायेगा। इसके बाद वह जनरल बॉडी को बदलावों और सही निर्णयों के बारे में बताएँगे।

"ICC ने अब तक हमें ये नहीं बताया है कि आखिर किस आधार पर सिंगापुर जैसे देश को ज्यादा लाभ कमाने का अधिकार है? इसकी वजह क्या है? क्या वह यह बता सकते हैं कि वह ICC के USD 160 मिलियन ऑपरेशनल कास्ट को कैसे कम करेंगे?"

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