नासिर हुसैन के साथ विराट कोहली की 'मास्टर क्लास'

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नासिर हुसैन के साथ विराट कोहली की 'मास्टर क्लास'

पूर्व इंग्लिश कप्तान नासिर हुसैन के साथ बातचीत में, विराट कोहली ने यह खुलासा किया कि कैसे इंग्लैंड में असफल होने के बाद, उन्होंने अपनी बल्लेबाजी में परिवर्तन किया और कैसे उन्होंने ऑफ-साइड पर लगने वाले शॉट्स पर काम किया। कोहली ने कहा कि अधिक दोस्त न होने से, उन्हें मेहनत करने में मदद मिलती है।

कप्तान के तौर पर, टीम में धोनी की जगह लेने के बाद, विराट कोहली ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि क्रिकेट में लक्ष्य हासिल करने के लिए, वह सबसे सटीक बल्लेबाज़ हैं। हालांकि, 28 वर्षीय खिलाड़ी के इस शानदार रिकॉर्ड के पीछे घंटों की मेहनत और सर्वश्रेष्ठ बनने की तीव्र इच्छा शामिल है।

स्काई स्पोर्ट्स के लिए नासिर हुसैन से बात करते हुए, कोहली ने तकनीकी बदलावों के बारे में बात की, जिसका, उनकी हाल फिलहाल की सफलता में, काफी योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि मेहनत करने के लिए उनके पास समय की कभी कमी नहीं होती क्योंकि उनकी ज़िन्दगी में ज्यादा दोस्त नहीं है, जिनके साथ उन्हें समय बिताना पड़ता हो।

"मैं जैसे जैसे बड़ा होता गया, भारत के लिए खेलने का सपना देखने लगा, लेकिन मैंने कभी यह भी नहीं सोचा था कि मैं किसी भी प्रारूप के लिए, भारत का कप्तान बन पाउँगा, तीनों का तो कोई सवाल ही नहीं था, लेकिन इस ज़िम्मेदारी को निभाना एक सम्मान की बात है।

खुशकिस्मती से मेरे कुछ ज्यादा दोस्त नहीं है और इसकी वजह से मैं आराम से अपने समय का इस्तेमाल कर पाता हूँ

कोहली

"खुशकिस्मती से मेरे कुछ ज्यादा दोस्त नहीं है और इसकी वजह से मैं आराम से अपने समय का इस्तेमाल कर पाता हूँ। क्रिकेटर होने के नाते, मैं हमेशा ही अपनी क्षमता को परखता रहता हूँ, फिर चाहे वह मैदान में हो या फिर दूसरे कार्यों के लिए समय का प्रबंधन करना। ज़रूरी है कि आप अपने में ही सिमित न रहे। जिस दिन मैं थकने लगूंगा, उस दिन मैं अपनी हदें तय करूँगा। तब तक के लिए, मैं ऐसे ही आगे बढ़ता रहूँगा।

"मैंने देखा है, कि कई लोगों के लिए, एक सत्र काफी ख़ास होता है और मेरे लिए वह सत्र 2016 का था। मैंने ज़रुरत से ज्यादा अभ्यास नहीं किया और अपने पर आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए, मैं तैयार था। स्थायी रूप से प्रदर्शन करते रहना संभव नहीं है और इसके लिए आपको पिछला प्रदर्शन भूलकर, एक नई शुरुआत करनी होती है, खुशकिस्मती से, मैं जब भी मैदान में उतरता हूँ, हर बार मेरे अन्दर ख़ास उत्सुकता रहती है," स्काई स्पोर्ट्स के शो के दौरान कोहली ने हुसैन से कहा।

कोहली ने ये भी कहा कि ये असंभव है कि वो करियर में अपने आदर्श सचिन तेंडुलकर जितना खेल सकें। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उतने लंबे वक्त (24 सालों) तक क्रिकेट नहीं खेल पाउंगा। 200 टेस्ट, 100 अंतर्राष्ट्रीय शतक। वो अद्भुत आंकड़े हैं और उन्हें हासिल कर पाना नामुमकिन है। लेकिन हां, मैं हमेशा से अलग करना चाहता हूं और हमेशा से यकीन है कि मैं अच्छे स्तर पर ही इस खेल को अलविदा कहूंगा।’’

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