रणजी की फीस बढ़ाने का निवेदन करते हुए कुंबले के नाम हरभजन की चिट्ठी

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रणजी की फीस बढ़ाने का निवेदन करते हुए कुंबले के नाम हरभजन की चिट्ठी

हरभजन सिंह ने अनिल कुंबले को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने घरेलू क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों के वेतन में बढ़त लाने के मुद्दे को CoA के सामने रखने की मांग की है। भज्जी ने सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे खिलाड़ियों को भी इस मुद्दे से जुड़ने को कहा है।

21 मई को कुंबले कमिटी ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेटर्स के सामने राष्ट्रीय टीम के क्रिकेटरों के वेतन के पुनरावृत्त वेतन योजना को लेकर अपना प्रेजेंटेशन देंगे जिसमें खिलाड़ियों की सैलरी में रु. 3 करोड़ की बढ़त बताई जाएगी। हरभजन सिंह ने अपने पूर्व सह खिलाड़ी से घरेलू खिलाड़ियों की मदद करने को कहा है।

मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप इस मुद्दे को BCCI के बड़े अधिकारी तथा सचिन, राहुल, लक्ष्मण और वीरू जैसे खिलाड़ियों तक भी पहुंचाए ताकि घरेलू क्रिकेटरों की वेतन में भी वृद्धि हो सके।

ग्रेड ए के क्रिकेटर जहां वार्षिक तौर पर रु. 2 करोड़ कमाते हैं वहीँ रंजू खिलाड़ी को केवल रु. 1.5 लाख ही मिलता है। यह वेतन 2004 मं तय की गयी योजना के अनुसार निर्धारित है।

"मैं पिछले 2/3 सालों से लगातार रणजी ट्रॉफी खेल रहा हूँ। मैं अपने सह खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति को देखकर नाखुश होता हूँ। जबकि रणजी ट्रॉफी का आयोजन विश्व का सबसे धनि बोर्ड करता है। खिलाड़ी होने के नामे मैं आपसे विनती करता हूँ, क्योंकि आप रणजी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा रहे हैं," हरभजन ने कुंबले को लिखा।

" मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप इस मुद्दे को BCCI के बड़े अधिकारी तथा सचिन, राहुल, लक्ष्मण और वीरू जैसे खिलाड़ियों तक भी पहुंचाए ताकि घरेलू क्रिकेटरों की वेतन में भी वृद्धि हो सके," PTI ने चिट्ठी में लिखी गयी बातों का उल्लेख किया।

"मैं इस बदलाव पर अमल करने के लिए हर मुमकिन सहायता देने को तैयार हूँ। यह बड़े ही दुःख की बात है कि 2004 के बाद से वेतन योजना में कोई बदलाव नहीं लाया गया है। तब के और अब के 100 रूपए के मूल्य के बारे में सोचिये, समय कितना बदल गया है।"

हरभजन ने कहा कि घरेलू खिलाड़ियों को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट पर रखना चाहिए ताकि वह किसी आर्थिक परेशानी के बिना क्रिकेट खेल सके।

"सोचिये आज की तारिख में, आप खुद को एक पेशेवर कैसे कह सकते हैं, अगर आपकी नौकरी आपके वेतन के बारे में ठीक से बताती तक नहीं है? आप समर्पण कैसे दिखाएँगे अगर आपका वेतन निर्धारित नहीं है तो। और वो भी आपको आपका वेतन एक साल का काम पूरा करने के बाद मिलता हो," अनुभवी स्पिनर ने कहा।

अगर मैं पिछले चार पांच सालों से घरेलू क्रिकेट नहीं खेलता तो मुझे औसत घरेलू क्रिकेटर की तकलीफों के बारे में पता नहीं चल पाता।

"खिलाड़ी अपने भविष्य की योजना भी नहीं बना पाते, क्योंकि उन्हें यह नहीं पता होता कि उस साल उन्हें रु 1 लाख का वेतन मिलेगा या 10 लाख का और इससे उनकी मानसिक स्थिति पर असर पड़ता है। ऐसे में हमें उनके लिए बदलाव लाना चाहिए"

कुछ घरेलू खिलाड़ी इंडियन प्रीमियर लीग में हिस्सा लेने में कामयाब हो पाते हैं, लेकिन यह संख्या काफी कम है। हरभजन ने समझाया कि अगर वह रणजी का हिस्सा नहीं होते, तो कई खिलाड़ियों को वह पहचानने से चूक जाते।

अगर मैं पिछले चार पांच सालों से घरेलू क्रिकेट नहीं खेलता तो मुझे औसत घरेलू क्रिकेटर की तकलीफों के बारे में पता नहीं चल पाता। सबके पास नौकरी नहीं है। भगवान की दया से अगर उन्हें IPL में खेलने का मौका मिलता है तो उनकी स्थिति कुछ सुधरती है," चिट्ठी के बारे में पूछे जाने पर हरभजन ने PTI से कहा।

"मुझे क्रिकेट की वजह से काफी कुछ मिला है और मैं खुशकिस्मत हूँ कि भारत के लिए लगभग 400 मुकाबले खेले हैं। मैं अपने लिए बात नहीं कर रहा। मैं उन खिलाड़ियों की तरफ से बोल रहा हूँ जो घरेलू स्तर पर पिस रहे हैं।

"ऐसे कई घरेलू क्रिकेटर हैं जो भारत के लिए नहीं खेल पायेंगे या IPL में भी भाग नहीं ले पायेंगे लेकिन उनकी प्रतिभा भारत के राष्ट्रीय खिलाड़ियों जैसी ही है। उनके भी परिवार हैं, सपने हैं, आकांक्षाएं हैं। मेरा निवेदन हैं कि ऐसे खिलाड़ियों का भी ख्याल रखा जाए।

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