ग्लेन मैकग्रा: सचिन तेंदुलकर ने भी मुझे अपशब्द कहे हैं

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ग्लेन मैकग्रा: सचिन तेंदुलकर ने भी मुझे अपशब्द कहे हैं

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ ग्लेन मैकग्रा ने यह खुलासा किया है कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें पुर्व भारतीय सितारा सचिन तेंदुलकर से भी अपशब्द सुनने को मिले हैं। 46 वर्षीय ने यह दावा किया है कि विश्व का हर एक टीम अपशब्दों का इस्तेमाल करता है लेकिन ख़बर तभी बनती है, जब ऑस्ट्रेलियाई टीम ऐसा करे।

विश्व का हर एक टीम अपशब्दों का इस्तेमाल करता है, लेकिन ख़बर तभी बनती है जब ऑस्ट्रेलियाई टीम ऐसा करे।

मैकग्रा

 “सचिन तेंदुलकर ने भी मुझे अपशब्द कहे हैं। विश्व का हर एक टीम अपशब्दों का इस्तेमाल करता है, लेकिन ख़बर तभी बनती है जब ऑस्ट्रेलियाई टीम ऐसा करे। जब कोई टीम हमारे खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करती हैं, तो हम चुप रहते हैं। जैसे ही ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ऐसा करते हैं, शिकायतें होने लगती हैं। ऑस्ट्रेलियाई बहुत ही मुंहफट होते हैं। हम बहुत ही जूनून के साथ खेलते हैं। हम मैदान में कुछ बातें बोल भी देते हैं, लेकिन मुक़ाबला ख़त्म होते ही सब भूल जाते हैं। यह ऑस्ट्रेलियाई शैली का हिस्सा है,” द हिन्दू की ख़बर के अनुसार, ग्लेन मैकग्रा ने शुक्रवार को, मद्रास स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ इसे ‘गेम्समैनशिप’ कहते थे।

जब ऑस्ट्रेलियाई टीम में सबसे अधिक अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले खिलाड़ी का नाम पूछा गया तो मैकग्रा ने कहा, “मैथ्यू हेडेन इस मामले में सबसे बुरे थे। लेकिन ऐसा करते समय वह गली के पोजीशन पर छिपे रहते थे।”

दो सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों के बारे में अपने विचार ज़ाहिर करते हुए मैकग्रा ने कहा कि वेस्ट इंडीज के बल्लेबाज़ ब्रायन लारा के सामने गेंद डालना, सचिन तेंदुलकर के मुक़ाबले, अधिक मुश्किल था। उन्होंने कहा, “आप सचिन को अच्छी गेंदों से सीमित कर सकते हैं। लेकिन लारा के साथ ऐसा करना मुश्किल होता था।”

किसी तेज़ गेंदबाज़ द्वारा सर्वाधिक टेस्ट विकेट हासिल करने का रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले और ‘द पिजन’ के नाम से मशहूर मैकग्रा ने पिचों को लेकर अपनी चिंता ज़ाहिर की और उन्होंने कहा कि आधुनिक क्रिकेट के लिए वे कुछ ज्यादा ही बल्लेबाजों के अनुकूल हैं।

 “यह एक अहम वजह है, जिसके कारण टीम विदेशों में जूझते हैं। वह ऐसे ही विकेट पर खेलते हैं।

 “जब मैं खेलता था तो, मेलबोर्न, सिडनी, पर्थ, ब्रिसबेन और एडिलेड – सबके पिच अलग अलग थे। पर्थ और ब्रिसबेन में गेंद को तीव्रता और उछाल मिलती थी, जबकि मेलबोर्न और सिडनी स्पिनरों के अनुकूल थी। लेकिन अब सब बदल चुका है। लेकिन अब सारी सतह एक सी हो गयीं हैं, सब बल्लेबाजों के अनुकूल हैं,” उन्होंने कहा।

मैकग्रा के अनुसार ‘ड्राप इन’ पिचों में आए इन बदलावों से स्थिति बिगड़ी है। “सामान्य विकेट धीरे धीरे ख़राब होता है और हम चौथे या पांचवे दिन पर उस पर दरारें देख पाते हैं। लेकिन ड्राप-इन पिचों के मामले में, सतह आखिरी दिन पहले या दूसरे दिन जैसी होती है,” उन्होंने कहा।  

आधुनिक क्रिकेट के बल्लेबाजों के बारे में बात करते हुए मैकग्रा ने कहा कि अभी के बल्लेबाज काफी आक्रामक हैं और टेस्ट क्रिकेट में उन्हें धीरे धीरे पारी को संभालने का धैर्य नहीं है।

बल्लेबाज़ मुश्किल भरे समय में खेल नहीं पाते, और धीरे धीरे पारी को संभालने में सक्षम नहीं हैं

मैकग्रा

बल्लेबाज़ मुश्किल भरे समय में खेल नहीं पाते, और धीरे धीरे पारी को संभालने में सक्षम नहीं हैं। वह बड़े शॉट्स लगाने की कोशिश करते हैं, बचाव करके नहीं खेल पाते।”

 “वह स्थिति के अनुकूल बनने के लिए तैयार नहीं रहते। वे काफी आक्रामक हैं,” मैकग्रा ने कहा

जब उनसे पूछा गया कि उनके अनुसार सबसे अधिक बुद्धिमान क्रिकेटर कौन है तो मैकग्रा ने कहा, “मैं शेन वारने का नाम लेना चाहूँगा, जो ऑस्ट्रेलिया के सबसे अच्छे टेस्ट कप्तान थे। वारने को खेल की समझ थी, वह बेहतरीन प्रदर्शन करते थे और उन्हें कुछ ख़ास करने की आदत थी।”

इसके साथ ही उन्होंने कहा, “एलेन बॉर्डर ने बहुत ही मुश्किल भरी परिस्थितियों में टीम को खड़ा किया है, मार्क टेलर बड़े ही शातिर थे और सिर्फ जीतने के लिए ही खेलते थे, स्टीव वॉ भी आक्रामक रुख अपनाते थे जबकि रिकी पोंटिंग को कप्तानी करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी लेकिन बावजूद इसके, उनकी कप्तानी में टीम ने दो बार विश्व कप हासिल किया। लेकिन मेरे हिसाब से सबसे बेहतरीन कप्तान बॉर्डर ही थे।”

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