भारतीय टीम द्वारा सर्वोच्च पांच सर्वाधिक ODI स्कोर

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भारतीय टीम द्वारा सर्वोच्च पांच सर्वाधिक ODI स्कोर

भारतीय टीम की बैटिंग लाइन अप किसी भी टीम के लिए इर्षा की वजह हो सकती है और जब बात बड़े स्कोर की हो तो इस टीम को रोक पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। इंग्लैंड के खिलाफ दूसरेODI में, भारत के कप्तान जल्द ही पवेलियन लौट गए लेकिन टीम ने फिर भी 381/6 का स्कोर कायम किया।

सिर्फ दक्षिण अफ्रीका ही ऐसी दूसरी टीम हैजो400से ऊपर का स्कोर बनाकरआंकड़ों के मामले में भारत से बेहतर हो सकती हैलेकिन350के स्कोर की बात जब आती हैतो अफ़्रीकी टीम भी भारत के आस पास नहीं टिक पाती।381का स्कोर2011के विश्व कप विजेता टीम के सर्वश्रेष्ठ पांच स्कोर की सूची में शामिल हो चुका है।

यह रहे भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा बनाए गए पांच सर्वाधिक स्कोर:

भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका - 401/3 (ग्वालियर, 2010)

यह ODI के इतिहास मेंकेवल इकलौती बार हैजब भारतीय टीम एक बेहतरीन टीम के विरुद्ध खेलते हुए400रनों के आंकड़े को पार कर पायी थी। लेकिन यह मैच इस उपलब्धि के लिए नहीं जाना जाता।400रनों के स्कोर से कुछ बड़ा इस खेल से जुड़ा हुआ था। यह खेल इतिहास के पन्नों पर हमेशा के लिए सिर्फ एक खिलाड़ी के कारण जिंदा रहेगा और वह है-सचिन तेंदुलकर। यह वह मैच हैजो हर भारतीय के ज़हन में ताज़ा है। कुछ लोग इसकी तुलना मास्टर ब्लास्टर के विश्व कप जीतने से भी करते हैं।

25के स्कोर परसहवाग को वायन पारनेल की गेंद से आउट होकर पवेलियन लौटना पड़ा। दिनेश कार्तिक अगले बल्लेबाज़ थेऔर जब तक वह पवेलियन लौटेसचिन के शतक की मदद से भारत का स्कोर219तक पहुँच चुका था। इरफ़ान पठान और महेंद्र सिंह धोनी ने भी अपना योगदान दिया लेकिन भीड़ सचिन के दोहरे शतक का इंतज़ार कर रही थी। पारी की आखिरी ओवर में उन्होंने सबकी दुआओं को कुबूल किया और एक सिंगल के साथ अपना दोहरा शतक पूरा किया।

तेंदुलकर की पारी की ख़ास बात यह थी कि एक भी शॉट बेवजह नहीं लगाया गया था। पूरी पारी में उन्होंने सिर्फ तीन छक्के लगाए थे और सिर्फ चौकों की मदद से शतक पूरा किया था। डेल स्टेन ने क़ुबूल किया था कि तेंदुलकर ने उन्हेंगेंदबाज़ होने के तौर पर काफी नीचा महसूस कराया था क्योंकि वह एक ऐसे गेंदबाज़ माने जाते थे जो गेंद डालने के मामले में सटीक रहा करते थे।

भारत बनाम श्री लंका - 404/5 (कोलकाता, 2014)

हमारी सूची में दूसरा मुकाबला वह है जिसे लोग एक मैच के तौर पर भले ही याद न कर पाए लेकिन रोहित शर्मा का नाम लेते ही सारी यादें ताज़ा हो जाती हैं। ज़बरदस्त शॉटदिलचस्प माहौल और एक अविश्वसनीय पारी क्योंकि लोगों को यह यकीन ही नहीं था कि किसी मैच की एक पारी में किसी खिलाड़ी के लिए264रन बनाना संभव भी था या नहीं। लेकिन शर्मा ने अपने हुनर की बदौलत यह कर दिखाया। एक साल बाद उन्होंने बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ209रन बनाये थे जिस दौरान एक पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी उन्होंने कायम किया था। इस बारहालांकिचौके लगाने का रिकॉर्ड दर्ज हुआ था जब गेंद33बार बाउंड्री के रस्सी को पार करने में सफल हुई।

अजिंक्य रहाणे और शर्मा के साथ भारत ने अपनी पारी शुरुआत की लेकिन रहाणे और अम्बाती रायुडु के आउट होने के बाद टीम का स्कोर59/2पर पहुंचा। विराट कोहली क्रीज़ पर आये और शर्मा के साथ202रनों की सांझेदारी कायम की लेकिन फिर रन लेते वक़्त हुए असमंजस से कोहली को पवेलियन लौटना पड़ा और शर्मा तब152के स्कोर पर थे। भारतीय पारी के ख़त्म होने में12ओवर बाकी थे और शर्मा ने14चौकों और6छक्कों की मदद से47गेंदों में112रन बनाये।264के बड़े स्कोर से भारत400रनों को पार करश्री लंका के सामने405रनों का लक्ष्य खड़ा कर पाया।

पांच मैचों की सीरीज में भारत पहले से ही तीन जीत चुका था और श्री लंका को मिली इस बुरी शिकस्त के बाद टीम के कप्तान एंजेलो मैथ्यूज ने मुकाबले को शर्मनाक कहा था क्योंकि इस स्थिति के बाद वह अपनी टीम को प्रतियोगितात्मक नहीं मान रहे थे। पूर्व इंग्लिश कप्तान माइकल वॉगन ने मजाकिया अंदाज़ में ट्वीट किया था, "इंग्लैंड के पिछले50 ODI में259का औसत कायम किया है। रोहित शर्मा ने एक ही पारी में264रन बनाये हैं।"उनका यह रिकॉर्ड आज भी बरक़रार है और भविष्य में इसे तोड़ पाने के आसार कम ही है।

भारत बनाम बरमूडा - 413/5 (पोर्ट ऑफ़ स्पेन, 2007)

यह पहली बार था जब भारत ने ODI 400का आंकड़ा पार किया था और यह कैरीबीयन आयलैन्ड्स में हुए2007के विश्व कप में हुआ था। ख़ास बात तो यह है कि यह पहली बार था जब विदेश में भारत ने400रनों के आंकड़े को पार किया था। लिस्ट में शामिल हर मैच की तरह इस मैच में भी कुछ यादगार हुआ था। हालांकियह किसी भारतीय खिलाड़ी की तरफ से नहीं बल्कि ड्वेन लिवरोक्स के कैच से हुआ था। नाम शायद याद न होपर विडियो देखते ही याद आ जायेगा।

टूर्नामेंट की शुरुआत में ही इसी जगह पर बांग्लादेश से5विकेट से हारने के बात भारत की हालत ख़राब थी। यह बदनसीबी इस मैच में भी बरक़रार रही जब रोबिन उथप्पा लेवरोक्स के एक शानदार कैच से आउट हो गए। इस बीच वीरेंदर सहवाग मैदान में आएं। उस वक़्त वह पिछले54पारियों में एक भी शतक नहीं लगा पाए थे और आलोचकों का शिकार हो रहे थे। लेकिन दिल्ली के खिलाड़ी ने भारत की उम्मीदों को जिंदा रखा और87गेंदों में114रन बनाये। युवराज सिंह और सचिन तेंदुलकर ने भीक्रमशः, 46और 29 गेंदों में83और57रन बनाये और भारत का स्कोर पहली बार400के पार लेकर गए।

वैसे तो अगले ही मुकाबले में हारकर भारत टूर्नामेंट से बाहर हो गया थालेकिन बरमूडा के ज़हन में यह खेल एक लम्बे समय के लिए ताज़ा रहा। ज़ाहिर है वजह भारत की पारी नहीं बल्कि लेवरोक्स की कैच थी।

भारत बनाम श्री लंका - 414/7 (राजकोट, 2009)

न्यू जीलैंड को उन्ही के देश में हराने के बादभारत अपने देश में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुई सीरीज में4-2से परास्त हुआ था। इस शिकस्त के बाद2011के विश्व कप में भारत के प्रदर्शन को लकार सवाल उठने लगे थे। जब एक टीम ऐसा स्कोर कायम करता हैतो खेल एक तरफ़ा हो जाता है। हालांकिश्री लंका ने ज़बरदस्त पलट वार किया था और एक समय पर ऐसा लग रहा था वे ही विजयी रहेंगे। लेकिनआखिरी ओवर में वे11रनों से पीछे रह गए।

सचिन तेंदुलकर और वीरेंदर सहवाग की भरोसेमंद जोड़ी ने पारी की शुरुआत की और भारत को15वे ओवर तक सौ रनों के पार ले गयी। दोनों एक दूसरे का साथ काफी अच्छी तरह से दे रहे थे। लेकिन69रनों पर तेंदुलकर को फ़र्नांडो ने पवेलियन वापस भेजा। धोनी क्रीज़ पर आये और रन रेट ऊपर चढ़ता गया। दोनों ने बेख़ौफ़ होकर सर लंका पर आक्रमण किया। दिल्ली के बल्लेबाज़150रन बनाकर पवेलियन और भारत का स्कोर300पर था। रविन्द्र जड़ेगा और विराट कोहली से मिले योगदान की मदद से भारत ODI के अपने सर्वाधिक स्कोर पर जा पहुंचा।

अंत में भारत ने शृंखला पर भी बड़ी आसानी से जीत हासिल कर ली लेकिन बिना किसी विवाद के तो कोई भी सीरीज अधूरा है। दिल्ली के फिरोज शाह कोटला में होने वाला आखिरी ODI इसलिए रद्द करना पड़ा क्योंकि पिच बेहद ख़राब थीजिससे गेंद को मिलने वाले असमान उछाल से कई श्री लंकाई खिलाड़ी चोटिल भी हो गए थे। हालांकि इसके बावजूद, 2011के विश्व कप के लिए कोटला में मुकाबले के आयोजन की अनुमति मिल गयी थीजो उस वक़्त महज़ एक सपना लग रहा था।

भारत बनाम वेस्ट इंडीज - 418/5 (इंदौर, 2011)

वेस्ट इंडीज के पास भारत और दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड था। इंग्लिश सीरीज के बादभारत की थोड़ी सी कमज़ोर टीम से मुकाबले के लिए वेस्ट इंडीज ने अपने कुछ खिलाड़ियों को विश्राम देने का निर्णय लिया। वीरेंदर सहवाग ने एक बार फिर प्रमुख टीम में शामिल न होने की बात पर सवाल खड़ा करते हुएएक शानदार प्रदर्शन दिया और सचिन तेंदुलकर के बाद,दोहरा शतक लगाने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज़ बने। यह उनके कार्यकाल का सबसे बड़ा स्कोर था।

सहवाग का साथ देने के लिए गौतम गंभीर को भेजा गया था और दोनों ने15ओवर में ही100रन पूरे किये। लगभग हर ओवर में लगे बाउंड्री से रन आने लगे।23वे ओवर पर सहवाग ने अपना शतक पूरा किया लेकिन अगली ही गेंद में गंभीर रन आउट हो गए। इसके बाद रैना सहवाग का साथ देने पहुंचेजिन्हें क्रीज़ पर जमने के लिए थोड़ा वक़्त लगा। हालांकि सहवाग बड़े शॉट लगाते रहे और एंड्रे रसेल की गेंद पर बाउंड्री लगाकर उन्होंने अपना दोहरा शतक पूरा किया।219के स्कोर पर सहवाग पवेलियन लौटे और भारत का स्कोर बना418/5

तारीफों की बरसात होने लगी और खिलाड़ियों ने ट्विटर ज़रिये भारतीय पारी की चर्चा की। केविन पीटरसन ने सभी क्रिकेट प्रशंसकों से टीवी पर सहवाग की बल्लेबाजी देखने की अपील तक कर डाली। डेविड वार्नर ने कहा कि अगले दिन के मैच की तैयारियां सर पर होने के बावजूद वह मैच से नज़रें हटा नहीं पा रहे हैं। रमीज़ रज़ा ने भारतीय खिलाड़ी की तुलना विव रिचर्ड्स से की, "जब विव रिचर्ड्स ने सन्यास ली थी तो मुझे लगा था कि मनोरंजन का अंत हो चुका है। लेकिन फिर सहवाग आयेमनोरंजन के बादशाह!उस बादशाह की जय हो!"

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