महिला होने के कारण मेरे साथ हुआ पक्षपात, सानिया मिर्ज़ा ने किया खुलासा

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महिला होने के कारण मेरे साथ हुआ पक्षपात, सानिया मिर्ज़ा ने किया खुलासा

सानिया मिर्ज़ा ने इस बात का खुलासा किया कि महिला खिलाड़ी होने के कारण, कैसे उन्हें कई मौकों पर पक्षपात का सामना करना पड़ा और इन सभी दिक्कतों ने उन्हें और मज़बूत बना दिया। विश्व की न. 1 युगल खिलाड़ी ने कहा कि 2016 के रियो ओलंपिक्स में कांस्य पदक न जीत पाना उनके लिए साल की सबसे बड़ी हार थी।

शुक्रवार को TOI को दिये गए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में, सानिया ने महिला खिलाड़ियों द्वारा सामना किये गए दिक्कतों के बारे में बताते हुए कहा कि महिला होने के कारण उनसे किये गए व्यवहार ने उन्हें समाज की बुराइयों का सामना करने के लिए मज़बूत बना दिया दिया है। 

“शायद मेरे महिला होने के कारण कई मौकों पर मुझे पक्षपात का सामना करना पड़ा है। जैसे सवाल मुझसे पूछे जाते हैं वे किसी पुरुष खिलाड़ी से शायद ही पूछे जाते हैं, लेकिन मेरे सामने वैसे सवाल रखे जाते हैं, जो सही नहीं है।”

“उन अनुभवों ने मुझे ऐसे असमानता के मुद्दों के खिलाफ खड़े होने के लिए मज़बूत बना दिया है। मैं हमेशा से ही उन मुद्दों के लिए खड़ी हुई हूँ जो मेरे दिल के करीब रहा है, फिर चाहे वह गरीब बच्चों की मदद करना हो या कुछ और।  

“कई बार मैंने यह देखा है, कि मुझसे एक ख़ास किस्म का व्यवहार किया जाता है क्योंकि मैं महिला हूँ, ज़रूरी नहीं कि वह व्यवहार ग़लत हो, लेकिन वह एक ‘ख़ास किस्म’ का होता है। हर बार लोग मुझसे महिलाओं के मुद्दों पर सवाल पूछते हैं, मैं उनसे कहती हूँ कि इसकी शुरुआत वहां से होती है जब एक महिला के साथ समान व्यवहार नहीं होता। महिलाएं आज भी काफी हद तक एक काल्पनिक जगत में जीती हैं,” सानिया ने कहा।   

रोहन बोपन्ना के साथ सानिया मिर्ज़ा की जोड़ी से ओलिंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन दोनों सेमी-फाइनल में हार गए जिससे USA के वीनस विलियम्स और राजीव राम के खिलाफ खेलकर उनके कांस्य पदक जीतना का मौका छीन गया। उस हार के बारे में बताते हुए, सानिया ने कहा कि उसका उनपर कितना गहरा असर हुआ था।

 “इस साल का सबसे बड़ी हार तब थी जब हम उस मैच (सेमी-फाइनल, फाइनल में स्थान बनाने से पहले का मैच) में हम हार गए और कांस्य पदक जीतने में सफल रहे। मैं उस मैच के बाद बहुत रोई थी, मैं प्रेस के सामने भी रो पड़ी। मैं कोर्ट से निकल गयी, क्योंकि मैं खुद को नियंत्रित नहीं कर पा रही थी। लोग कभी कभी सोचते हैं कि हम चूंकि रोज़ रोज़ हार या जीत का सामना करते हैं तो यह हमारे लिए आसान होगा,” सानिया मिर्ज़ा ने कहा।  

मिर्ज़ा ने यह भी माना कि ओलंपिक्स में अच्छा प्रदर्शन खिलाड़ियों पर भी गहरा प्रभाव छोड़ता है क्योंकि हर चार साल में एक बार पदक जीतने का अवसर मिलता है।

 “लोगों ने नोवाक (जोकोविच) को रोते हुए देखा जब वह ओलंपिक्स में हार गए। टेनिस खिलाड़ी होने के नाते, हमें हर हफ्ते एक न एक मौका मिलता है। लेकिन ओलंपिक्स में ऐसा नहीं होता, इसीलिए हम टेनिस खिलाड़ी ओलंपिक्स में इतने भावुक हो जाते हैं,” उन्होंने कहा।

जब उनसे 2020 के टोक्यो ओलंपिक्स के बारे में पूछा गया, तो 29 वर्षीय खिलाड़ी ने प्रतियोगिता में भाग लेने की बात को स्पष्ट नहीं किया।

 “टोक्यो 2020 में भाग लेने के आसार कम ही हैं। पहले तो मुझे नहीं लगता कि मैं उस वक़्त तक स्वस्थ रहूंगी या नहीं। चार साल एक लम्बा समय है। सच कहूं तो, अगर मैंने खेल भी लिया तो मेरा प्रदर्शन शानदार नहीं होगा। यह सच्चाई है, खिलाड़ी होने के नाते हमें यह मानना पड़ता है कि एक वक़्त पर ही हम शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। मैं शायद प्रतियोगिता में भाग लेने योग्य रहूँ, लेकिन क्या मैं पदक जीतने योग्य रहूंगी? शायद नहीं,” सानिया ने कहा।

एक लम्बे समय तक साथी रही मार्टिना हिंगिस से अलग होने की बात पर सानिया ने कहा कि अलग होने से उनके बीच की दोस्ती ख़त्म नहीं होगी।

“कुछ रिश्तों की तरह, साझेदारियों का भी अपना एक वक़्त होता है। यही खेल का नियम है। लोगों को लगा कि अलग होने की वजह हमारे बीच आई दरार है, लेकिन हम आज भी दौरों पर अपना खाना बांटते हैं, साथ में लंच करते हैं। दोस्ती हमेशा रहेगी। यह एक पेशेवर निर्णय था,” उन्होंने कहा।

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