2018 तक भारतीय हॉकी टीम टॉप-3 में होगी: रघुनाथ

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2018 तक भारतीय हॉकी टीम टॉप-3 में होगी: रघुनाथ

हॉकी इंडिया के स्टार डिफेंडर और हाल ही में अर्जुन अवार्ड से नवाजे गये हॉकी खिलाड़ी वी रघुनाथ ने टीम के रियो में खराब प्रदर्शन के कारण और 2018 वर्ल्ड कप के बारें में बात की। साथ ही अर्जुन अवार्ड मिलने पर खुशी का इजहार किया।

हालांकि, रियो ओलिंपिक के क्वार्टर फाइनल में भारत बेल्जियम से हार गया, पर टीम पिछले एक दशक से अच्छा कर रही है और उसकी सोच और बॉडी लैंग्वेज में बदलाव आसानी से देखा जा सकता है। टीम का डिफेंस पहले से मजबूत हुआ है, पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने की प्रक्रिया भी बढ़ी है. बेल्जियम से भारत को भले हार मिली, पर मैच एकतरफा नहीं था। ड्रैग और फ्लिक स्पेस्लिस्ट रघुराम बेल्जियम से जीत का क्रेडिट नहीं लेना चाहते, जिसने बेहतर प्रदर्शन कर क्वार्टर फाइनल में जीत दर्ज की।

रघुराम ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिये एक इंटरव्यू में कहा, ‘यदि भारतीय टीम के पिछले दो वर्षों का प्रदर्शन देखा जाये, तो मैं उससे बिल्कुल संतुष्ट हूं। हमने रियो ओलिंपिक को छोड़कर कई अन्य टूर्नार्मेंट, जिनमें कॉमनवेल्थ गेम्स, चैंपियंस ट्रॉफी आदि शामिल हैं, में अच्छा प्रदर्शन किया है।’ रघु ने कहा कि हम रियो में और बेहतर कर सकते थे, पर इससे बेल्जियम के शानदार प्रदर्शन को कम कर के नहीं आंका जा सकता है। हालांकि, रियो का अनुभव युवा हॉकी टीम के लिए आगे अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरणादायी साबित होगा। 2012 से अभी की टीम की तुलना नहीं की जा सकती। हम अभी बहुत बेहतर हो गये हैं। अभी हमारी टीम विश्व के टॉप-6 टीमों में है और संभव है कि हम 2018 तक टॉप-3 में शामिल हो जायें।

भारत लंदन 2012 ओलिंपिक में आखिरी स्थान पर था, जबकि 2008  के बीजिंग ओलिंपिक में क्वालिफाई भी नहीं कर पाया था। इस लिहाज से क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना इतना बुरा भी नहीं है। हालांकि रघुनाथ ने खिलाड़ियों की मन:स्थिति में बदलाव की बात जरूर कही। 

27 साल के कर्नाटक के इस खिलाड़ी ने कहा कि इस टीम के बदलाव का समय 2012 ओलिंपिक के बाद शुरू हुआ। हॉकी इंडिया और कोचिंग स्टाफ ने हम पर बहुत मेहनत की है। खासकर हमारे कोच रोलेंट ओल्टमंस ने हमारे सोचने के तरीके को बदल दिया है। उन्होंने हर खिलाड़ी से उसके बेस्ट पार्ट को खोज निकाला है। हमारा आत्मविश्वास पहले से काफी ऊपर है। उन्होंने इसके अलावा हमारे डायट, फिटनेस और टीम रोटेशन प्लान पर काफी मेहनत की है।

भारतीय डिफेंडर ने कहा कि ओल्टमंस ने कप्तान के रोटेशन पर भी काम किया। इससे टीम में एकता की भावना बढ़ी है। मैंने भी चैंपियंस ट्रॉफी के कुछ मैचों में कप्तानी की थी, इसके बाद श्रीजेश को भी कप्तानी दी गयी। इससे खिलाड़ी टीम में अपनी भूमिका को ज्यादा संजीदगी से लेते हैं।  कप्तान के बदलते रहने से टीम स्पिरिट की भावना बनी रहती है। सरदार और श्रीजेश दोनों ने टीम गेम को बहुत आगे बढ़ाया है।

रघुनाथ ने 2018 वर्ल्ड कप की तैयारियों के बारे में बताते हुए कहा कि भारतीय टीम अब रियो को पीछे छोड़कर 2018 वर्ल्ड कप की तैयारियों में जुट गयी है, जो भुवनेश्वर में होगा। हमें कुछ महीने बाद ही एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में खेलना है। अगर हम अच्छा करते हैं, तो हमारी रैंकिंग में सुधार होगा। हम एशिया की नंबर-1 टीम हैं और हमें स्वर्ण पदक जीतना ही होगा। 

हाल ही में खेल दिवस के अवसर पर अर्जुन अवार्ड से नवाजे गये इस खिलाड़ी ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा, ‘मैं भारतीय हॉकी टीम में करीब एक दशक से हूं। यह अवार्ड श्रीजेश और सरदार को पहले ही मिल चुका है और अब मैं भी गौरव की अनुभूति कर रहा हूं। राष्ट्रपति भवन में यह पुरस्कार पाना मेरे जिंदगी के बेहतरीन लम्हों में से एक है। ’

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