बिंद्रा की अगुवाई वाली समिति ने एनआरएआई की भूमिका पर सवाल उठाये

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बिंद्रा की अगुवाई वाली समिति ने एनआरएआई की भूमिका पर सवाल उठाये

अभिनव बिंद्रा की अगुवाई वाली भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) की समीक्षा समिति ने कमतर प्रदर्शन करने वाले निशानेबाजों को तो निशाना बनाया ही, लेकिन रियो ओलिंपिक में निशानेबाजों के खराब प्रदर्शन के लिए कोचों और महासंघ की भी आलोचना करते हुए 36 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है।

रियो ओलिंपिक में हिस्सा लेने 12 प्रतिभागी गये थे, लेकिन कोई भी उनमें से मेडल जीतने में कामयाब नहीं हुआ। 2008 बीजिंग ओलिंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट बिंद्रा वहां चौथे स्थान पर रहे, जो भारतीय शूटरों का बेस्ट प्रदर्शन था।

एनआरएआई ने चार लोगों की कमिटी बनायी है, जिसमें पूर्व एशियन गोल्ड मेडलिस्ट मनीषा मल्होत्रा को संयोजक बनाया गया है। समिति ने कहा कि एथेंस ओलिंपिक 2004 के बाद (निशानेबाजी में भारत का पहला मेडल) निशानेबाजी में लगातार आ रहे पदकों ने खेलों से जुड़े सभी लोगों को आत्ममुग्ध बना दिया। 

रिपोर्ट के अनुसार, ‘सभी ने सोच लिया कि अपने आप ही प्रगति होती रहेगी और यह सुनिश्चित करना भूल गये कि स्वस्थ प्रक्रिया होनी चाहिए।’

इसमें कहा गया, ‘समिति का निष्कर्ष यही है कि रियो ओलिंपिक में सफलता का फॉर्मूला गलत था और भारतीय निशानेबाजी पिछले कुछ वर्षों से भाग्य के सहारे रही है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि कुछ शानदार प्रतिभावान खिलाड़ियों से मदद मिली है।’

भारत ने ओलिंपिक की शूटिंग स्पर्धा में अब तक चार मेडल जीत चुका है। 2004 एथेंस ओलिंपिक में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने पुरुषों के डबल ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीत कर भारत का खाता खोला था।

बिंद्रा ने एकल स्पर्धा में भारत के लिए ओलिंपिक में पहला मेडल 2008 बीजिंग ओलिंपिक के 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में जीता था। गगन नारंग ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था, जबकि 2012 लंदन ओलिंपिक में 25 मीटर रैपिड फायर में विजय कुमार ने रजत पदक जीता था।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में सर्वसम्मति से कहा कि भारतीय निशोनबाजी में बदलाव की जरूरत है। रवैये, नीतियों और योजनाओं में बदलाव की जरूरत है, जिससे कि प्रतिभा को स्वस्थ माहौल में पनपने का मौका मिले। समिति ने साथ ही कहा कि भारतीय खेलों में जो ‘चलता है’का रवैया छोड़ना होगा। रियो में भी हमने निशानेबाजों पर छोड़ दिया कि वे मेडल जीत ही जायेंगे।

समिति ने कहा, ‘कोच स्टेनिसलास लेपीडस को यकीन था कि नारंग उनके ट्रेनिंग कार्यक्रम पर नहीं चल रहे हैं। इसकी सूचना कई बार एनआरएआई को दी गयी। हालांकि कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिटनेस के मुद्दे को नंजरअंदाज किया गया और नारंग के एड़ी में चोट के साथ ओलिंपिक में जाने को लेकर एनआरएआई अंधेरे में था।’

समिति ने कहा कि उन्हें अपनी स्पर्धाओं को लेकर कुछ कड़े फैसले करने होंगे। एथलीटों को जो सुविधाएं मिलती हैं, उसकी मॉनिटरिंग करनी होगी। एनआरएआई को कोच व एक्सपर्ट से हमेशा ट्रेनिंग की प्रगति के बारे में जानकारी लेते रहना होगा। समिति के अनुसार यह साफ जाहिर होता है कि एक एथलीट तीन स्पर्धाओं में भाग लेने का दबाव नहीं सह पा रहा है। अधिकारियों की मॉनिटरिंग और आपसी समझ में कमी के कारण एनआरएआई को वास्तविक स्थति के बारे में पता ही नहीं होता।

आयोनिका के बारे में समिति ने कहा कि आयोनिका ने वित्तीय फायदे के लिए थॉमस फारनिक को कोच और सुमा शिरूर को मेंटर दिखाया, लेकिन समिति के सामने पेश रिपोर्ट और दस्तावेज साबित करते हैं कि सुमा पूर्णकालिक कोच थीं और ओलिंपिक की तैयारी के प्रयासों में पूरी ईमानदारी नहीं बरती गयी.

बहरहाल, भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने रियो ओलिंपिक में भारतीय निशानेबाजों के खराब प्रदर्शन की समीक्षा के लिए गठित अभिनव बिंद्रा की अगुआई वाली समिति की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने का फैसला किया है। वे इन सुझावों को लागू करने के लिए अलग पैनल का गठन करेंगे। एनआरएआई अध्यक्ष रणइंदर सिंह ने कहा कि रिपोर्ट में किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है, लेकिन खेल के संचालन में मौजूद कमियों को सही करने के लिए सिफारिश दी गयी।

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