विजय गोयल फिर एक नए विवाद में, ब्लाइंड क्रिकेट एसोसिएशन ने ईनामी राशि लेने से किया इंकार

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विजय गोयल फिर एक नए विवाद में, ब्लाइंड क्रिकेट एसोसिएशन ने ईनामी राशि लेने से किया इंकार

खेल मंत्री विजय गोयल द्वारा ब्लाइंड टी20 क्रिकेट टीम की विजेता टीम के प्रत्येक सदस्य को 30 लाख दिए जाने के वादे को ब्लाइंड क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष ने नकार दिया है। अध्यक्ष ने कहा कि असल में ये राशि सिर्फ 10 लाख रूपए की है।

ट्विटर पर काफी सक्रिय रहने वाले गोयल ने ट्विट के जरिए रियो पैरालंपिक और नेत्रहीन टी20 विश्व कम में खिलाड़ियों के कामयाब प्रदर्शन का जिक्र किया। उन्होंने ट्विट में लिखा, ‘‘रियो पैरालंपिक में 4 पदक जीते और अब ब्लाइंड टी20 विश्व कप खिताब भी अपने नाम किया; हमारे दिव्यांग खिलाड़ियों के कुशलता और दृढ़ता को सलाम!’’ साथ ही उन्होंने संदेश दिया कि ‘‘उनके निरंतर सहयोग के लिए हम प्रस्तुत रहेंगे।’’

ईनाम के तौर पर जो राशि दी जानी थी वो 30 लाख की श्रेणी में थी, जो क्रिकेट एसोसिएशन फाॅर द ब्लाइंड इन इंडिया को सौंपी जानी थी।

बहरहाल, एएनआई को दिए साक्षात्कार में सीएबीआई के अध्यक्ष जीके महंतेश ने दावा किया कि ये समाचारों में ऐलान की गई राशि का सिर्फ एक-तिहाई हिस्सा है।

जी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, महंतेश ने कहा, ‘‘हमारे खिलाड़ी थोड़े निराश हैं। पिछली बार जब इन्होंने विश्व कप जीता था तब प्रत्येक खिलाड़ी को 5 लाख रूपए मिले थे। तो, इस बार वो ज्यादा की उम्मीद कर रहे थे। उम्मीद है कि बढ़ी हुई ईनामी राशि की घोषणा होगी।’’

‘‘मैं नहीं जानता की ये टीम के लिए है या फिर प्रत्येक खिलाड़ी के लिए है। अगर ये (10 लाख ईनामी राशि) टीम के लिए है तो वो इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्हें ईनामी राशि नहीं चाहिए।’’

न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोयल ने कहा है कि उन्होंने ईनामी राशि को लेकर कोई बयान नहीं दिया और मंत्रालय उसी तरीके को अपनाएगा जो उन्होंने 2012 में भारतीय टीम द्वारा पहला टी20 विश्व कप खिताब जीतने के बाद अपनाया था।

महंतेश ने बीसीसीआई की भी आलोचना की जिन्होंने टीम द्वारा विश्व कप खिताब को बनाए रखने के बाद भी उन्हें आधिकारिक पहचान नहीं दी है। वहीं दूसरी तरफ गोयल ने ये सुझाव दिया है कि सरकार जल्द ही सीएबीआई को खेल फेडरेशन का दर्जा देगा।

महंतेश ने शिकायत करते हुए कहा कि ‘‘ये दुखद है कि हमें संसाधनों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। सरकार ने अभी तक हमें आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। 2002 में, जब पाकिस्तान ने विश्व कप जीता था तब उन्हें तुरंत पहचान मिल गई थी। इस रफतार से दूसरे देश काम कर रहे हैं। पता नहीं क्यों, हमारी सरकार इस मामले में सोई हुई है।’’

‘‘उन्हें तुरंत कदम उठाना चाहिए था। ये काफी अच्छा होगा अगर सरकार और बीसीसीआई इसे पहचान और बढ़ावा दे। अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो ये शर्म की बात है। हमारे खिलाड़ियों ने पिछले चार सालों में चार चैंपियनशिप जीती हैं। ये इस पर जवाब देने और सकारात्मक कदम उठाने का सही मौका है वरना ये देश के लिए शर्मिंदगी की बात होगी। 

ये किसी से छिपा नहीं है कि पैरा-एथलीट देश में बड़ा योगदान दे रहे हैं लेकिन उनके साथ ऐसा बर्ताव होना निराश करता है।

पिछले साल रियो पैरालंपिक खेलों में प्रदर्शन करने वाले मरियप्पन थंगावेलू को तमिलनाडु सरकार ने 2 करोड़ और हरियाणा सरकार ने दीपा मलिक को 4 करोड़ रूपए दिए थे। 

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