शारापोवा को मिली रियायत, टेनिस के लिए बड़ा नुकसान!!

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शारापोवा को मिली रियायत, टेनिस के लिए बड़ा नुकसान!!

अपने आलीशान बंगले में बैठी 29 वर्षीय मशहूर टेनिस खिलाड़ी बेसब्री से एक फोन काॅल का इंतजार कर रही थी। 4 अक्टूबर को आया ये काॅल उनके करियर का सबसे खास काॅल था।

उस फोन काॅल को रिसीव करते ही इस स्टार खिलाड़ी के चेहरे पर मुस्कान आ गई क्योंकि अब वो जान चुकी थी की वो टेनिस की दुनिया में 9 महीने पहले ही वापसी करने वाली है।

सीएएस द्वारा डोपिंग में लिप्त पाए जाने के बाद मारिया शारापोवा पर दो साल का प्रतिबंध लगाया गया था। एंडी मर्रे ने रूस की इस खिलाड़ी की आलोचना करते हुए कहा कि उनके पास प्रतिबंधित मेलडोनियम का सेवन करने का कोई ‘‘वैध कारण’’ नहीं था।

 मैं ये मानता हूं की अगर आप अपने विरोधी के खिलाफ उसे धोखा देकर फायदा कमा रहे हो तो आपको निश्चित ही इसके लिए दंडित करना चाहिए।  एंडी मर्रे

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शारापोवा की सजा को काफी हद तक यह कह कर कम किया की जिस पदार्थ के सेवन के लिए उन्हें दोषी माना गया है उस पदार्थ पर सिर्फ एक साल पहले ही प्रतिबंध लगाया गया है। उनकी सजा में की गई कटौती को लेकर मेरी समस्याएं तब खड़ी हुईं जब उन्होंने एक टीवी शो में अपना इंटरव्यू दिया। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या मेलडोनियम के सेवन जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, के पश्चात भी वही धैर्यता और सहनशीलता आप कायम रख पाती हैं? उनका जवाब सबको चौंका सकता था लेकिन हैरानी की बात है ऐसा नहीं हुआ।

शारापोवा ने जवाब देते हुए कहा की ‘‘देखिए, मैं अपनी मेडिकल टीम के साथ इसका वैकल्पिक उपाय तलाश कर रही हूं जो वैध और लेने योग्य हो।’’ यही परेशानी की वजह है। जब लांस आर्मस्ट्रांग को ब्लड ट्रांन्सफयूशन के लिए पकड़ा गया था तब अधिकतर साइकलिस्ट यही काम कर रहे थे। ना उस समय इसमें कोई सुधार हुआ और ना ही मौजूदा वक्त में कोई सुधार किया गया है। मेरे मुताबिक इन सभी पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए।

टेनिस के खेल में ये अप्रत्याशित नहीं था। पिछले कई सालों से एक्सपर्ट्स मेडिकल टेस्ट की संख्या को बढ़ाने पर जोर देते रहे लेकिन इसे पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। लंबे समय से आईओसी मेडिकल कमीशन के सदस्य रहे और यूसीएलए ओलंपिक एनालिटिकल लेबोरेटरी के संस्थापक डाॅ. डोनल्ड केटलिन ने कई अवसरों पर कहा की टेनिस एक खेल के तौर पर डोपिंग को खत्म करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है।

केटलिन ने ईएसपीएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा ‘‘दो साल पहले मैंने कहा था की मुझे लगता है टेनिस पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है और उन लोगों ने मुझे घेर लिया। लेकिन मुझे इस पर पूरा भरोसा है की उनका परीक्षण स्तर काफी कम है और उस पर मैं यकीन नहीं कर सकता। उनके परीक्षण शिथिलतापूर्ण थे जो सिर्फ खुश करने के लिए थे।’’

ईएसपीएन की रिसर्च से यह बात सामने आई की टेनिस डोपिंग के मामलों में बेहद लापरवाह है। दूसरे खेलों के मुकाबले में टेनिस में परीक्षण की संख्या काफी कम है और दोषियों की संख्या उनसे ज्यादा है। शोध के मुताबिक 985 टेस्ट में से केवल 1 केस में ही डोपिंग विरोधी नियमों का उल्लंघन होता पाया गया। अगर इन आंकड़ों को एथलेटिक्स और साइकलिंग के खेल से जोड़ कर देखें तो उनमें क्रमशः 274 और 296 टेस्ट में एक दोषी पाया जाता।

ईएसपीएन की रिपोर्ट से एक अहम बात सामने आई की 16 खिलाड़ियों के सैंपल्स में से केवल 1 सैंपल का ही परफाॅर्मेंस एन्हान्समेंट ड्रग्स के लिए विश्लेषण किया जाता है। ओलंपिक के दूसरे बड़े खेलों में आमतौर पर यही परीक्षण दो बार किया जाता है।

इसके लिए बड़े पैमाने पर ‘‘डोपिंग विरोधी’’ ये सफाई देते हैं की टेनिस के खेल में ‘‘चीटर्स’’ नहीं होते हैं। ये एक ऐसा खेल है जहां शारीरिक क्षमता से ज्यादा हुनर और प्रतिभा की जरूरत है और इसके लिए फेडरर का उदाहरण दे दिया जाता है। मगर इसे तथ्यों से दूर नहीं किया जा सकता है। ईएसपीएन ने खेल वैज्ञानिकों, अकादमी सदस्य और पत्रकारिता के माहिरों को मिलाकर एक पैनल, विश्व के सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले खेल का विश्लेषण करने के लिए बनाया। सहनशीलता, ताकत, शक्ति, गति आदि कुछ मापदंड होंगे जिसे आखिरी नतीजों का आंकलन करने के दौरान ध्यान में रखे जाएंगे।

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टेनिस सम्मान के साथ सातवें स्थान पर तो वहीं बाॅक्सिंग चार्ट में पहले स्थान पर रही। ‘‘नाॅन-एन्ड्यूरेन्स’’ खेलों में साइकलिंग 13 पायदान नीचे रही जबकि लंबी दूरी की दौड़ 40वें स्थान पर ही पहुंच पाई। इसलिए ये कहना की ये खेल बाकि खेलों के मुकाबले कम पसंद किया जाता है वह सरासर गलत होगा।

केवल एक्सपर्ट और प्रशंसक ही उनके पसंदीदा खेल में डोपिंग के विचार से नफरत नहीं करते बल्कि कई टेनिस खिलाड़ी भी और अधिक जांच के लिए कह चुके हैं लेकिन उनकी इस याचना को अनसुना कर दिया गया। 2012 में जब आर्म स्ट्रांग की दुखद गाथा सामने आई तब रोजर फेडरर ने खुले तौर पर टेनिस की दुनिया में डोपिंग के लिए होने वाली स्क्रीनिंग के तरीकों की आलोचना की।

हम साल में बहुत सारे ब्लड टेस्ट नहीं करवाते हैं। अगर इससे ज्यादा बार भी टेस्ट हुए तो फिर भी मैं खुश हूं। मेरे ख्याल से इतने टेस्ट होना लाजमी है। खेल को साफ और सर्वोच्च बनाए रखने के लिए ये बेहद जरूरी है। इन मामलों में हमारा इतिहास अच्छा है और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए की आगे भी ऐसा ही रहेगा।

रोजर फेडरर

पूर्व विश्व नंबर 1 आंद्रे अगासी ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा ‘‘मैं जानता हूं की मेरा एक साल में 8 बार रक्त जांच, 20 बार यूरीन टेस्ट हो चुका है। तीन बार बिना किसी पूर्व सूचना के मेरे घर के दरवाजे पर ही जांच के लिए टीम आई है। मुझे ये सब थोड़ा आक्रामक लगता था लेकिन अगर इससे ज्यादा बार भी ये परीक्षण होता तो मुझे दिक्कत नहीं होती। वहीं अगर टेस्ट की संख्या कम हो तो ये जरूर परेशानी का सबब बन सकता है।’’

ईएसपीएन ने नामों को गुप्त रखने का वादा करते हुए 31 प्रोफेशनल टेनिस खिलाड़ियों का सर्वेक्षण किया था जिसमें से 65 प्रतिशत खिलाड़ियों ने कहा की ड्रग टेस्ट की संख्या बढ़नी चाहिए। उन्होंने ये भी बताया की वो व्यक्तिगत तौर पर उन खिलाड़ियों को भी जानते हैं जो पीईडी का उपयोग करते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा की पीईडी उपयोग करने वाले खिलाड़ी कुल खेलने वाले खिलाड़ियों का 10 प्रतिशत से भी कम है।

विक्टर काॅन्टी जिन्होंने बे एरिया लैबोरेटरी को-ओपरेटिव (बीएएलसीओ) की स्थापना की और हाई प्रोफाइल एथलीट से जुड़ी संघीय जांच के बाद चार महीने जेल में भी अपनी सेवाएं दी। इस दौरान उनकी लिस्ट में सबसे बड़ा नाम बेरी बाॅन्ड्स का रहा। इस बारे में वो कहते हैं ‘‘जैसा मैंने अपने करियर के आखिर में कहा था की कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनका परीक्षण करना संभव नहीं है।’’

‘‘वो लोग उन चीजों का परीक्षण नहीं कर रहे हैं जो वाकई महत्वपूर्ण है, जिसे लोग जानना चाहते हैं और अगर मौजूदा वक्त में उनका परीक्षण हो रहा है तो मुझे उसकी जानकारी नहीं है।’’

ये असल में चूहे-बिल्ली के खेल की तरह है इसलिए वाडा को कानून बनाते समय इस बात का ध्यान रखना होगा की डोपिंग करने वाले शख्स के दूसरे हाथ में हमेशा एक विकल्प उपलब्ध होता है। शारापोवा के प्रतिबंध को कम करने से वो लोग हतोत्साहित नहीं होंगे जो यही काम करते हैं। दो साल का प्रतिबंध जो मेरे विचार से बहुत कम है, उसे वैसा ही रहने देना चाहिए था ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा ना दोहराई जाए।

हालांकि कोई भी जो टेनिस को लगातार देखता है वो सीएएस के फैसले से अचंभित नहीं हुआ होगा। पहले भी मारिन सीलिक (नाइकेथमाइडः नौ महीने के प्रतिबंध को घटाकर चार महीने), रिचर्ड गेसकट (कोकीनः 12 महीने का प्रतिबंध पूरा हटा दिया गया) और ग्रेग रूसडस्की (नान्ड्रोलोनः कोई प्रतिबंध नहीं) पर लगे प्रतिबंधों को खिलाड़ियों की अपील पर सीएएस द्वारा या तो कम किया गया या हटा दिया गया।

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सबसे बुरा प्रकरण तो आंद्रे अगासी से संबंधित है जिन्होंने सबको चैंकाते हुए अपनी आत्मकथा में उनके द्वारा 1977 में क्रिस्टल मेथ के उपभोग के रहस्य को उजागर किया। उन्होंने एटीपी से झूठ कहा था कि उन्होंने यह ड्रग दुर्घटनावश लिया था। एटीपी ने भी उनकी जांच के नतीजों को दुनिया से छिपाए रखा जब तक की वह खिलाड़ी उस खेल का पोस्टर बाॅय ना बन जाए।

तो एटीएफ ने इन कसूरवार खिलाड़ियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही क्यों नहीं की? जवाब बहुत ही आसान है की एटीपी और डब्ल्यूटीए इस खेल के उसी पहचान को कायम रखना चाहते हैं जिसमें यह खेल कभी भी इतने बड़े ड्रग प्रकरण से दूषित नहीं हुआ है और इस पहचान को कायम रखने के लिए उन्होंने अब तक कठोर परिश्रम किया है। ऐसा करके वे सालाना प्रर्वतक राजस्व के रूप में 250 मिलियन डाॅलर से भी अधिक कमाते हैं और वहीं स्पाॅन्सरशिप डील से वे एक बिलियन डाॅलर से भी ज्यादा अपने खजाने में जमा करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए उन्हें ऐसे मामलों को दरकिनार करने का उद्देश्य मिल जाता है।

हमें लगा था की यकीनन ही शारापोवा वाले प्रकरण से आने वाले टेनिस सुपरस्टार की पीढ़ी कुछ सबक अवश्य लेगी और उनमें खुदा का डर जरूर कायम रहेगा। लेकिन सीएएस ने हमें दोबारा गलत साबित कर दिया। शारापोवा की कोर्ट पर वापसी उनके प्रशंसकों के लिए काफी खुशी की बात है वहीं खुद को ‘‘विक्टिम’’ पेश करके शायद इस रूसी खिलाड़ी का कद और बढ़ जाए।

अगर टेनिस खुद का सम्मान बनाए रखना चाहता है तो ऐसे परीक्षणों में कुछ बड़े और कठोर बदलावों की जरूरत है और अधिक पारदर्शिता की भी आवश्यकता है। अपराधियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए और साथ ही सीएएस को ऐसे मामलों में सजा निरस्त करके खेल का उपहास नहीं करना चाहिए।

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