एशियन कप क्वालिफायर। सुनील क्षेत्री के गोल से भारत ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत

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एशियन कप क्वालिफायर। सुनील क्षेत्री के गोल से भारत ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत

एशियन कप क्वालिफायर की शुरूआत भारत ने बेहद ही शानदार ढंग से की है। सुनील छेत्री ने इंजरी टाइम में गोल करके म्यांमार के खिलाफ 64 साल बाद जीत दर्ज की। मुकाबले के ज्यादातर हिस्से में भारतीय टीम दबाव में रही लेकिन गुरप्रीत सिंह संधु का शुक्रिया जिन्होंने कमाल का प्रदर्शन करके टीम का मनोबल बढ़ाया।

कंबोडिया को 3-2 से हराने वाली भारतीय टीम में चार बदलाव किए गए। अर्णब मंडल, फलगान्को कारडोजो, डेनियल लालिमपुआ और सीके विनीत की जगह टीम में नारायण दास, संदेश झिंगन, जैकीचंद सिंह और जेजे लालपेखुआ को जगह दी गई, जिन्होंने म्यांमार के थुवुन्ना स्टेडियम में एशियन कप क्वालिफायर में अपने अभियान का आगाज म्यांमार के खिलाफ खेलकर किया। भारतीय कोच स्टेफेन कोंसटेनटाइन ने 4-2-3-1 का फाॅरमेशन मैदान पर उतारा, जहां राॅबिन सिंह अकेले स्ट्राइकर बने।

मेजबान टीम को अच्छी शुरूआत मिली जिन्होंने भारतीय डिफेंस को दबाव में डाला, भारत की तरफ से गुरप्रीत सिंह संधु उन्हें टक्कर देने का प्रयास कर रहे थे। शुरूआती दबाव को देखते हुए भी भारत ने ही पहले गोल के लिए रास्ता बनाने का प्रयास किया। म्यांमार के गोलकीपर थिहा सी थू बाएं विंग की तरफ संभल नहीं पाए। वहां मौजूद जैकीचंद इसका फायदा उठाने में नाकाम रहे। अपनी गलती को सुधारने का जैकीचंद को एक अन्य मौका मिला लेकिन 25 वर्षीय ईस्ट बंगाल का ये खिलाड़ी उसका भी लाभ नहीं उठा पाया।

म्यांमार ने जल्द ही भारत के इन असफल प्रयासों से उबरने का मौका ढूंढा। ओंग थू ने कोशिश की लेकिन संधू ने आसानी से गेंद को रोक दिया। कुछ ही मिनट के बाद थू ने दोबारा गोल करने का प्रयास किया लेकिन संधू उनकी इस कोशिश को असफल बनाने के लिए खड़े हुए थे। भारतीय फुटबाॅल टीम ज्यादा देर तक गेंद पर कब्जा जमा पाने में नाकामयाब हो रही थी। खेल का आधा समय खत्म हो गया और भारत के लिए सकारात्मक बात सिर्फ ये रही कि उन्होंने गोल करने के लिए कम से कम कुछ मौके बनाए।

म्यांमार ने दूसरे हाफ का आगाज भी पहले हाफ की तरह ही किया। उन्होंने लंबी अवधि तक गेंद पर नियंत्रण रखा और भारतीय खिलाड़ियों को संघर्ष करने पर मजबूर किया। दूसरे हाफ के 10 मिनट बाद ही म्यांमार ने अपनी टीम के लिए मैच का सबसे बेहतरीन मौका बनाया संधू भी उसे रोकने में असफल थे लेकिन यान ओंग क्याव का शाॅट बार से उपर चला गया औश्र भारत ने राहत की सांस ली।

स्टेफेन कोंसटेनटाइन ने राॅबिन सिंह की जगह उदान्ता सिंह को भेजा ताकि वो म्यांमार के बैकलाइन पर दबाव बना सके। 10 मिनट शेष रहते हुए राॅलिन बोर्गस ने धनपाल गणेश के लिए रास्ता बनाया।

स्टेफेन कोंसटेनटाइन भी नहीं जानते थे कि आगे क्या होने वाला है। भारत ने ये सुनिश्चित किया की विरोधी टीम की तरफ से बनाए जा रहे दबाव को दरकिनार करते हुए वो अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करें। सब्सिट्यूट के तौर पर आए उदांता सिंह ने गेंद को लेकर लंबी दौड़ लगाई ताकि वो इसे सुनील छेत्री तक पहुंचा सके। छेत्री बाॅक्स के अंदर उनसे कुछ ही देर में पहुंचे। उन्होंने गेंद लेते ही म्यांमार के गोल पोस्ट पर दाग दिया और भारत को म्यांमार में 64 साल बाद जीत दर्ज करने में मदद की।

भारत जून में अब अगला मुकाबला कीर्गिस्तान के खिलाफ खेलेगा और इस वक्त वो अपने ग्रुप से क्वालिफाई करने वाली फेवरेट टीम बन गई है।

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