FIFA U-17 विश्व कप के लिए भारत की तैयारियां ज़ोरों पर

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FIFA U-17 विश्व कप के लिए भारत की तैयारियां ज़ोरों पर

FIFA U-17 विश्व कप इस साल भारत में आयोजित होगा और इससे पहले, बाधाओं की संभावना कम है क्योंकि काफी वक़्त पहले ही टूर्नामेंट को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं, टूर्नामेंट के अध्यक्ष ने कहा। छः शहरों में होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए सभी मैदान अप्रैल के अंत तक पूरी तरह से तैयार हो जायेंगे।

भारत में आयोजित अन्य खेल प्रतियोगिताओं की तरह ही U-17 FIFA विश्व कप में भी सुविधाओं को लेकर कोई मुश्किल नहीं होगी। इस साल 6 से 28 अक्टूबर को होने वाले इस टूर्नामेंट के आयोजक समिति ने कहा है कि दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, मारगांव कोची और नवी मुंबई समेत छः स्थल टूर्नामेंट तक पूरी तरह से तैयार हो जायेंगे।

इस प्रतियोगिता में कुल 24 टीम भाग लेंगी, और इस टूर्नामेंट को देश में में फुटबॉल की छवि में बड़ा बदलाव लाने के तौर पर देखा जा रहा है। लोकल ऑर्गनायिज़िंग समिति (LOC) के टूर्नामेंट अध्यक्ष जेवियर सेप्पी ने PTI को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा है कि अधिकतर काम अप्रैल के अंत तक ख़त्म हो जायेगा। "FIFA U-17 विश्व कप सात महीने की दूरी पर है, लेकिन मैं यह कह सकता हूँ कि हम लगभग तैयार हैं। नवीनीकरण के कार्य और लगभग सभी प्रमुख कार्य अप्रैल के अंत तक समाप्त हो जायेंगे। अन्य सुविधाओं से सम्बंधित कार्य मार्च के अंत में होने वाले FIFA के निरीक्षण से पहले ही हो जायेगा। उन क्षेत्रों में कार्य लगभग समाप्त है," उन्होंने कहा।

नवम्बर 2014 में सेप्पी को इस कार्य के लिए नियुक्त किया गया था, यानी आयोजन के अधिकार जीतने के लगभग एक साल बाद और FIFA टीम के पहले निरीक्षण से एक महीने पहले। जब टीम पिछले साल अक्टूबर में निरीक्षण के लिए आई थी तब, टूर्नामेंट के लिए छः स्थलों को तय किया गया।

"लगभग डेढ़ साल तक चली यह एक लम्बी प्रक्रिया है। भारत में चीज़ों को शुरू करने में वक़्त लगता है, लेकिन जब एक बार काम शुरू हो जाता है, तो अमल करने के मामले में भारत एक अच्छा देश हैं। कुछ स्थल इन तैयारियों के मामले में बाकी से भी आगे हैं।"

"भारत दूसरे देशों से अलग है। यह पहली बार है जब U-17 विश्व कप छः अलग शहरों में, अलग भाषाएँ बोलने वाली और अलग संस्कृति वाले जगहों पर होगा। सरकारी अधिकारियों के साथ काम करना थोड़ा कठिन होता है। कठिन यह है कि आपको कई सरकारों के साथ मिलकर काम करना होता है। जो भी आप करेंगे, आपको वही काम छः बार, छः अलग राज्य सरकारों के साथ करना होगा। लेकिन अब तक का सफ़र अच्छा रहा है, खासकर राज्य सरकारों ने अपने कर्त्तव्य को समझा है," सेप्पी ने कहा।

राज्य सरकारों के समझौतों के अनुसार, टूर्नामेंट के शुरुआत से लगभग 14 दिन पहले मैदानों को LOC के हाथों सौंप दिया जायेगा।

"7 जुलाई को टूर्नामेंट की ड्रा सेरेमनी होगा। और समझौते के अनुसार हम (LOC) टूर्नामेंट से 15 दिन या दो हफ्ते पहले ज़िम्मेदारी संभल लेंगे। यह समय सीमा है और इसके बाद से मैदानों पर हमारी ज़िम्मेदारी होगी," चिली के सेप्पी ने कहा।

UAE और चिली में FIFA प्रतियोगिता आयोजित करने वाले सेप्पी ने कहा कि उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि इतना मुश्किल दिखने वाला काम अधिक समस्याओं के बिना ही पूरा हो गया। 

"हर शहर में चार प्रशिक्षण मैदान तैयार करना पहले मुश्किल हो रहा था। सौभाग्यवश, हिस्सेदारों को यह समझ आ गया कि प्रतियोगिता के मैदानों जितना ही महत्वपूर्ण प्रशिक्षण के स्थल भी हैं। कई जगह तो मैदानों को पूरा बनाना पड़ा। शुरू में चीज़ें मुश्किल थी, लेकिन अब कोई दिक्कत नहीं है। सभी चारों शहरों में फ्लडलाइट सहित प्रशिक्षण मैदान बने हुए हैं, जैसा की FIFA को चाहिए था। इन प्रशिक्षण मैदानों में ही अधिकतर कार्य चल रहा है।

"गोवा में सभी ट्रेनिंग ग्राउंड्स तैयार हो चुके हैं, क्योंकि वे वहाँ पर पहले से ही मौजूद थे। लुसोफोनिया गेम्स 2014 में इस्तेमाल हुए मैदानों में से तीन हम ले रहे हैं, वहीं चौथा ट्रेनिंग ग्राउंड AFC अंडर-16 चैंपियनशिप में इस्तेमाल हुआ था," उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि टूर्नामेंट की तैय्यारी के लिए तय किया गया बजट भी कुछ ज्यादा बड़ा नहीं था, बल्कि, वह कुछ ऐसे बनाया गया था जिससे की बिना किसी समझौतों के सभी सुविधाओं को पूरा किया जा सकता था।

"यह टूर्नामेंट एक बहुत ही सख्त तौर पर निर्धारित बजट के साथ तैयार किया गया है। बजट कुछ ख़ास ज्यादा नहीं था। लेकिन मेरे ख्याल से यह बजट वास्तविकता के बिलकुल करीब था। इसी वजह से हमें पहले से योजना बनानी पड़ी। जब आप आखिरी पलों में योजना बनाते हो तो काफी खर्च कर बैठते हैं। काफी सोच समझकर खर्च किया गया है, और फालतू के व्यय को रोकने के लिए योजना बनाई गयी है," उन्होंने कहा।

उन्होंने बजट से जुड़ी कुछ जानकारियां और उनके सूत्रों के बारे में भी बताया।

"भारत में होने वाले अन्य प्रतियोगिताओं के मुकाबले इस बार का बजट काफी कम था। हमें यकीन था, कि जैसी परिस्थिति है, थोड़े नवीनीकरण के साथ काम चल सकता है। जो भी खर्चा हुआ है, उसे मैं भारत के फुटबॉल भविष्य के लिए एक निवेश के तौर पर देखता हूँ। केंद्रीय सरकार ने राज्यों को रु. 95 करोड़ का अनुमोदन दिया था। इसके आलावा सरकार ने अलग से, आपातकालीन स्थिति के लिए रु. 25 करोड़ भी दिया था।"

उन्होंने कहा कि यूँ तो इस प्रतियोगिता में आमदनी का मूल स्रोत टिकट की बिक्री ही होगी लेकिन फिर टिकट अधिक कीमती नहीं रखी जाएगी क्योंकि वे चाहते हैं कि अधिक से अधिक प्रशंसक मैच देखने पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि उत्सुक प्रशंसकों के लिए पहले टिकट लेने पर छूट भी है।

"अन्य लीगों से अलग, हमारा असली मकसद पैसे कमाना नहीं है। टिकट की कीमत फिल्मों के टिकट से भी कम होगा। उन इसे किफायती रखना चाहते हैं। हम उन लोगों भी छूट दे रहे हैं, जो पहले आकर टिकट खरीदेंगे। हम यह छूट शुरुआत में देंगे, और जैसे जैसे टूर्नामेंट की शुरुआत नज़दीक आती जाएगी, टिकट की कीमत बढ़ा दी जाएगी," उन्होंने कहा।

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