ICC के एंटी-डोपिंग मुहीम के अंतर्गत लिए जायेंगे क्रिकेटरों के बायोलॉजिकल पासपोर्ट

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ICC के एंटी-डोपिंग मुहीम के अंतर्गत लिए जायेंगे क्रिकेटरों के बायोलॉजिकल पासपोर्ट

WADA के नए नियमों के अनुसार, जून में होने वाले चैंपियंस ट्रॉफी से पहले, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटरों को ब्लड टेस्ट करवाना होगा और उनके बायोलॉजिकल पासपोर्ट भी लिए जायेंगे। यह कदम, क्रिकेट को डोपिंग के प्रभाव से बचने के लिए, ICC द्वारा चलाये गए मुहीम के अंतर्गत लिया जा रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, पिछले महीने, पुणे में हुए, इंग्लैंड के खिलाफ पहले ODI से पूर्व, ICC की एक एंटी-डोपिंग टीम ने भारतीय खिलाड़ियों को टेस्ट के लाभों पर विस्तृत जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि क्रिकेट जगत में खिलाड़ियों को प्रदर्शन वृद्धि कराने वाली औषधी को लेने से रोकना क्यों अनिवार्य है।

2006 से ही क्रिकेट WADA का अनुवर्ती रहा है लेकिन हमारे खिलाड़ियों को कुछ अनावश्यक परीक्षणों से गुज़रना पड़ता है, जिसमें उनके यूरिन सैंपल लिए जाते हैं। लेकिन ऐसे कई औषधियां हैं, जो यूरिन सैंपल में पकड़े नहीं जाते लेकिन खून में पाए जा सकते हैं,” BCCI के एक सूत्र ने कहा।  

“ब्लड-टेस्टिंग WADA की ‘स्मार्ट टेस्टिंग’ का हिस्सा है। क्रिकेटर ब्लड टेस्टिंग की इस प्रक्रिया को लेकर चिंतित थे। लेकिन जब उन्हें बताया गया कि इससे उन्हें किस प्रकार से फायेदा होगा, तो वे मान गए।”

WADA के अनुवर्ती खेलों की तरह, क्रिकेट में भी क्रिकेटरों का बायोलॉजिकल पासपोर्ट लिया जायेगा। बायोलॉजिकल पासपोर्ट का अर्थ है, रक्त का वो नमूना जिसे लेकर 10 वर्षों के लिए रखा जाता है और हर छः महीने में खिलाड़ियों को नए सैंपल देने पड़ते हैं, जिसकी तुलना पहले लिए गए सैंपल से की जाती है।

 “इस तरह से, हर छः महीने में, ब्लड प्रोफाइल की जांच की जाएगी। और भी बेहतर तरीके हैं जिससे अधिक विस्तार से जांच हो सकेंगी, जिससे डोपिंग के साफ़ प्रमाण मिल सकेंगे,” सूत्र ने कहा।

क्रिकेट डोपिंग के मामले में, काफी हद तक सुरक्षित रहा है। क्रिकेट के कौशल्य आधारित खेल होने की धारणा की वजह से, खिलाड़ी प्रदर्शन वृद्धि कराने वाली औषधियों को लेने से बचते रहे हैं। प्रदीप सांगवान इकलौते ऐसे भारतीय क्रिकेटर हैं जो डोपिंग के मामले में दोषी पाए गए थे।

विश्व में टी20 लीगों के आगमन से कई क्रिकेटर फ्रीलांसर बन चुके हैं, और साल भर स्वस्थ रहने और शानदार प्रदर्शन करने के लिए वे प्रदर्शन वृद्धि कराने वाली औषधियों का सेवन करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

“बेसबॉल में, होम-रन की बदौलत खेल में हार या जीत का निर्णय होता है। ऐसा ही टी20 में भी होता है। इस खेल में शानदार बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग की आवश्यकता होती है। आवश्यकता बड़ी है और कमाई भी अच्छी है और अब कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो अपने राष्ट्रीय बोर्ड के अंतर्गत नहीं खेलते,” सूत्र ने कहा। 

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