एमएस धोनी: दक्षिण अफ्रीकी शृंखला, कप्तान के तौर पर मेरी आख़िरी शृंखला थी

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एमएस धोनी: दक्षिण अफ्रीकी शृंखला, कप्तान के तौर पर मेरी आख़िरी शृंखला थी

भारत की ODI और टी20 की कप्तानी को छोड़ने के बाद, एमएस धोनी पहली बार प्रेस से मुखातिब हुए और उन्होंने कहा कि वह विराट कोहली की मदद के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे। धोनी ने कहा कि उनका एक दिवसीय टीम की कप्तानी को छोड़ना या टेस्ट की कप्तानी को छोड़ना कोई अकस्मात निर्णय नहीं, बल्कि सोचा समझा फैसला था।

"मेरे लिए कप्तान के तौर पर मेरी आखिरी शृंखला दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ थी और यही वजह थी कि मैं ज़िम्बाब्वे गया था। हमारी टीम में स्प्लिट कप्तानी पर अमल नहीं किया जा सकता, टेस्ट कप्तानी छोड़ने के बाद भी मेरी सोच नहीं बदली। मर्यादित ओवर की कप्तानी कोई बड़ी बात नहीं है और विराट इसके लिए अब तैयार हैं," धोनी ने कहा। भारत की ODI और टी20 की कप्तानी को छोड़ने के बाद, एमएस धोनी पहली बार प्रेस से मुखातिब हुए।

35 वर्षीय ने कहा है कि वह हमेशा कोहली की मदद के लिए तैयार रहेंगे, लेकिन उनके विचारों में टांग नहीं अड़ाएंगे।

"कीपर हमेशा ही उपकप्तान होता है फिर चाहे इसका ऐलान किया जाए या नहीं। और मैं कोहली की मदद करता रहूँगा। अलग अलग लोगों को अलग अलग फील्डिंग सेटअप पसंद आता है, तो यह कोहली पर है उन्हें क्या सही लगता है, मैं उनके अनुकूल कार्य करूँगा। मैं बस अपने सुझाव रखूँगा। मैं उनसे बात करके ही कुछ करूँगा, खुद से मैं कुछ भी नहीं कर सकता," धोनी ने कहा।

कप्तानी छोड़ने के निर्णय को लेकर बात करते हुए धोनी ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह समय ही कप्तानी छोड़ने के लिए सही था।

"अब कप्तानी करने का कोई मतलब नहीं है। लोगों ने मुझे तब भी सवाल पूछे थे जब मैंने ऑस्ट्रेलिया की सीरीज के बीचोबीच कप्तानी छोड़ी थी। कभी कभी आपको भविष्य के बारे में सोचना पड़ता है। मैं जानता था कि साहा तैयार हैं और उन्हें मौका मिलना चाहिए। इसी तरह से, विराट भी अब मर्यादित ओवर की कप्तानी करने के लिए तैयार हैं," धोनी ने बताया।

भारत के विश्व कप विजेता कप्तान ने विराट कोहली के गुणों की भी तारीफ की है और उन्हें एक ऐसा खिलाड़ी बताया है जो मैच जीतना चाहते हैं। इसके साथ ही धोनी ने यह भी उम्मीद जताई है कि समय के साथ दिल्ली के बल्लेबाज़ का खेल और भी बेहतर होता जायेगा।

"अपने करियर की शुरुआत से ही वह सीखना चाहते थे और मैच जीतना चाहते थे। वह हमेशा से ही मुकाबले का केंद्र बिंदु बनना चाहते थे।"

"वह जिम्मेदारियों के कारण बेहतर होते जायेंगे। ODI की कप्तानी करना थोड़ा आसान है और मेरा काम उनकी मदद करना है। कोई बल्लेबाज़ कैसी बल्लेबाजी कर रहा है, उनकी ताक़त और कमजोरियां, जानकारियाँ देना, मैं उन्हें जितना हो सके जानकारियाँ दूंगा," उन्होंने कहा।

धोनी इस बात को लेकर भी सकारात्मक हैं कि उनके और कोहली के बीच कोई मतभेद नहीं होगा क्योंकि उन्हें एक दूसरे की साझेदारी पसंद है।

"हमारे बीच जैसा रिश्ता है, उसमें अगर मैं उन्हें 100 योजनायें भी दूं, तो वह सभी को ना कह सकते हैं। हमारी दोस्ती इतनी पक्की है। जितनी योजनायें मैं उन्हें दूंगा, वह उतनी ही योजनायें और भी मांग सकते हैं और चुनाव उसी का होगा जो भारतीय क्रिकेट के हित में हो।"

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