देसी खेल और ब्रांड का महत्व

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देसी खेल और ब्रांड का महत्व

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Amit Tyagi

09/11/2016

कॉमनवेल्थ गेम्स एवं उस समय के ओलिंपिक में भारतीय पहलवानों की बॉक्सिंग और कुश्ती की प्रतिभा से रूबरू होने के बाद जब विज्ञापन जगत ने सुशील कुमार और विजेंदर के साथ मैरी कॉम को विज्ञापनों में इस्तेमाल करना शुरू किया तो सवाल सिर्फ एक था, क्या जमीन से जुड़े इन खिलाडियों को फिल्मस्टार की तरह ही भुगतान किया जायेगा? योग गुरु बाबा रामदेव के घी का प्रचार करने उतरे सुशील या बॉलीवुड के कई कार्यक्रम में भाग ले रहे विजेंदर के बाद जब बिग बॉस में एक खिलाडी प्रवेश पहुंचा तो सबको यकीन हुआ कि अब खिलाडियों के भी दिन फिर गए लगते हैं।

भारतीय कुश्ती स्टार साक्षी मालिक को कई सारे ब्राण्ड के प्रमोशन के लिए अप्रोच किया जा रहा है. रियो ओलंपिक में मेडल जीतने के बाद साक्षी की ब्रांड वैल्यू 8 गुना बढ़कर 1.6 करोड़ रूपये हो गयी है.साक्षी को हरियाणा एवं अन्य राज्यो की सरकारों ने नकद पुरस्कार दिया है। ओलिंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन एवं सरकारों द्वारा मिले नकद पुरस्कार के बाद साक्षी की ब्रांड वैल्यू में बढ़ोत्तरी हुई है।

रियो ओलिंपिक में सिल्वर जीतकर इतिहास रचने वाली बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु से अपने ब्रांड का प्रचार कराने के लिए कई कंपनियां कतार में हैं। हाल में ही संपन्न रियो में सिल्वर जीतने से सिंधु की ब्रांड वैल्यू में करीब 10 गुना इजाफा हुआ है। ओलिंपिक में सिंधु की सफलता के बाद कई राज्य सरकारों ने उन्हें इनामी राशि दी है, इसके चलते उनके ब्रांड वैल्यू बढ़ रही है।

रियो की सफलता के तुरंत बाद तेलंगाना सरकार ने सिंधु को 5 करोड़ रुपए के अलावा हैदराबाद में एक प्लॉट दिया. इसके बाद आंध्रप्रदेश सरकार ने उन्हें 3 करोड़ रुपए दिए. दिल्ली सरकार ने उनके लिए 2 करोड़ का इनाम घोषित किया जबकि बीपीसीएल ने उन्हें 75 लाख रुपए दिए. इसके अलावा अन्य कई राज्य सरकारों और  संस्थाओं ने भी उनके लिए इनाम की घोषणा की है। ओलिंपिक की यह सफलता लोगों के दिलों-दिमाग पर लंबे समय छाए रहने की उम्मीद है और इसके चलते सिंधु की छवि और ब्रांड वैल्यू को लाभ मिलेगा।

पा कर्मकार ने जिम्नास्टिक की वॉल्ट स्पर्धा में चौथा स्थान हासिल करके इतिहास रचा था. दीपा की ब्रैंड मार्केट में सिंधु जैसी धूम नहीं है, पर इन्हें अच्छी-खासी लोकप्रियता मिली है। इनकी ब्रैंड वैल्यू इस पर निर्भर करेगी कि आने वाले दिनों में वे अपनी ब्रैंड इमेज को कितना मजबूत करती हैं। अभी इनके पास सीमेंट, दर्द निवारक और बीमा कंपनियों के प्रस्ताव आ रहे हैं. इन्हें साल भर के हिसाब से 35-40 लाख रुपये मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में ये अपनी छवि जैसी बनाएंगी, उसी हिसाब से इनकी वैल्यू में बदलाव होगा।

महिला खिलाडियों में इस वक़्त साइना नेहवाल देश की सबसे बड़ी ब्रैंड हैं। रियो ओलिंपिक में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के बाद और घुटने के ऑपरेशन के कारण बैडमिंटन से अलग होने की वजह से हालाँकि उनकी ब्रैंड वैल्यू बरही नहीं है, लेकिन यह बहुत मशक्कत के बाद बनी है। पहले ओलिंपिक में कांस्य पदक, फिर विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर और विश्व रैंकिंग में पहले नंबर पर पहुंचकर साइना ने एक दमदार खिलाड़ी की छवि बनाई है। साइना इस समय एक ब्रैंड के लिए तीन-साढ़े तीन करोड़ रुपये लेती हैं। वह गोदरेज, स्टार स्पोर्ट्स, इमामी, नो मार्क्स, इंडियन ओवरसीज बैंक सहित दर्जन भर ब्रैंड के साथ हैं।

महिला खिलाड़ियों में सानिया मिर्जा का भी जलवा कायम है. सानिया की फीस सालाना एक से डेढ़ करोड़ रुपये है। वह एडिडास, विल्सन, वेनकोब चिकन, स्प्राइट समेत दस ब्रैंड के साथ काम कर रही हैं। सानिया मिर्जा की ब्रैंड वैल्यू हालाँकि ऊपर-नीचे होती रही है। जब उन्होंने सिंगल्स में कामयाबी हासिल की तो  उनकी ब्रैंड वैल्यू तेजी से बढ़ी, बाद में चोटों के कारण करियर गड़बड़ाने पर इसमें गिरावट आई।

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