वीरेंदर सहवाग ने पंजाब की असफलता के लिए विदेशी बल्लेबाजों को ठहराया ज़िम्मेदार

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वीरेंदर सहवाग ने पंजाब की असफलता के लिए विदेशी बल्लेबाजों को ठहराया ज़िम्मेदार

किंग्स XI पंजाब में शामिल विदेशी बल्लेबाजों को लेकर वीरेंदर सहवाग ने अपनी निराशा व्यक्त की और कहा कि खिलाड़ियों ने पुणे के खिलाफ मुकाबले में अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से नहीं निभायी। पूर्व भारतीय ओपनर ने भारतीये खिलाड़ियों की भी प्रदर्शन न करने पर आलोचना की।

एक क्वार्टर फाइनल जैसे अहम मुकाबले में पंजाब की टीम महज़ 73 रनों में निपट गयी। चार विदेशी खिलाड़ी, सभी बल्लेबाज़, सबने मिलकर महज़ 14 रनों का योगदान दिया और पॉवरप्ले ख़त्म होने से पहले ही पवेलियन लौट गए। मुकाबले में पंजाब को पुणे से 9 विकेटों की करारी शिकस्त हासिल हुई।

"मैं बहुत निराश हूँ। मैं यह कह सकता हूँ कि किसी भी विदेशी खिलाड़ी ने ज़िम्मेदारी नहीं ली। शीर्ष चार में से कमसेकम एक बल्लेबाज़ को 12 से 15 ओवर खेलना चाहिए था, लेकिन किसी ने ऐसा नहीं किया। मेरे ख्याल से वे यह कह रहे थे कि विकेट स्लो था लेकिन अगर आप अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हैं, तो आपको सभी परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए," TOI की रिपोर्ट के अनुसार सहवाग ने कहा।

दो हफ्ते पहले, पंजाब प्लेऑफ की रेस से बाहर लग रहा था लेकिन मैक्सवेल की कप्तानी में टीम ने मुंबई और कोलकाता जैसे मज़बूत टीमों को हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी और जिसमें उनका मुकाबला सुपरजायंट से था। हालांकि, जब प्रदर्शन की सबसे ज्यादा ज़रुरत थी तब टीम पूरी तरह से लड़खड़ा गयी और पुणे ने प्लेऑफ में जाने के साथ साथ शीर्ष दो का स्थान भी अपने नाम कर लिया।

"काफी कम ऐसा होता है जब आपको बल्लेबाजी करने के लिए अच्छा विकेट मिले, लेकिन विकेट चाहे जैसा भी हो आपको अपने पक्ष के लिए 20 ओवर खेलने ही पड़ते हैं। लेकिन (ग्लेन) मैक्सवेल, शौन मार्श, (मार्टिन) गप्टिल और (इयोन) मॉर्गन सभी ने निराश किया। जिस तरह से हमने कोलकाता और मुंबई को हराया था, पूरी उम्मीद थी कि हम पुणे को भी मात दे पाएंगे। लेकिन हमने इस बार अच्छा नहीं किया," सहवाग ने कहा।

सहवाग ने, हालांकि, अपनी टीम के कप्तान ग्लेन मैक्सवेल की खासकर आलोचना की और पूरे टूर्नामेंट के दौरान उनके प्रदर्शन पर सवाल खड़े किये। मैक्सवेल ने 14 मुकाबलों में 310 रन बनाए और 7 विकेट भी लिए लेकिन सहवाग का मानना है कि टीम के कप्तान होने के नाते, उनसे उम्मीदें काफी अधिक थी।

"हम मैक्सवेल के आक्रामक खेल से वाकिफ हैं, और वह इसकी मदद से टीम को जीत भी दिला सकते हैं। लेकिन वह ज़्यादातर खेलों में असफल रहे। यह एक बड़ी निराशा थी, खासकर इसलिए क्योंकि वह अनुभवी हैं और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट और ODI खेले हैं। उन्होंने कप्तान की भूमिका ठीक से नहीं निभायी और किंग्स XI पंजाब के लिए प्रदर्शन नहीं किया," 38 वर्षीय ने कहा।

"मेरे ख्याल से उनका (गप्टिल) की भूमिका पॉवरप्ले में अच्छा खेलना था और (ऋद्धिमान) साहा को सिर्फ उनका साथ देना था। इसीलिए मैं इस बात का उतना बुरा नहीं मानूंगा अगर वह पहले या दूसरी गेंद पर आउट हो जाते हैं। उनपर दोष देने से कोई फायेदा नहीं है। मैं दूसरे बल्लेबाजों को दोष दूंगा। जो खिलाड़ी आउट हो रहे थे वह अगले बल्लेबाजों को बता रहे थे कि विकेट स्लो है और फिर भी अगर आप असफल होते हो तो इसका अर्थ है कि आप खेलना ही नहीं चाहते।"

हालांकि सहवाग ने सिर्फ विदेशी बल्लेबाजों पर ही सारा ठीकरा नहीं फोड़ा। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों पर भी ऊँगली उठायी। उन्होंने कहा कि हाशिम अमला ही इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने कंसिस्टेंसी दिखाई थी और टीम को आखिरी मुकाबले में उन्ही की कमी खल रही थी।

"हमें हाशिम अमला की कमी खल रही थी उन्होंने जिस तरह से स्थिरता दिखाई है, कोई और नहीं दिखा पाया, यहां तक की भारतीय खिलाड़ी भी ऐसा करने से चूक गए साहा ने एक (अच्छी) पारी खेली, मनन ने एक लेकिन इनके अलावा सभी असफल रहे और जब आपकी टीम में ऐसे दिग्गज बल्लेबाज़ की कमी हो तो किसी को ज़िम्मेदारी उठाने के लिए सामने आना पड़ता है," सहवाग ने कहा

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