यूथ चैंपियंसशिप लीग: इपीएल की तर्ज पर बेंगलुरु में शुरू हुआ बच्चों का फुटबॉल लीग

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© Youth Champions League Media

यूथ चैंपियंसशिप लीग: इपीएल की तर्ज पर बेंगलुरु में शुरू हुआ बच्चों का फुटबॉल लीग

यूथ चैंपियंसशिप लीग (वाइसीएल) युवा फुटबॉल खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक मंच प्रदान करने की कोशिश करता है।

बेंगलुरु के हेन्नूर में अक्तूबर में शुरू होनेवाला यूथ चैंपियंस लीग उभरते हुए युवा फुटबॉल खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक मंच प्रदान करने की कोशिश करेगा। यह फुटबॉल लीग भारत में शुरू होने वाला पहला लीग है, जो जमीनी स्तर के खिलाड़ियों को नयी ऊंचाई देगा। 

12 फ्रेंचाइजी वाला यह लीग सप्ताहांत में आयोजित किया जायेगा। इसमें कुल 540 युवा खिलड़ी अंडर-8, अंडर-10 और अंडर-12 आयु वर्ग के भाग लेंगे। इसके फ्रेंचाइजी ऑनर्स शहर के शीर्ष कॉरपोरेट घराने के ताल्लुक रखते हैं।

वाइसीएल के निदेशक 42 वर्षीय चार्ल्स हेवार्ड का इस बारे में कहना है, ‘एक अभिभावक होने के नाते मैं यह जानता हूं कि स्कूलों में जिस तरह से फुटबॉल मैच कराये जाते हैं, उससे फुटबॉल खेलने के इच्छुक प्रतिभावान खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिल पाता क्योंकि स्कूलों में साल भर में तीन से चार मैच ही बच्चे खेल पाते हैं।’

हेवार्ड ने कहा कि हमने विभिन्न आयु वर्ग के लिए अलग-अलग मैदान तैयार किये हैं। मैदान का आकार भी छोटा है, जिससे बच्चे दौड़ने में समय जाया करने के बजाय बिना किसी गोल करने के दबाव के सिर्फ अपने टच, ड्रिबल और शॉट पर ध्यान दे सकें। जैसे अंडर-8 के लिए हमने 30.5 गुणा 24 मीटर, अंडर-10 के लिए 50 गुणा 32 मीटर और अंडर-12 के लिए 64 गुणा 50 मीटर  का मैदान तैयार किया है।

विक्टोरिया एफसी और सीएफ ओएस बेलेनीज के पूर्व डिफेंसिव मिडफील्डर रुई पेड्रो ग्रेगोरियो का कहना है कि लीग में हर बच्चे को एक सीजन में 22 मैच खेलने को मिलेंगे। इससे उनमें छिपी प्रतिभा का विकास होगा। उन्होंने कहा, ‘हमारे देश (पुर्तगाल) में बच्चे पांच से छह साल की उम्र से फुटबॉल खेलने लगते हैं। वहां मेरे शहर लिस्बन में आपको फुटबॉल के लिए गजब की चाहत देखने को मिलेगी। करीब मैदान सिर्फ बच्चों के खेलने के लिए बनायी गयी है। बच्चे वहां सप्ताहांत पर अभ्यास करने आते हैं। वे फुटबॉल के तकनीकी चीजों के बारे में 10-12 साल की उम्र से जानने लगते हैं। हालांकि, उस उम्र तक उन्हें यह भी पता हो जाता है कि उन्हें किस भूमिका के लिए खुद को निखारना है और वे उसी का अभ्यास शुरू कर देते हैं। मुझे लगता है कि इस लीग से वैसा ही मंच युवा खिलाड़ियों को मिलेगा। भारत में भी प्रतिभा की कमी नहीं है। यहां से भी अच्छे फुटबॉलर निकल सकते हैं।

 ग्रेगोरी आर्सेनल फुटबॉल एकेडमी के तकनीकी निदेशक और लिस्बन के अंडर-19 टीम के कोच रह चुके हैं। वे यहां फुटबॉल एकेडमी ऑफ बेंगलुर (फैब) के साथ जुड़ेंगे और करीब 150 बच्चों को एफएसवी एरीना में ट्रेनिंग देंगे।

ब्रायन सोरेनसन जोकि डैनिस वीमेंस प्रेफेशन टीम (वर्ल्ड नंबर-5 रैंकिंग) के कोच हैं, एक खास बॉल ट्रेनिंग मशीन (बीटीएम) लेकर आये हैं। यह वायरलेस सेंसर से काम करता है, जोकि आइपैड से जुड़ा होता है।  यह सेंसर खिलाड़ियों के गेंद के पहले स्पर्श, पासिंग, ड्रिबलिंग, कॉर्नर किक और गोल के लिए मारे गये शॉट को एक सॉफ्टवेयर की मदद से आंकता है। इससे खिलाड़ियों के एकुरेसी का भी पता चल पाता है। 

इस लीग के लिए बच्चों का रजिस्ट्रेशन फी मात्र  

250 रुपये है, जबकि खिलाड़ियों को जर्सी सहित बाकी किट लीग द्वारा मुहैया करायी जाती हैं। जो इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना चाहते हैं वे  www.ycleague.com पर लॉग इन कर सकते हैं।

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