सचिन तेंदुलकर ने किया खुलासा, 2007 के विश्व कप की नाकामयाबी के बाद विव रिचर्ड्स ने उन्हें संस्यास लेने से रोका था

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सचिन तेंदुलकर ने किया खुलासा, 2007 के विश्व कप की नाकामयाबी के बाद विव रिचर्ड्स ने उन्हें संस्यास लेने से रोका था

2007 के विश्व कप से भारत काफी जल्दी बाहर हो गया था। सचिन ने बताया कि इस नाकामयाबी के बाद सचिन तेंदुलकर संस्यास लेने का मन बना रहे थे, लेकिन फिर विवियन रिचर्ड्स और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गज बल्लेबाज और उनके भाई अजीत ने उन्हें ऐसा करने से रोका था।

2007 में आज के दिन, भारत को वेस्ट इंडीज में चल रहे विश्व कप से बाहर होना पड़ा था। टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले मज़बूत टीमों में शामिल होने के बाद, भी बांग्लादेश और श्री लंका से हारकर भारत प्रतियोगिता से बाहर हो गया। इस पराजय से खिलाड़ी काफी परेशान हुए थे, सचिन तेंदुलकर तो इसके बाद, सन्यास लेने पर विचार करने लगे थे।   

मिड-डे से बात करते हुए तेंदुलकर ने कहा कि वह इस हार से इतने परेशान थे, कि उन्होंने खुद को होटल रूम में बंद कर लिया था और खेल से सन्यास लेने के बारे में सोचने लगे थे। "हारने के बाद, हम दो दिन तक वेस्ट इंडीज में रुके थे, लेकिन मैं अपने होटल रूम से बाहर नहीं निकला था। मुझे कुछ भी करने का मन नहीं करता था। वह पराजय इतना निराशाजनक था कि मुझे उन दो दिनों में कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। उसे भूलकर अगले टूर्नामेंट के बारे में सोचना भी मुश्किल हो रहा था।"

"हारने के बाद, हम दो दिन तक वेस्ट इंडीज में रुके थे, लेकिन मैं अपने होटल रूम से बाहर नहीं निकला था। मुझे कुछ भी करने का मन नहीं करता था। वह पराजय इतना निराशाजनक था कि मुझे उन दो दिनों में कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। उसे भूलकर अगले टूर्नामेंट के बारे में सोचना भी मुश्किल हो रहा था।"

टूर्नामेंट में भारत सबसे पहले बांग्लादेश से हारा, फिर बरमूडा के खिलाफ भी उसे हार का सामना करना पड़ा, वहीं 23 मार्च 2007 को श्री लंका से हारने के बाद, टीम विश्व कप से बाहर हो गयी। तेंदुलकर उस दिन को क्रिकेट के सबसे ख़राब दिनों में से एक मानते हैं।  

"मैं उसे (23 मार्च 2007 को) क्रिकेट के सबसे बुरे दिनों में से एक मानता हूँ," तेंदुलकर ने कहा। "जब आपको लगता है कि आप जीत जायेंगे, लेकिन आप हार जाते हैं, तो वह एहसास बहुत बुरा होता है। जैसे जोहानसबर्ग टेस्ट (1997 में), हमें दक्षिण अफ्रीका को आउट करना था लेकिन बारिश हो गयी, बारबाडोस टेस्ट (1997 में) में मैं कप्तान था और 1996 के विश्व कप में श्री लंका के खिलाफ सेमी फाइनल में हार जाना। इन मौकों पर मुझे बहुत तकलीफ हुई थी। 2007 का विश्व कप हमारे लिए अच्छा नहीं था। पहला झटका बांग्लादेश से हारना था वहीं दूसरा श्री लंका से। मैं कभी सोचा भी नहीं था कि हम बांग्लादेश से हार जायेगे। हम ओवर-कॉंफिडेंट नहीं थे लेकिन आप यह मान कर चलते हैं कि भारत बांग्लादेश को हरा देगा। इसे क्रिकेट के असामान्य मुकाबले कहते हैं।

दरअसल, तेंदुलकर के आदर्शों ने ही उन्हें कॉल कर खेल के इन पहलूओं को लेते हुए आगे बढ़ने के लिए कहा था, और उन्हें खेल से सन्यास न लेने के लिए मनाया था। "जब सर विव रिचर्ड्स का कॉल आया था तब मैं बाहर था। उन्होंने मुझसे 45 मिनट तक बात की - क्रिकेट के उतार चढ़ाव के बारे में। उन्होंने कहा कि मैं अब भी लम्बे वक़्त तक क्रिकेट खेलने के लिए सक्षम था। उन्होंने कहा, "आप अभी रिटायर नहीं होने वाले।" उन्होंने हमारे किसी दोस्त से जानकारी मिली थी कि मैं हार के बाद इस कदर मायूस हो गया था, कि सन्यास लेने पर विचार करने लगा था। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक बुरा वक़्त है, जो बीत जायेगा और इसीलिए मुझे अभी कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए।"

सचिन के आदर्श सुनील गावस्कर और उनके भाई अजीत ने भी उन्हें खेल में उनके भविष्य के बारे में आश्वस्त किया था। "अपने आदर्शों से बात कर मुझे काफी अच्छा लगा था। मैं उन्हें और सुनील गावस्कर को देखकर ही बड़ा हुआ हूँ। सर विव ने मुझे सही समय पर कॉल किया था और मुझे उनकी बातें समझ में आई। फिर मैंने खुद से कहा, "ठीक है, मैं इन बातों को भूल जाता हूँ और मुंबई लौटते ही अभ्यास शुरू करता हूँ। मेरे भाई अजीत ने मुझसे 2011 के विश्व कप के बारे में बात की और कहा कि अगले बार ट्रॉफी तुम्हारे हाथ में होगी। इससे मुझे प्रोत्साहन मिला और मैं अगले विश्व कप की तैयारी करने लगा। मैं सुबह 5:30 बजे से ट्रेनिंग करता और दोपहर में अभ्यास।"

इन सभी की बातें सच साबित हुई जब भारत ने 2011 में विश्व कप अपने नाम किया 1983 में मिली जीत के बाद, इस बार भारत ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक शानदार मुकाबले में श्री लंका को हराकर, विश्व कप पर अपनी पकड़ बनाई  

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