खिलाड़ियों ने की रणजी ट्रॉफी के 'न्यूट्रल वेन्यू' सिद्धांत की निंदा

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खिलाड़ियों ने की रणजी ट्रॉफी के 'न्यूट्रल वेन्यू' सिद्धांत की निंदा

कुछ क्रिकेटरों ने, मेज़बान संघ की लापरवाही और अव्यवस्था से मुकाबलों में आई परेशानियों के कारण, रणजी ट्रॉफी में 'न्यूट्रल वेन्यू' के सिद्धांत की निंदा की। BCCI ने इस सत्र के पहले राउंड से न्यूट्रल वेन्यू प्रणाली की शुरुआत की ताकि किसी टीम में घरेलू मैदान में खेलने से अतिरिक्त सुविधा न मिल सके।

"विचार अच्छा था, लेकिन लागू करने की योजना काफी ख़राब थी। अधिकतर मेज़बान संघों में अन्य टीमों के मुकाबलों को आयोजित करने में कोई दिलचस्पी ही नहीं थी। सुविधाएँ ख़राब थी, फिर चाहे वह अच्छे विकेट की बात हो, पर्याप्त गेंदों की बात हो या फिर अच्छे खाने की। चीज़ें इससे बेहतर हो सकती थी," राजस्थान के खिलाड़ी रजत भाटिया ने PTI न्यूज़ एजेंसी से कहा।

भाटिया ने वाइज़ैग में असम-राजस्थान के बीच के मुकाबले का उदहारण दिया, जो तीन दिनों में ही समाप्त हो गया था, जिसके कारण, भारत और न्यू जीलैंड के बीच के पांचवे ODI से ठीक पहले, विकेट को लेकर काफी विवाद भी होने लगा था।

"इस प्रणाली को इसलिए लागू किया गया था ताकि मुकाबलों के दौरान टीम अपने घरेलू मैदान में अतिरिक सुविधा न ले सके। लेकिन निष्पक्ष मैदान में हुए इन मुकाबलों में भी कुछ ख़ास अंतर नहीं दिखा," भाटिया ने कहा।

"वाइज़ैग में हमारी टीम के खिलाफ असम के मुकाबले को ही ले लीजिये। विकेट फर्स्ट क्लास मुकाबले के लिए सही नहीं था इसीलिए मैच तीन दिनों में ही समाप्त हो गया। और यह सब अंतर्राष्ट्रीय मैच के दो हफ्ते पहले हुआ। जब ख़राब सतह के बारे में पूछा गया तब ग्राउंड्समेन के पास ज्यादा कुछ बोलने को नहीं था," 27 वर्षीय भाटिया ने कहा।

गुजरात और भारतीय टीम के स्पिनर अक्षर पटेल को न्यूट्रल वेन्यू का सिद्धांत इसलिए पसंद नहीं आया, क्योंकि इससे खिलाड़ियों को काफी यात्रा करनी पड़ी थी।

"योजना एक बड़ी दिक्कत थी। कभी कभी मुकाबलों के बीच बस तीन दिनों का अंतर होता था और हमें ऐसी जगहों पर जाना पड़ता था जहां आसानी से पहुँच पाना काफी मुश्किल था, यानी की हमें बसों में सफ़र करने के लिए अच्छा खासा समय बर्बाद करना पड़ता था," अक्षर ने कहा।

"ऐसी जगहों पर मुकाबला खेल के क्या फायदा जहां लोग हमें देखने ही न आये? जब हम घरेलू मैदान पर खेलते थे, तब कम से कम ठीक-ठाक भीड़ मुकाबला देखने आया करती थी। उम्मीद है कि अगले सत्र में घर और बाहर वाला प्रारूप फिर से लाया जायेगा," हाल ही में, कलाई की चोट से उभरने वाले स्पिनर ने कहा।

तमिल नाडू के कप्तान अभिनव मुकुंद ने न्यूट्रल वेन्यू में विकेट की आलोचना की।

"विकेट की स्थिति से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। सब सुरक्षित रहकर कार्य करना चाहते हैं, इसीलिए लोग 1000 रन से अधिक बना रहे हैं और स्पिनर कोई काम में नहीं आ रहे हैं," उन्होंने कहा।

"मुझे यह प्रारूप इसलिए पसंद नहीं क्योंकि इसमें कोई स्थिरता नहीं है। आप साल भर एक ही परिस्थिति में खेलते हैं - आपका घरेलू मैदान में खेलना आवश्यक होता है।"

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