डेविड वार्नर अपने ख़राब फॉर्म के लिए फिक्रमंद नहीं

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डेविड वार्नर अपने ख़राब फॉर्म के लिए फिक्रमंद नहीं

भारत में टेस्ट दौरा कर रही ऑस्ट्रेलियाई टीम को डेविड वार्नर से की काफी उम्मीद थी, हालांकि वह अभी तक नाकामयाब रहे हैं, लेकिन ओपनर का मानना है कि अगर वो काम करते रहेंगे, तो अच्छे नतीजे भी होंगे।चार मैचों की ये सीरीज फिलहाल 1-1 की बराबरी पर है, वहीं 25 मार्च को इस शृंखला का निर्णायक मैच खेला जायेगा।

सीरीज में ख़राब प्रदर्शन करने के बाद भी, वार्नर का मानना है कि वह अच्छा खेल रहे हैं।

"मुझे काफी अच्छा लग रहा है, मैं खेल तो बहुत अच्छा रहा हूँ लेकिन रन नहीं बन पा रहे हैं," वार्नर ने तीसरे टेस्ट के ड्रा होने पर कहा।

इस शृंखला में अब तक 38, 10, 33, 17, 19 और 14 का स्कोर खड़ा करने वाले वार्नर ने स्पष्टतः ऐसा कोई ख़ास योगदान नहीं दिया हिया। हालांकि, वह इस बारे में ज्यादा फिक्रमंद नहीं हैं, "रन बन जायेंगे, मुझे इसका फायेदा मिलेगा। मुझे बस अभ्यास करते रहना होगा - बिना कोई ज्यादा बदलाव लाते हुए और अपना काम करते रहना होगा।"

वार्नर ने कहा कि वह अपने कार्यकाल में ऐसे उतार चढ़ाव का सामना कर चुके हैं और उसी अनुभव के कारण वह इस पड़ाव से भी गुजरने में सफल होंगे। "अभी ज़रूरी है कि आपका पिछला अनुभव काम आये, आपके साथ ये अनुभव हमेशा रहता है। जब मैं पहले भी मुश्किल दौर से गुज़र रहा था, तब मैंने सोचा था कि क्या मैं मेहनत कर रहा हूँ? मैं ये काम कर चुका हूँ," उन्होंने कहा।

इस सीरीज में वार्नर कई बार आर. अश्विन का शिकार बन चुके हैं, लेकिन वह अपने तरीके में कोई बदलाव नहीं लाना चाहते। "मैंने क्रिसमस के समय कुछ लोगों से बात की थी और वे मेरे तरीकों से खुश थे। जो भी मैं कर रहा था वो सही था। अब भी हालात वैसे ही हैं। मुझे बस हिम्मत रखकर खेलना होगा और रन बनाने होंगे।"

वार्नर इस सीरीज में मैट रेनशॉ के साथ एक अच्छी शुरुआती सांझेदारी बनाने में सफल हुए थे और वह अपने युवा साथी से बेहद संतुष्ट दिखे, खासकर उनका भारतीय स्पिनरों का मुकाबला करने की शैली से। "वह सबका डटकर मुकाबला करते हैं और खेल पर अपना नियंत्रण हासिल करते हैं। 20 वर्षीय होने के नाते वह काफी चतुर भी हैं। मुझे पता है जब मैं 20 साल का था तब कितना सोच पाता था। सारा श्रेय उन्ही को जाता है। यहां आकर इस तरह से खेल पाना, यह उनके लिए बहुत बड़ी बात है, और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बहुत अच्छे से की है।"

रेनशॉ के अच्छे प्रदर्शन के बावजूद, ऑस्ट्रेलिया का टॉप आर्डर अच्छा करने से चूक गया, क्योंकि वार्नर का प्रदर्शन कुछ ख़ास नहीं था, और उपकप्तान ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा, "सांझेदारी के लिए, मेरा और रेनर (रेनशॉ) ने अच्छी शुरुआत की थी। यहां 100 ओवर तक नाबाद रहने की आवश्यकता है। मैंने भारतीय खिलाड़ियों को ऐसा करते हुए देखा है, वे 200 की सांझेदारी बनाते हैं।"

बाएं हाथ के खिलाड़ी ने ग्लेन मैक्सवेल की भी खूब तारीफ की। "मैक्सी ने अच्छा खेला। वह ट्रेनिंग ने भी अपने मूल खेल के मामले में बहुत सतर्क रहते हैं। उनका शतक कमाल का था, और इससे उन्हें आत्मविश्वास मिला होगा। मेरे ख्याल से पिछले साल श्री लंका में हुए टी20 में उन्होंने शतक लगाया था। मेरे ख्याल से अब वह यह समझ गए हैं कि वह टीम के लिए मैच को जीता सकते हैं। जिस तरह से वह मैदान में उतरे और डटकर खेला, उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह इस प्रारूप के लिए भी बने हैं, वह एक लम्बे समय तक टेस्ट क्रिकेट खेलने के योग्य हैं।"

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