अलविदा 2016: याद आएंगे ये पल

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अलविदा 2016: याद आएंगे ये पल

ये साल अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका है। हम याद कर लेते हैं 2016 में खेल के क्षेत्र में भारत को मिले खास 10 लम्हों को। गोल्फ में उभरकर आई अदिति अशोक से लेकर रियो ओलंपिक में पीवी सिंधु को मिले सिल्वर मेडल तक, इस साल ने खेल प्रेमियों को जश्न मनाने के कई मौके दिए हैं।

10. अदिति अशोक बनीं महिला यूरोपियन टूर टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय

तकरीबन 12 महीने पहले अदिति अशोक सबसे युवा और पहली भारतीय बनीं थी जिन्होंने लला आइचा टूर स्कूल जीत कर, महिला यूरोपियन टूर कार्ड हासिल किया। उसके चार महीने बाद ही वो ओलंपिक में गोल्फ के तहत भारत की नुमाइंदगी करने वाली पहली महिला बनीं। पिछले महीने वूमेन्स इंडियन ओपन के आखिरी दिन उन्होंने खिताब पर कब्जा जमाया और यूरोपियन टूर टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

बैंगलुरू की 18 वर्षीय खिलाड़ी ने लेडिज यूरोपियन टूर जीतकर अपने सत्र का अंत किया और 2017 के लिए एलपीजीए टूर कार्ड भी हासिल कर लिया। ऐसे खेल में जहां भारत के कुछेक नाम नजर आते हैं, वहां अदिति अपनी जगह बना रही हैं।

9. टेस्ट रैंकिंग में भारत बना नंबर 1

पांच साल के अंतराल के बाद भारत आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में पहले स्थान पर पहुंचा, इसमें एक कारण श्रीलंका का आॅस्ट्रेलिया को हराना भी था लेकिन भारतीय खिलाड़ियों की मेहनत को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इस स्थान पर लंबे समय तक बरकरार रह पाने पर कई लोगों ने सवाल उठाये थे लेकिन विराट कोहली की कप्तानी में वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड और अब इंग्लैंड को दी करारी शिकस्त के बाद आलोचकों को यकीन हो गया है कि टीम इंडिया को यहां से हटाना आसान नहीं है। फिलहाल उन्हें अभी विदेशी सरजमीं पर होने वाले मुकाबलों का इंतजार है। लेकिन तब तक भारत पहले पायदान पर ही रहेगा। लेकिन भारतीय प्रशंसकों के लिए सबसे बड़ी खुशी की बात ये थी कि नंबर 1 का ताज भारत ने किसी और टीम से नहीं बल्कि पाकिस्तान से हासिल किया था।

8. भारत ने जीता तीसरा कबड्डी विश्व कप

ऐसे ज्यादा खेल तो नहीं हैं जहां भारत की पकड़ हो लेकिन जो भी हैं वहां भारत का दबदबा पूरी तरह से कायम है और ऐसा ही एक खेल है कबड्डी। नौ साल के अंतराल के बाद अहमदाबाद में तीसरे कबड्डी विश्व कप का आयोजन किया गया और पिछले दो बार की तरह ही इस बार भी भारत ने ही जीत का परचम लहराया। बहरहाल, इस बार जीत के लिए भारत को थोड़ी ज्यादा मशक्कत करनी पड़ी।

कोरिया ने शुरूआती मुकाबले में ही उलटफेर करते हुए भारत को 34-32 से हराया था लेकिन भारत ने वापसी करते हुए फाइनल में जगह बनाई जहां उनका मुकाबला ईरान के साथ हुआ। हाफ-टाइम तक भारत ईरान से 13-18 से पीछे चल रहा था लेकिन अजय ठाकुर के जबर्दस्त प्रदर्शन की बदौलत भारत ने ये मुकाबला 38-29 से जीता।

7. विजय-रथ पर सवार सानिया मिर्जा और उनकी नंबर 1 रैंकिंग

इस साल का अंत सानिया मिर्जा के लिए वैसा तो नहीं रहा जैसी इसकी शुरूआत हुई थी। लेकिन वो शुरूआत भी कमाल की रही थी। मिर्जा और मार्टिना हिंगिस ने आॅस्ट्रेलिया ओपन का खिताब जीता और इस दौरान उन्होंने सिर्फ एक सेट गंवाया था। ये दोनों खिलाड़ी 36 मुकाबलों तक अपराजित रहीं और उन्होंने 1994 में गीगी फर्नानडिज और नताशा जवेरवा के रिकाॅर्ड को भी पीछे छोड़ दिया जिनके नाम लगातार 28 जीत दर्ज थी। सेंट पीटर्सबर्ग लेडिज ट्राॅफी में जीत दर्ज करने के साथ ही उन्होंने इस आंकड़े को 40 तक पहुंचा दिया और इस जोड़ी ने कतर ओपन में हिस्सा लिया। ये दोनों जानते थे कि इस टूर्नामेंट की जीत उनके लिए कितनी खास है। मगर अफसोस रूसी जोड़ी डेरिया कास्तकिना और एलिना वेस्नीना ने लगातार 41वीं जीत के बाद इनके सफर पर ब्रेक लगा दिया।

मिर्जा और हिंगिस ने अब अलग-अलग होकर खेलने का फैसला किया है। लेकिन भारतीय टेनिस स्टार महिला डबल्स रैंकिंग में लगातार दूसरे साल भी नंबर 1 पायदान पर बरकरार रही और ये पहला मौका है जब कोई भारतीय इतने लंबे वक्त तक शीर्ष पर रहा हो।

6. बैंगलुरू एफसी ने बनाई एएफसी कप के फाइनल में जगह

बैंगलुरू एफसी ने ये दिखा दिया कि इच्छाशक्ति और पेशेवराना नजरिया अपनाया जाए तो क्या कुछ हो सकता है और एक भारतीय क्लब सही निवेश और देखभाल से क्या हासिल कर सकता है। शून्य से शुरू करने वाली इस टीम में ज्यादातर वो खिलाड़ी थे जिन्हें आई लीग की दूसरी टीमों ने लेने से इंकार कर दिया था और आज की तारीख में ईस्ट बंगाल और मोहन बगान की ट्राॅफी मिलाकर भी उनसे कहीं ज्यादा आई लीग की ट्राॅफी ये क्लब जीत चुकी है। वजूद में आने के तीन साल के बाद से भारतीय फुटबाॅल में इसकी मौजूदगी देखते ही बनती है और देश में इस क्लब के प्रशंसकों की संख्या तो सोच से परे है।

इस अविश्वसनीय क्लब की कहानी में पिछले महीने एक और यादगार वाकया जुड़ गया। एएफसी कप के फाइनल में पहुंचने वाला ये पहला भारतीय क्लब बना। इराकी टीम एयर फोर्स क्लब से ये टीम 0-1 से मुकाबला हार गई लेकिन अपने संघर्ष से भारत में फुटबाॅल के एक नए युग का आगाज इन्होंने कर दिया है।

5. जिमनास्टिक में उभरी दीपा करमाकर

स्वतंत्रता दिवस पर लोगों के दिन की शुरूआत जिमनास्टिक का नाम सुनकर हुई। एक बिलियन से ज्यादा का आबादी वाला ये मुल्क आधी रात तक टेलीविजन के सामने कुछ ऐसा देख रहा था जिसे वो समझ भी नहीं पा रहे थे। खेलों के सबसे बड़े इवेंट में दीपा करमाकर दुनिया के सामने ‘वाॅल्ट आॅफ डेथ’ करने वाली थी। कुछ साल पहले तक ओलंपिक में जिमनास्टिक फाइनल में भारतीय खिलाड़ी की मौजूदगी के बारे में सोच पाना भी मुश्किल था। 2010 में हुए दिल्ली काॅमनवेल्थ खेलों के दौरान भारत ने जिमनास्टिक में पहला अंतर्राष्ट्रीय पदक जीता था। लेकिन दीपा करमाकर ने सब कुछ बदल कर रख दिया।

ओलंपिक में जिमनास्टिक के फाइनल में पहली भारतीय के तौर पर उतरीं दीपा करमाकर ने महिला वाॅल्ट में 15.066 के स्कोर के साथ 4थे पायदान पर अपनी जगह बनाई। अपनी पहली कोशिश में उन्होंने 14.866 का स्कोर किया लेकिन अगली कोशिश में बेहतर करते हुए उन्होंने 15.266 का स्कोर किया। हां, भले ही वो पदक से चूक गईं लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए की मिल्खा सिंह और पीटी उषा को आज भी एक बड़े ओलंपियन के तौर पर याद किया जाता है। दीपा के पास 2020 टोक्यो ओलंपिक में एक और मौका होगा, जहां वो फिर एक बड़े बदलाव की वजह बन सकती हैं।

4. विराट कोहली, जिन्हें रोक पाना है मुश्किल

क्रिकेट में ये साल पूरी तरह से कोहली के ही नाम रहा जैसा सचिन तेंडुलकर के लिए साल 1998 रहा था। दूसरे खेलों में आंकड़े आपके हुनर के बारे में ज्यादा नहीं बता सकते हैं लेकिन क्रिकेट उन कुछ खेलों में से एक है जहां आंकड़े आपके खेल के बारे में काफी कुछ कहते हैं। सीमित ओवर के क्रिकेट में कोहली की काबिलियत किसी से छिपी नहीं है और अब वो टेस्ट प्रारूप में भी बेहतर कर रहे हैं और नई उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। मौजूदा भारतीय टीम के कप्तान इस वक्त दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज हैं जिनका क्रिकेट के सभी प्रारूपों में 50 से ज्यादा का औसत है।

आईपीएल में विराट कोहली की पावर हिटिंग इस खेल को दूसरे स्तर पर ले जा चुकी है। आरसीबी के कप्तान ने 38 छक्कों की मदद से 16 पारियों में 81.08 औसत से 973 रन बनाए। कोहली ने एकदिवसीय मुकाबलों में 739 और टी20 में 640 रन बनाएं हैं। इंग्लैंड के खिलाफ हुई टेस्ट सीरीज में 655 रन बनाकर कोहली टाॅप स्कोरर बने। मुंबई टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ दोहरा शतक लगाने के साथ ही कोहली पहले ऐसे भारतीय बल्लेबाज बने जिन्होंने एक कैलेंडर ईयर में तीन दोहरे शतक लगाए। उन्हें इस वक्त रोकने वाला कोई नहीं है।

3. विजेंदर ने जीता डब्ल्यूबीओ टाइटल

प्रो बाॅक्सिंग में आए विजेंदर सिंह ने अपनी सनसनी से विरोधियों को हैरान कर रखा है। पूर्व ओलंपिक मेडलिस्ट ने साल की शुरूआत एलेक्जेंडर होरवथ को हराकर की और उसके बाद उन्होंने मतिओज़े रोयर और एंड्रेज़ेज सोल्ड्रा को हराकर जीत का सिलसिला बरकरार रखा। 6-0 के रिकाॅर्ड के साथ, 31 वर्षीय इस खिलाड़ी ने त्यागराज स्पोट्र्स काॅम्पलेक्स में प्रवेश किया, प्रो बाॅक्सिंग में जाने के बाद और पूर्व यूरोपियन चैंपियन कैरी होप को हराने के बाद घरेलू दर्शकों के सामने ये विजेंदर का पहला मुकाबला था। 

उनकी भिडंत विश्व चैंपियन फ्रांसिस चेका से हुई जो प्रो बाॅक्सिंग की दुनिया में एक बड़ा नाम है लेकिन तीसरे ही राउंड में विजेंदर ने उन्हें नाॅक आउट कर दिया और अपने खिताब पर कब्जा बरकरार रखते हुए  उन्होंने रिकाॅर्ड 8-0 कर लिया। उनसे 2017 में भी इसी तरह की कामयाबी की उम्मीद है।

2. साक्षी मलिक की यादगार जीत

रोहतक में ईश्वर दहिया की निगरानी में लड़कों के साथ कुश्ती करने से लेकर रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने तक का साक्षी मलिक का सफर किसी कहानी से कम नहीं है। 

कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में वो 0-5 से पीछे चल रही थी। घड़ी में 9 सेकंड का वक़्त रहते ही साक्षी ने अपनी विरोधी को धकेल कर निश्चित एरिया से बाहर कर दिया और उन्हें मिले अंक से ये बाउट 5-5 की बराबरी पर आ गया। आखिरी कुछ सेंकड में उसने किसी तरह दो अंक हासिल कर लिए और अपील के बाद स्कोरलाइन 8-5 पर पहुंच गया जिसकी बदौलत भारत को रियो ओलंपिक में पहला पदक मिला। इस खेल में साक्षी मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला रेसलर बनीं और उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न अवाॅर्ड से भी नवाजा गया।

1. पीवी सिंधु ने जीता ऐतिहासिक रजत पदक

पीवी सिंधु साल में अच्छे प्रदर्शन के साथ रियो पहुंची और वहां जाकर उन्हें भारतीय तिरंगे के साए में खड़े होने का मौका मिला। साइना नेहवाल की मौजूदगी के बावजूद, सिंधु ने खुद की पहचान स्थापित की और बैंडमिंटन में भारत को नई उम्मीद दी। रियो में फाइनल तक पहुंचने के लिए सिंधु ने जबर्दस्त प्रदर्शन दिखाया लेकिन मारिन के खिलाफ हुए आखिरी मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इस हार के बदले में वो करोड़ों हिन्दुस्तानियों का दिल जीत चुकी थी। क्वार्टर में उन्होंने दुनिया की नंबर 2 खिलाड़ी को जिस तरह से हराया था, उसका कोई जवाब ही नहीं था।

फाइनल मुकाबले में पीवी सिंधु पीले रंग की ड्रेस में कोर्ट पर पहुंची और शाम ढलने के साथ वो एक चमचमाते हुए मेडल के साथ बाहर निकली। बहरहाल वो स्वर्ण पदक नहीं था। दुनिया की नंबर 1 खिलाड़ी केरोलिना मारिन के खिलाफ हुए रोमांचक मुकाबले में वो 21-19, 12-21, 15-21 से हार गई और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। रियो ओलंपिक 2016 में ये भारत का सबसे बड़ा मौका था, जहां सारे हिन्दुस्तानी जश्न में डूबे थे। 

सिंधु अब बैंडमिंटन के शीर्ष पर आने के लिए संघर्ष कर रही है और इसका आगाज़ वो चीन ओपन के रूप में अपना पहला सुपर सीरीज टाइटल जीत कर कर चुकी है।

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