हमारे राज्य में इतनी प्रतिभा है, लेकिन इनमें से कईयों को हॉकी के बजाय बन्दूक उठाना पड़ता है: दिलीप तिर्की

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© Dilip Tirkey Twitter

हमारे राज्य में इतनी प्रतिभा है, लेकिन इनमें से कईयों को हॉकी के बजाय बन्दूक उठाना पड़ता है: दिलीप तिर्की

पूर्व भारतीय हॉकी टीम के कप्तान और मौजूदा राज्य सभा सांसद दिलीप तिर्की ओड़िशा के आदिवासी युवाओं को माओवादी बल से जुड़ने के बजाय हॉकी में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने के मुहीम में लगे हुए हैं। वह युवाओं में यह विश्वास जगाना चाहते हैं कि हॉकी से उन्हें एक अर्थित स्थिरता और बेहतर ज़िन्दगी मिलेगी।

“ओड़िशा के कुछ इलाकों में माओवादी गतिविधियाँ बहुत मज़बूत हैं और वे हमेशा अपने बल को बड़ा बनाने की फ़िराक में होते हैं। हमारे राज्य में इतने प्रतिभाशाली हॉकी खिलाड़ी हैं, लेकिन उनमें से कई हॉकी के बजाय बन्दूक उठाने के लिए मजबूर हैं। इसके पीछे एक प्रमुख वजह राज्य में फैली गरीबी और अशिक्षा भी है,” तिर्की ने TOI से कहा।

412 मैच खेलकर भारत में सर्वाधिक मैचों के शामिल होने वाले तिर्की ओड़िशा राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे आदिवासी युवाओं को हॉकी के लिए प्रोत्साहित करने की मुहीम का नेतृत्व कर रहे हैं। सरकार 10 दिसंबर से ओड़िशा, झारखन और छत्तीसगढ़ के 32 क्षेत्रों में बीजू पटनायक रूरल हॉकी चैंपियनशिप का आयोजन करवाने वाली है। इस टूर्नामेंट में 30,000 खिलाड़ी होंगे, जो मुख्यतः विभिन्न आदिवासी समूहों के होंगे और साथ ही होंगे 1750 टीमें।

तिर्की सुंदरगढ़ के निवासी है जिसपर माओवादी गतिविधियों का सबसे अधिक प्रभाव हैं तथा वह खुद भी आदिवासी हैं। इस इलाके से कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी उत्पन्न हुए हैं और तिर्की को उम्मीद है कि इस टूर्नामेंट से क्षेत्र में खेल के लिए रूचि एक बार फिर बढ़ेगी और युवा इस खेल में अपना योगदान देना चाहेंगे। उन्होंने कहा, “ग्रामीण हॉकी टूर्नामेंट से युवा आकर्षित होंगे और मुझे उम्मीद है कि यह सही दिशा में उठाया गया कदम सिद्ध होगा।”

 “हम इन्हें यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि एक और दुनिया भी है जहाँ इन्हें नौकरी मिल सकती है, सुरक्षा मिल सकती है, आर्थिक स्थिरता और एक बेहतर सामाजिक ज़िन्दगी मिल सकती है। वह प्राकृतिक रूप से प्रतिभाशाली हैं और बस उन्हें अच्छे प्रशिक्षण की आवश्यकता है। राज्य में कई हॉकी प्रशिक्षण केंद्र हैं और पानपोश में मौजूद सबसे बड़े केंद्र ने कई बेहतरीन खिलाड़ियों को तैयार किया है। यह हमारे लिए बहुत मेहनत का काम है लेकिन चूंकि हम मेहनत कर रहे हैं तो उम्मीद भी यही है कि स्थिति में जल्द ही परिवर्तन भी आएगा।

तिर्की को उम्मीद है कि वह युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन पाएंगे और युवाओं को उन्हें देखकर यह समझ आएगा कि कैसे यह खेल किसी के जीवन को अच्छाई की उर ले जा सकता है।

 “मुझे हॉकी की बदौलत जीवन में सब कुछ मिला है और मुझे समाज के प्रति भी योगदान करना चाहिए। मैं लोगों को यह समझाना चाहता हूँ कि अगर मैं खेल से इतना कुछ कमा सकता हूँ, तो वे भी कर स्सकते हैं। मुझे यकीन है कि हमारे पहल से समाज में काफी कुछ अच्छा होगा,” तिर्की ने कहा।

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